
नई दिल्ली। इन दिनों देश के पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर सरगर्मी तेजी है। राजनीतिक दलों का एक दूसरे पर आरोपों-प्रत्यारोपों का दौरा जारी है। इसी बीच भारतीय राजनीति का स्तर एक बार फिर विवादों के गहरे भंवर में फंस गया है, जहां शब्दों की मर्यादाएं पूरी तरह तार-तार होती नजर आ रही हैं।
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सांप से की RSS की तुलना
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा केरल की एक चुनावी जनसभा में भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तुलना जहरीले सांप से करने और उन्हें मार देने की बात कहने पर पूरे देश का सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। इस बयान के सामने आते ही भारतीय जनता पार्टी ने जबरदस्त और आक्रामक पलटवार किया है, जिसमें बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कांग्रेस पर देश में हिंसा भड़काने और एक विशेष समुदाय को उकसाने का गंभीर आरोप लगाया है।

भाजपा ने मल्लिकार्जुन खरगे के इस बयान को न केवल आपत्तिजनक और अलोकतांत्रिक बताया है, बल्कि इसे सीधे तौर पर हत्या की सुपारी और कत्लेआम का आह्वान करार दिया है। शहजाद पूनावाला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो संदेश जारी करते हुए कांग्रेस पार्टी पर तीखा प्रहार किया और कहा कि, अब आईएनसी का मतलब इंडियन नेशनल कांग्रेस नहीं रह गया है बल्कि यह अब इंडियन जिहादी कांग्रेस बन चुकी है, जो सत्ता हथियाने के लिए किसी भी हद तक गिरकर नफरत फैला सकती है।
भाजपा ने किया पलटवार
पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब केरल में मुस्लिम बहुल इलाके में एक जनसभा को संबोधित करते हुए मल्लिकार्जुन खरगे ने धार्मिक ग्रंथों का सहारा लेकर भाजपा और आरएसएस पर निशाना साधा। खरगे ने अपने संबोधन में कहा कि, कुरान में यह उल्लेख मिलता है कि यदि कोई व्यक्ति नमाज पढ़ रहा हो और उस समय उसके सामने कोई जहरीला सांप आ जाए तो उस नमाज को छोड़कर पहले उस सांप को मार देना चाहिए। इसके तुरंत बाद खरगे ने इस उदाहरण को राजनीति से जोड़ते हुए कहा कि भाजपा और आरएसएस आज के समय के वही जहरीले सांप हैं और यदि इन्हें समय रहते नहीं मारा गया तो मुल्क की जान बचाना और देश के लोकतंत्र को सुरक्षित रखना पूरी तरह मुश्किल हो जाएगा।
खरगे का यह बयान सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल गया और इसके तुरंत बाद भाजपा की तरफ से तीखी प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया, जिसमें भाजपा ने इसे कांग्रेस की हताशा और मुस्लिम वोट बैंक को साधने की एक खतरनाक कोशिश बताया है। शहजाद पूनावाला ने अपने पलटवार में कहा कि, यह पहली बार नहीं है जब कांग्रेस ने इस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया हो बल्कि यह उनके पुराने और हिंसक इतिहास का हिस्सा रहा है।
मुस्लिम मतदाताओं को भड़काया
भाजपा का आरोप है कि, मल्लिकार्जुन खरगे मुस्लिम मतदाताओं को सीधे-सीधे भड़का रहे हैं, ताकि वे भाजपा और आरएसएस के खिलाफ शारीरिक हिंसा पर उतारू हो सकें जो कि किसी भी लोकतांत्रिक देश के लिए एक बहुत बड़ा खतरा है। शहजाद पूनावाला ने कांग्रेस के इतिहास की याद दिलाते हुए कहा कि, 1984 में सिखों के नरसंहार के समय भी कांग्रेस की मानसिकता ऐसी ही थी जब हजारों निर्दोषों के कत्लेआम को एक बड़ा पेड़ गिरता है, तो धरती हिलती है’ जैसे बयानों से जायज ठहराने की कोशिश की गई थी।
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि, खरगे का यह बयान शुद्ध रूप से अपने राजनीतिक विरोधियों की हत्या करवाने का एक खुला निमंत्रण है और इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। भाजपा ने इस पूरे मामले को लेकर चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाया है और मांग की है कि मल्लिकार्जुन खरगे के खिलाफ आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने के जुर्म में सख्त कार्रवाई की जाए।
भाजपा का तर्क है कि एक राष्ट्रीय पार्टी के अध्यक्ष द्वारा इस तरह की भाषा का उपयोग करना यह दर्शाता है कि कांग्रेस अब वैचारिक लड़ाई हार चुकी है और अब वह नफरत और हिंसा के सहारे चुनाव जीतना चाहती है। भाजपा ने इसे कांग्रेस के पतन का सबसे बुरा दौर बताते हुए कहा कि यह सबसे अलोकतांत्रिक और आपातकालीन मानसिकता वाला बयान है जो देश की एकता और अखंडता के लिए एक बड़ी चुनौती पेश करता है।
कांग्रेस को घेरने की तैयारी
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पांच राज्यों के चुनाव परिणाम आने वाले समय में देश की राजनीति की दिशा तय करेंगे और इसी कारण कांग्रेस नेतृत्व पर मुस्लिम वोटों के ध्रुवीकरण का भारी दबाव है। केरल जैसे राज्यों में जहाँ अल्पसंख्यक आबादी एक निर्णायक भूमिका में होती है वहाँ खरगे का यह बयान मुस्लिम वोट बैंक को कांग्रेस की ओर मजबूती से खींचने की एक रणनीति का हिस्सा हो सकता है लेकिन इसके साथ ही इसने भाजपा को एक बड़ा मुद्दा दे दिया है जिससे वह कांग्रेस को घेरने की कोशिश कर रही है।
भाजपा का दावा है कि, खरगे ने पहले भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ रावण और सांप जैसे शब्दों का उपयोग किया था, लेकिन इस बार मार देने की बात कहकर उन्होंने सारी हदें पार कर दी हैं। शहजाद पूनावाला ने कहा कि, चुनाव आयोग को इस मामले में तुरंत संज्ञान लेना चाहिए और खरगे के चुनाव प्रचार करने पर रोक लगानी चाहिए ताकि देश में चुनावी माहौल शांतिपूर्ण बना रहे।
यह विवाद अब केवल बयानों तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि इसने एक बड़ी वैचारिक बहस को भी जन्म दे दिया है कि क्या चुनावी फायदों के लिए धार्मिक ग्रंथों और हिंसक उदाहरणों का उपयोग करना उचित है, जहां कांग्रेस इस बयान को एक रूपक या उदाहरण बताकर अपना बचाव कर सकती है, वहीं भाजपा इसे देश में गृहयुद्ध जैसी स्थिति पैदा करने की कोशिश बता रही है।
मुश्किल में घिर सकती है कांग्रेस
आने वाले दिनों में यह विवाद थमने के बजाय और अधिक बढ़ने के आसार हैं, क्योंकि भाजपा इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाने की तैयारी कर रही है ताकि कांग्रेस की हिंदू विरोधी और हिंसक छवि को उजागर किया जा सके। कुल मिलाकर मल्लिकार्जुन खरगे के इस एक बयान ने भारतीय राजनीति के गिरते स्तर और चुनावी ध्रुवीकरण की गहरी खाई को एक बार फिर दुनिया के सामने रख दिया है और अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि, चुनाव आयोग इस जहरीली होती राजनीति पर किस तरह का कड़ा रुख अपनाता है ताकि लोकतंत्र की मर्यादा सुरक्षित रह सके।
यह पूरी घटना दर्शाती है कि चुनाव के समय मुद्दों की राजनीति किस तरह व्यक्तिगत आक्षेपों और हिंसक शब्दावली के नीचे दब जाती है जिससे अंततः जनता का ही नुकसान होता है क्योंकि असल विकास के मुद्दे इस शोर में कहीं खो जाते हैं और केवल नफरत की राजनीति ही शेष रह जाती है। भाजपा ने स्पष्ट कर दिया है कि वे इस मुद्दे को हल्के में नहीं लेंगे और देश के हर कोने में कांग्रेस की इस जिहादी मानसिकता का पर्दाफाश करेंगे जबकि कांग्रेस रक्षात्मक मुद्रा में रहकर इसे भाजपा की साजिश बता रही है लेकिन ‘मार देने’ वाले संदर्भ ने निश्चित रूप से कांग्रेस के लिए एक बड़ी मुसीबत खड़ी कर दी है जिसका जवाब देना उनके लिए आसान नहीं होगा।
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