
रुद्रप्रयाग। देवभूमि उत्तराखंड में इस समय आस्था का ऐसा सैलाब उमड़ा है कि, प्रशासन के सभी वादों और दावों की हवाइयां उड़ गई हैं। दरअसल, इस समय विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा अपने चरम पर है। महज 23 दिनों के भीतर 11 लाख से अधिक दर्शनार्थी यहां आ चुके हैं। आलम ये है कि, प्रतिदिन औसतन 50 हजार श्रद्धालु चारों धामों में माथा टेकने पहुंच रहे हैं, लेकिन सबसे चुनौतीपूर्ण स्थिति बाबा केदार की नगरी केदारनाथ धाम में बनी हुई है।
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यात्रा प्रबन्धन की खुली पोल
केदारनाथ पैदल मार्ग के मुख्य पड़ाव सोनप्रयाग में मंगलवार, 12 मई को जो नजारा देखने को मिला, उसने यात्रा प्रबंधन की पोल खोलकर रख दी है। हजारों की संख्या में श्रद्धालु घंटों तक जाम और लंबी कतारों में फंसे रहे, जिससे न केवल उनकी आस्था की परीक्षा हुई बल्कि प्रशासन की तैयारी पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

यात्रा के आंकड़ों पर गौर करें, तो केदारनाथ धाम के प्रति श्रद्धालुओं का आकर्षण इस कदर बढ़ा है कि, मात्र 20 दिनों के भीतर साढ़े चार लाख से अधिक लोग बाबा केदार के दर्शन कर चुके हैं। भीड़ का आलम यह है कि, केदारनाथ यात्रा मार्ग पर पैर रखने तक की जगह नहीं मिल रही है। मंगलवार की सुबह जब सोनप्रयाग से यात्रा शुरू होनी थी, तब वहां श्रद्धालुओं का एक हुजूम उमड़ पड़ा। देखते ही देखते पूरा इलाका छावनी और जाम के केंद्र में तब्दील हो गया।
वायरल हुआ वीडियो
भीषण जाम के कारण छोटे बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा मुश्किलों का सामना करना पड़ा। कई यात्री थकान और भूख-प्यास से बेहाल होकर सड़क किनारे बैठने को मजबूर हो गए। यात्रियों में इस अव्यवस्था को लेकर भारी नाराजगी देखी गई, क्योंकि घंटों इंतजार करने के बाद भी उन्हें आगे बढ़ने का रास्ता नहीं मिल पा रहा था। सोनप्रयाग में भीड़ का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले 10 मई को भी यहां से भारी भीड़ और अव्यवस्था का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसके बाद सरकार और प्रशासन ने धामों की कैरिंग कैपेसिटी यानी वहन क्षमता को लेकर चर्चाएं शुरू की थीं।
विशेषज्ञ दे रहे चेतावनी
विशेषज्ञ बार-बार चेतावनी दे रहे हैं कि हिमालयी क्षेत्रों की एक सीमित क्षमता है, उससे अधिक लोगों का पहुंचना न केवल अव्यवस्था फैलाता है बल्कि सुरक्षा के लिहाज से भी जोखिम भरा है। बावजूद इसके, धरातल पर ट्रैफिक प्रबंधन की स्थिति जस की तस बनी हुई है। स्थानीय लोगों और व्यापारियों का भी कहना है कि सोनप्रयाग में आए दिन लग रहा यह जाम यात्रा के सुगम संचालन में सबसे बड़ी बाधा बन गया है। वाहनों के बढ़ते दबाव और संकरे रास्तों ने यातायात व्यवस्था को पूरी तरह चरमरा दिया है।
श्रद्धालुओं ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि, केवल पंजीकरण करना ही काफी नहीं है, बल्कि धरातल पर ट्रैफिक कंट्रोल और यात्रियों की सुविधाओं के लिए पुख्ता इंतजाम होने चाहिए। यात्रियों का तर्क है कि, जब वे इतनी दूर से और भारी खर्च करके बाबा के दर्शन को आते हैं, तो उन्हें इस तरह की अमानवीय स्थितियों का सामना नहीं करना चाहिए। ट्रैफिक मैनेजमेंट को और अधिक वैज्ञानिक और व्यवस्थित बनाने की जरूरत है ताकि घंटों जाम में फंसे रहने की नौबत न आए।
भीड़ ने छुड़ाए प्रशासन के पसीने
एक तरफ जहां भीड़ ने प्रशासन के पसीने छुड़ा रखे हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रकृति ने भी अपनी आंखें तरेरनी शुरू कर दी हैं। मौसम विभाग ने आज 12 मई और कल 13 मई के लिए उत्तराखंड के कई जिलों में भारी बारिश और गर्जन का ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया है। इस अलर्ट के दायरे में चारधाम यात्रा से जुड़े प्रमुख जिले उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग और चमोली भी शामिल हैं।

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, 4500 मीटर और उससे अधिक की ऊंचाई वाले इलाकों में भारी बर्फबारी होने की प्रबल संभावना है। ऐसे में केदारनाथ जैसे उच्च हिमालयी क्षेत्र में यात्रा करना काफी जोखिम भरा हो सकता है। बारिश और बर्फबारी के कारण पैदल रास्तों पर फिसलन बढ़ जाती है और भूस्खलन का खतरा भी कई गुना बढ़ जाता है।
गढ़वाल आयुक्त ने की अपील
खराब मौसम की आशंका को देखते हुए उत्तराखंड के गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पांडे ने देश-दुनिया से आ रहे श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए एक महत्वपूर्ण अपील जारी की है। उन्होंने कहा है कि श्रद्धालु अपनी यात्रा शुरू करने से पहले मौसम की ताजा जानकारी अवश्य लें। यदि मौसम विभाग की ओर से भारी बारिश या बर्फबारी की चेतावनी है, तो यात्रियों को अपनी योजना में बदलाव करना चाहिए या सुरक्षित स्थानों पर रुक जाना चाहिए।
प्रशासन के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती यह है कि सोनप्रयाग में फंसे हजारों लोगों को खराब मौसम से पहले सुरक्षित रूप से दर्शन कराकर वापस लाया जाए या उन्हें सुरक्षित पडावों पर ठहराया जाए। आस्था और सुरक्षा के बीच का यह संतुलन फिलहाल उत्तराखंड प्रशासन के लिए सबसे कठिन परीक्षा बन गया है।
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