
कानपुर। औद्योगिक शहर के रूप में पहचान बना चुका उत्तर प्रदेश का कानपुर जिला अब अपराध का गढ़ भी बनता जा रहा है। दरअसल, यहां अपराध और काले धन के गठजोड़ का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों और आयकर विभाग के होश उड़ा दिए हैं। करीब 3200 करोड़ रुपये के अवैध लेन-देन और मनी लॉन्ड्रिंग के मास्टरमाइंड महफूज अली उर्फ पप्पू छुरी को पुलिस ने एक लंबी फरारी के बाद आखिरकार दबोच लिया है।
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अरबों रुपए के काले साम्राज्य का भंडाफोड़
यह पूरा मामला किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है, जहां एक छोटी सी लूट की वारदात ने अरबों रुपये के इस काले साम्राज्य का भंडाफोड़ कर दिया। पुलिस कमिश्नर की सीधी निगरानी में चली इस कार्रवाई के बाद अब दिल्ली, पंजाब और गुजरात जैसे राज्यों के बड़े कारोबारियों समेत बैंक अधिकारियों पर भी गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है। 25 हजार के इनामी अपराधी महफूज की गिरफ्तारी केवल एक शुरुआत है, क्योंकि इसके पीछे छिपा सिंडिकेट देश के कई राज्यों में अपनी जड़ें जमा चुका है।

कानपुर पुलिस ने गुरुवार को एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए महफूज अली उर्फ पप्पू छुरी को गिरफ्तार कर लिया। छुरी पिछले काफी समय से पुलिस की आंखों में धूल झोंककर दिल्ली, बिहार और पश्चिम बंगाल के अलग-अलग ठिकानों पर छिपता फिर रहा था। महफूज अली की गिरफ्तारी उस समय हुई जब वह अपनी चालाकी से बचने के लिए मोबाइल नेटवर्क का इस्तेमाल बंद कर केवल व्हाट्सएप कॉलिंग के जरिए अपने गुर्गों से संपर्क साध रहा था।
पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल के नेतृत्व में गठित सर्विलांस और क्राइम ब्रांच की टीम ने तकनीकी जाल बिछाकर उसे शहर में प्रवेश करते ही दबोच लिया। आरोपी का नेटवर्क इतना विशाल था कि, उसने करीब 400 कारोबारियों और बड़ी फर्मों के साथ मिलकर अवैध धन को सफेद करने का एक संगठित ढांचा तैयार कर लिया था।
इस महा-घोटाले की शुरुआत एक बहुत ही मामूली दिखने वाली घटना से हुई थी। 16 फरवरी की रात श्यामनगर इलाके में मो. वासिद और अरशद नाम के दो युवकों से बाइक सवार बदमाशों ने मारपीट कर करीब 25 लाख रुपये लूट लिए थे। शुरुआत में पीड़ितों ने लूट की सूचना दी, लेकिन बाद में वे अपनी बात से मुकर गए, जिसने पुलिस के मन में संदेह पैदा किया। जब पुलिस ने इलाके के सीसीटीवी फुटेज खंगाले, तो लूट की पुष्टि हुई। जांच के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि, लूटी गई रकम दरअसल महफूज अली के एक बैंक खाते से निकाले गए 3.20 करोड़ रुपये का हिस्सा थी। इसी 25 लाख की मामूली लूट ने पुलिस को उस दरवाजे तक पहुंचा दिया, जिसके पीछे 3200 करोड़ रुपये का काला खजाना छिपा था।
परत दर परत खुल रहे राज
पुलिस की तफ्तीश जैसे-जैसे आगे बढ़ी, परत दर परत राज खुलते गए। जांच में पता चला कि महफूज अली और उसके करीबियों के नाम पर 12 अलग-अलग बैंकों में कुल 68 खाते संचालित हो रहे थे। केवल ढाई साल के छोटे से अंतराल में इन खातों के जरिए 1600 करोड़ रुपये का ट्रांजैक्शन हुआ था, लेकिन आयकर विभाग की गहरी पड़ताल में यह आंकड़ा बढ़कर 3200 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। यह पैसा मुख्य रूप से जाजमऊ के टेनरी संचालकों, स्लॉटर हाउस मालिकों और बड़े स्क्रैप कारोबारियों का था।
महफूज इन कारोबारियों की अवैध कमाई को फर्जी और म्यूल अकाउंट्स (दूसरे के नाम पर खुले खाते) के जरिए एक खाते से दूसरे खाते में घुमाता था और अंत में उसे कैश के रूप में निकालकर कारोबारियों तक पहुंचा देता था। महफूज अली का अपराधी बनने और ‘पप्पू छुरी’ नाम पड़ने का सफर भी काफी दिलचस्प है। मूल रूप से गाजीपुर का रहने वाला महफूज अपने पिता के साथ कानपुर आया था, जो एक चमड़ा फैक्ट्री में काम करते थे।
महफूज ने अपने करियर की शुरुआत एक छोटी सी परचून की दुकान से की, फिर मोबाइल की दुकान चलाई और बाद में कोलकाता चला गया जहां उसने शेविंग ब्लेड का व्यापार किया। ब्लेड के इसी कारोबार की वजह से उसका नाम ‘पप्पू छुरी’ पड़ा। कोलकाता से लौटने के बाद उसने जाजमऊ की टेनरी बेल्ट में काम करना शुरू किया और यहीं से उसे बैंकिंग सिस्टम की खामियों और अवैध लेन-देन के जरिए करोड़ों कमाने का रास्ता सूझा। उसने सीधे-साधे और गरीब लोगों को सरकारी योजनाओं और लोन का लालच देकर उनके आधार कार्ड और पैन कार्ड जैसे जरूरी दस्तावेज हासिल किए।
फर्जी बैंक खाते खुलवाएं
इन दस्तावेजों के आधार पर उसने फर्जी बैंक खाते खुलवाए और उन पर ऑनलाइन बैंकिंग शुरू करने के लिए फर्जी सिम कार्ड्स का इस्तेमाल किया। पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि इस पूरे खेल में बैंकिंग सेक्टर के कुछ अधिकारियों और स्टाफ की मिलीभगत की भी पुख्ता जानकारी मिली है। बिना बैंक कर्मियों के सहयोग के इतनी बड़ी रकम का लेन-देन और इतने सारे खाते खोलना नामुमकिन था।

पुलिस अब उन बैंक कर्मचारियों की लिस्ट तैयार कर रही है जिन्होंने महफूज को केवाईसी नियमों की अनदेखी करने में मदद की। आरोपी का नेटवर्क केवल कानपुर तक सीमित नहीं था। उसके तार दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, पंजाब और गुजरात के बड़े औद्योगिक घरानों से जुड़े हुए हैं। पुलिस अब इन राज्यों की पुलिस और जांच एजेंसियों से संपर्क साधकर उन 400 कारोबारियों की सूची साझा करेगी, जिनके काले धन को सफेद करने का काम महफूज करता था।
महफूज अली की फरारी के दौरान उसने पश्चिम बंगाल के नादिया जिले को अपना सुरक्षित ठिकाना बनाया था। वहां उसकी साली रहती थी और वह चुनाव के दौरान वहीं छिपा रहा। पुलिस अब नादिया जिले में उसके नेटवर्क और वहां खुले संभावित बैंक खातों की भी जांच कर रही है। पुलिस को संदेह है कि महफूज का संपर्क अंतरराष्ट्रीय हवाला कारोबारियों से भी हो सकता है, क्योंकि इतनी बड़ी मात्रा में नकदी का प्रबंधन और स्थानांतरण अक्सर हवाला के जरिए ही संभव होता है। वर्तमान में महफूज अली पर जाजमऊ और चकेरी थानों में कुल छह एफआईआर दर्ज हैं, जिनमें धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और अवैध लेन-देन जैसी गंभीर धाराएं शामिल हैं।
कोर्ट में पेश हुआ आरोपी महफूज
गुरुवार को गिरफ्तारी के बाद महफूज को कड़ी सुरक्षा के बीच कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया है। पुलिस अब उसकी रिमांड मांगकर उससे यह उगलवाने की कोशिश करेगी कि उसने किन-किन सफेदपोशों और बड़े अफसरों के पैसे को ठिकाने लगाया है। यह मामला न केवल कानपुर बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े वित्तीय घोटालों में से एक माना जा रहा है।
जांच एजेंसियों का मानना है कि, यदि इस मामले की तह तक जाया गया, तो कई नामी चेहरों के नकाब उतर सकते हैं और आने वाले दिनों में कानपुर के चमड़ा उद्योग और स्क्रैप कारोबार से जुड़े कई दिग्गजों की गिरफ्तारी संभव है। पुलिस कमिश्नर ने साफ कर दिया है कि किसी भी अपराधी या उसे संरक्षण देने वाले कारोबारी को बख्शा नहीं जाएगा और इस सिंडिकेट को पूरी तरह ध्वस्त किया जाएगा।
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