
तेहरान। मिडिल ईस्ट में शुरू हुआ युद्ध अब एक ऐसे विनाशकारी मोड़ पर आ गया है, जहां से वापसी की राहें लगभग बंद नजर आ रही हैं। मंगलवार, 31 मार्च की रात को ईरान का ऐतिहासिक और सामरिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण शहर इस्फहान भीषण धमाकों की गूंज से थर्रा उठा। यहां जमकर बम और मिसाइलें बरसीं। ये हमला उस वक्त हुआ जब पूरी दुनिया मार्च महीने के समापन और नए वित्तीय वर्ष की तैयारियों में व्यस्त थी। उस वक्त इस्फहान के आसमान में उठते आग के विशाल गोले और काले धुएं का गुबार एक नई और भयावह वैश्विक जंग की गवाही दे रहे थे।
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ईरान पर ‘बंकर-बस्टर’ बमों से हमला
अमेरिकी अखबार द वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक चौंकाने वाली और विस्तृत रिपोर्ट पर गौर करें ये हमला कोई सामान्य सैन्य कार्रवाई नहीं थी बल्कि इसका सीधा उद्देश्य ईरान के सबसे सुरक्षित और संवेदनशील माने जाने वाले न्यूक्लियर ठिकानों को पूरी तरह नेस्तनाबूद करना था। इस सैन्य ऑपरेशन में दुनिया के सबसे घातक और विध्वंसक हथियारों में शुमार ‘बंकर-बस्टर’ बमों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किए जाने की खबर सामने आई है जिसने जमीन के कई फीट नीचे बने कंक्रीट के अभेद्य किलों को भी अंदर तक हिलाकर रख दिया है।

इस्फहान में हुए इन धमाकों की तीव्रता इतनी अधिक और डरावनी थी कि, कई किलोमीटर दूर तक के रिहायशी इलाकों में लोगों ने धरती में तेज कंपन महसूस किया। उन्हें लगा भूकंप आ रहा है। हमले के कुछ ही देर बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर एक रहस्यमयी और डराने वाला वीडियो साझा किया जिसने वैश्विक स्तर पर खलबली मचा दी।
इस वीडियो में रात के घने अंधेरे के बीच एक के बाद एक कई विशाल विस्फोट होते साफ देखे जा सकते हैं और आसमान में उठती लपटों ने काली रात को दिन की रोशनी में तब्दील कर दिया था। यद्यपि डोनाल्ड ट्रंप ने इस वीडियो के साथ कोई आधिकारिक या विस्तृत बयान जारी नहीं किया है, लेकिन रक्षा विशेषज्ञों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया समूहों का स्पष्ट मानना है कि, यह फुटेज इस्फहान के उसी विशाल गोला-बारूद डिपो और भूमिगत सैन्य ठिकाने का है जिसे मंगलवार की रात निशाना बनाया गया है।
23 लाख की आबादी है इस्फहान शहर में
रिपोर्ट के अनुसार, इस्फहान शहर की आबादी करीब 23 लाख है और इतनी बड़ी संख्या में नागरिकों के बीच इस तरह के भारी बमवर्षण ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता की लहर पैदा कर दी है, यहां स्थित बद्र एयरबेस न केवल ईरानी वायुसेना का मुख्य केंद्र है, बल्कि इसे पूरे क्षेत्र के परमाणु कार्यक्रम की सुरक्षा का सबसे मजबूत कवच भी माना जाता है।
इस हमले की सबसे भयावह और तकनीकी कड़ी इसमें इस्तेमाल किए गए आधुनिक हथियारों की प्रकृति है। एक वरिष्ठ अमेरिकी रक्षा अधिकारी ने नाम गुप्त रखने की शर्त पर इस बात की पुष्टि की है कि अमेरिकी वायुसेना ने इस गुप्त मिशन में लगभग 2,000 पाउंड यानी करीब 907 किलोग्राम वजन वाले अत्याधुनिक बंकर-बस्टर बमों का उपयोग किया है।
ये बम विशेष रूप से पेनिट्रेटर म्यूनिशन की श्रेणी में आते हैं जिनका निर्माण केवल उन ठिकानों को मिट्टी में मिलाने के लिए किया जाता है जो जमीन के अंदर बहुत अधिक गहराई में स्थित होते हैं या जिन्हें स्टील और प्रबलित कंक्रीट की कई मोटी परतों से ढका गया होता है। ये बम पहले तेज गति से सतह को भेदते हुए अंदर धंस जाते हैं और फिर एक निश्चित गहराई पर जाकर जबरदस्त विस्फोट करते हैं जिससे ऊपर का पूरा ढांचा ताश के पत्तों की तरह ढह जाता है।
सैन्य डिपो पर गिराए दर्जनों बम
अधिकारी के अनुसार इस्फहान के सैन्य डिपो पर दर्जनों ऐसे बम गिराए गए जिसके बाद प्राथमिक धमाकों ने सेकेंडरी एक्सप्लोजन की एक श्रृंखला शुरू कर दी। इसका अर्थ है कि वहां रखे भारी मात्रा में बारूद और मिसाइलों ने खुद ही फटना शुरू कर दिया जिससे पूरा इलाका एक धधकती भट्टी जैसा नजर आने लगा।

इस्फहान केवल एक खूबसूरत ऐतिहासिक शहर नहीं है, बल्कि यह ईरान के परमाणु अनुसंधान और विकास का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है। यहां स्थित विभिन्न परमाणु प्रतिष्ठानों और प्रयोगशालाओं को लेकर पश्चिमी देश और इजरायल लंबे समय से गंभीर आशंकाएं जताते रहे हैं। द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट यह साफ संकेत दे रही है कि इस हमले का असली और गुप्त लक्ष्य वही भूमिगत प्रयोगशालाएं थीं, जहां यूरेनियम संवर्धन या अत्याधुनिक परमाणु हथियारों की तकनीक पर काम चल रहा था।
अगर ये खबरें पूरी तरह सच साबित होती हैं, तो यह सीधे तौर पर ईरान की संप्रभुता और उसकी घोषित रेड लाइन का उल्लंघन माना जाएगा। हालांकि ईरानी रक्षा मंत्रालय की ओर से अभी तक जान-माल के नुकसान का कोई आधिकारिक या सटीक आंकड़ा सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन स्थानीय चश्मदीदों और सूत्रों का कहना है कि धमाके इतने शक्तिशाली थे कि आसपास की कई किलोमीटर की परिधि में इमारतों की खिड़कियों के शीशे चकनाचूर हो गए और बद्र एयरबेस के एक बड़े हिस्से में अभी भी आग पर काबू नहीं पाया जा सका है।
कूटनीतिक प्रयासों को आघात
मिडिल ईस्ट में जारी यह खूनी संघर्ष अब अपने दूसरे महीने में प्रवेश कर चुका है और इसकी आग लगातार फैलती जा रही है, जो लड़ाई पहले केवल हमास या हिजबुल्लाह जैसे समूहों तक सीमित लग रही थी वह अब सीधे तौर पर ईरान और अमेरिका-इजरायल गठबंधन के बीच एक आमने-सामने के महायुद्ध का रूप लेती जा रही है। 31 मार्च की इस हिंसक घटना ने उन तमाम कूटनीतिक और शांति प्रयासों को गहरा आघात पहुंचाया है, जो पिछले कई हफ्तों से पर्दे के पीछे विभिन्न वैश्विक शक्तियों द्वारा किए जा रहे थे।
इस भयावह स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए मुस्लिम जगत के प्रभावशाली देशों जिनमें पाकिस्तान, मिस्र, सऊदी अरब और तुर्किए शामिल हैं, उन्होंने तत्काल एक आपातकालीन उच्चस्तरीय बैठक बुलाई है। इन देशों के नेताओं का सामूहिक रूप से मानना है कि यदि इस्फहान जैसे घनी आबादी वाले और संवेदनशील सैन्य केंद्रों पर हमले जारी रहे तो यह चिंगारी बहुत जल्द तीसरे विश्व युद्ध की शुरुआत कर सकती है। सऊदी अरब ने पहले ही चेतावनी दी है कि, ऊर्जा आपूर्ति ठप होने से पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था एक झटके में चरमरा सकती है और तेल की कीमतें आसमान छूने लगेंगी।
इतिहास इस बात का गवाह रहा है कि, ईरान अपने शीर्ष सैन्य कमांडरों या महत्वपूर्ण ठिकानों पर हुए किसी भी प्रहार का प्रतिशोध लेने में कभी पीछे नहीं हटा है। इस्फहान पर हुए इस भीषण हमले के बाद तेहरान में ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल की एक आपात बैठक चल रही है, जिसमें जवाबी कार्रवाई की रणनीति तैयार की जा रही है।
क्या ठंडी होगी इस्फ़हान की आग
अंतरराष्ट्रीय सैन्य विश्लेषकों का अनुमान है कि, ईरान अब फारस की खाड़ी में तैनात अमेरिकी जंगी जहाजों या स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों से गुजरने वाले तेल टैंकरों को निशाना बनाकर अपना पलटवार कर सकता है। 31 मार्च की यह तारीख भविष्य के इतिहास में एक काले पन्ने के रूप में दर्ज हो गई है, जहां एक तरफ दुनिया तकनीकी प्रगति की बातें कर रही है और दूसरी तरफ 907 किलोग्राम के महाविनाशक बमों से सभ्यताओं के भविष्य को खतरे में डाला जा रहा है।
अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि, क्या इस्फहान से उठी यह आग शांत होगी या फिर यह पूरे मिडिल ईस्ट और अंततः पूरी दुनिया को अपनी विनाशकारी चपेट में ले लेगी। ये तो आने वाले कुछ घंटों या फिर दिनों में पता चल जायेगा।
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