Iran-US War: सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई कोमा में, बंकर में चल रहा इलाज, खत्म ही रही ट्रंप की डेडलाइन

तेहरान। युद्ध का मैदान बन चुके मिडिल ईस्ट से एक ऐसी खबर आ रही है, जिसने पूरी दुनिया के कूटनीतिक और सैन्य गलियारों में हलचल मचा दी है। खुफिया रिपोर्टों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि, ईरान के नए सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई इस समय अचेत अवस्था यानी कोमा में हैं।

इसे भी पढ़ें- मिडिल ईस्ट संघर्ष: तेहरान ने ठुकराया ट्रंप का ऑफर, अब और विनाशकारी मोड़ ले सकता है युद्ध

ईरान की सत्ता में सस्पेंस

इस दावे के साथ ही एक तरफ तो ईरान की सत्ता में नेतृत्व को लेकर सस्पेंस गहरा गया है, वहीं, दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को पूरी तरह जमींदोज करने का सीधा अल्टीमेटम दे दिया है। ट्रंप के हालिया बयान और मोजतबा खामेनेई की रहस्यमयी अनुपस्थिति ने संकेत दे दिए हैं कि, ईरान अब अपने अस्तित्व के सबसे बड़े संकट से गुजर रहा है।

Iran-America War

एक रिपोर्ट में बताया जा रहा है कि, ईरान-अमेरिका युद्ध से अंतरराष्ट्रीय समुदाय में तहलका मचा दिया है। इसी रिपोर्ट में साझा किया गया है कि, एक गोपनीय कूटनीतिक मेमो साझा किया गया है, जिसे अमेरिकी और इजरायली खुफिया एजेंसियों ने अपने खाड़ी सहयोगियों के साथ तैयार किया है। इस मेमो में दावा किया गया है कि, अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई गंभीर रूप से घायल हैं और वर्तमान में ईरान के पवित्र शहर कोम में एक सुरक्षित स्थान पर उनका इलाज किया जा रहा है।

रिपोर्ट में सबसे चौंकाने वाली बात यह कही गई है कि, खामेनेई इस समय कोमा जैसी स्थिति में हैं, वह किसी भी तरह का निर्णय लेने या शासन चलाने की कंडीशन में नहीं हैं। यह पहली बार है जब किसी अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थान ने सर्वोच्च नेता के सटीक ठिकाने और उनकी शारीरिक स्थिति का इतना विस्तृत खुलासा किया है।

सार्वजनिक रूप से नहीं दिखे खामेनई

बता दें कि, ईरान और इजरायल के बीच छिड़े भीषण संघर्ष के बाद से ही मोजतबा खामेनेई को सार्वजनिक रूप से नहीं देखा गया है। युद्ध के इस नाजुक मोड़ पर जहां देश को अपने नेता के संबोधन की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, वहीं खामेनेई का किसी के सामने न आना कई बड़े सवाल खड़े करता है। हालांकि, ईरानी सरकारी मीडिया उनके नाम से संदेश और आदेश लगातार जारी कर रहा है, लेकिन जानकारों का कहना है कि, ये केवल जनता का मनोबल बनाए रखने और सत्ता पर पकड़ दिखाने की एक कोशिश है।

अमेरिकी खुफिया रिपोर्टस में यह भी अंदेशा जताया गया है कि, हालिया हमलों में खामेनेई को अपूरणीय क्षति हुई है।  एक रिपोर्ट में तो यहां तक दावा किया गया कि, उन पर हुए हमले इतने घातक थे कि, उन्होंने अपना एक हाथ और एक पैर खो दिया है। हालांकि, ईरानी अधिकारियों ने आधिकारिक रूप से इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि, देश की कमान सुरक्षित हाथों में है, लेकिन हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।

ईरान की इस आंतरिक कमजोरी के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने स्वभाव के अनुरूप बेहद आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। ट्रंप ने ईरान को मंगलवार रात 8 बजे (ईस्टर्न टाइम) तक का समय दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि, यदि इस समय सीमा तक ईरान किसी समझौते पर सहमत नहीं होता है, तो अमेरिका अपनी पूरी सैन्य ताकत का इस्तेमाल करेगा।

ईरान में नहीं बचेगा पुल और बिजली संयत्र

ट्रंप ने कड़े लहजे में कहा, समय खत्म हो रहा है। इस डेडलाइन के बाद ईरान में न कोई पुल बचेगा और न ही कोई बिजली संयंत्र। हम ईरान की बुनियादी संरचना को पूरी तरह नष्ट कर देंगे। ट्रंप की यह चेतावनी केवल कागजी नहीं लगती, क्योंकि पिछले कुछ हफ्तों में अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपनी बमवर्षक विमानों और नौसैनिक बेड़े की तैनाती को रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ा दिया है।

डोनाल्ड ट्रंप ने संघर्ष के मौजूदा हालात पर टिप्पणी करते हुए एक बेहद तीखे रूपक का इस्तेमाल किया है। उन्होंने स्वीकार किया कि, जब 28 फरवरी को यह संघर्ष शुरू हुआ था, तब ईरान एक बेहद शक्तिशाली और आक्रामक स्थिति में था, लेकिन अब स्थितियां बदल चुकी हैं। ट्रंप ने गर्व के साथ कहा, ईरान बहुत मजबूत था, लेकिन अब अमेरिका ने उसके सिर को काट दिया है।

ट्रंप ने आगे कहा कि, ईरान के खिलाफ ये सख्त कदम 47 साल पहले ही उठाए जाने चाहिए थे। उनका इशारा 1979 की इस्लामी क्रांति और उसके बाद से चले आ रहे अमेरिका-ईरान तनाव की ओर था। उन्होंने स्पष्ट किया कि, अब अमेरिका आधे-अधूरे समझौतों के मूड में नहीं है और वह ईरान की उस कट्टरपंथी विचारधारा को जड़ से खत्म करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है जो दशकों से अस्थिरता का कारण बनी हुई है।

4 से 48 घंटों में  बदल सकता है ईरान का भूगोल 

सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई के कोमा में होने की खबरों ने ईरान के भीतर भी एक गुप्त सत्ता संघर्ष की संभावना को जन्म दे दिया है। यदि खामेनेई वास्तव में अक्षम हो गए हैं, तो ईरान के ‘रिवोल्यूशनरी गार्ड्स’ (IRGC) के भीतर नेतृत्व को लेकर दरार पड़ सकती है। इजरायल के लगातार हो रहे सटीक हमलों ने पहले ही ईरान के कमांड स्ट्रक्चर को हिला कर रख दिया है।

Iran-America War

सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि, यदि खामेनेई लंबे समय तक दृश्य से बाहर रहते हैं, तो ईरान की जनता के बीच असंतोष भड़क सकता है, जो पहले ही आर्थिक बदहाली और युद्ध के साये में जी रही है। ट्रंप की डेडलाइन और खामेनेई की सेहत, ये दो ऐसे कारक हैं जो अगले 24 से 48 घंटों में ईरान का भूगोल और इतिहास बदल सकते हैं।

आज की स्थिति यह है कि, ईरान एक तरफ अपनी सर्वोच्च सत्ता के खोखले होने के डर से जूझ रहा है और दूसरी तरफ दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य शक्ति के विनाशकारी अल्टीमेटम का सामना कर रहा है। कोम शहर के उस अस्पताल या बंकर में क्या चल रहा है, जहां खामेनेई का इलाज हो रहा है, वह भविष्य की दिशा तय करेगा।

क्या ईरान ट्रंप के आगे घुटने टेकेगा या फिर एक ऐसी तबाही की ओर बढ़ेगा जिसकी चेतावनी खुद अमेरिकी राष्ट्रपति ने दी है? मंगलवार रात 8 बजे का समय न केवल ईरान के लिए बल्कि पूरी दुनिया की शांति के लिए निर्णायक साबित होने वाला है।

 

इसे भी पढ़ें- मिडिल ईस्ट में महाजंग: होर्मुज से सुरक्षित निकल रहे भारतीय जहां, नौसेना ने संभाल रखा है मोर्चा

Related Articles

Back to top button