शहीदों का अपमान बर्दाश्त नहीं, सीएम योगी का बड़ा एक्शन, शाहजहांपुर में मूर्तियां खंडित करने वाली कंपनी ब्लैकलिस्ट, FIR के आदेश

लखनऊ। शाहजहांपुर जिले में विकास और सौंदर्यीकरण के नाम पर शहीदों की मूर्तियों के साथ की गई अभद्रता ने पूरे प्रदेश में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस पूरे मामले को संज्ञान लेते हुए अपनी जीरो टॉलरेंस नीति को एक बार फिर पूरी कठोरता के साथ स्पष्ट कर दिया है।

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लापरवाह अधिकारियों पर होगी कार्रवाई

सीएम योगी ने न केवल जिम्मेदार निर्माण कंपनी को तत्काल प्रभाव से ब्लैकलिस्ट करने का आदेश दे दिया है, बल्कि उसके खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज करने और संबंधित लापरवाह अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए हैं। यह पूरा मामला केवल एक प्रशासनिक चूक या तकनीकी लापरवाही का नहीं है बल्कि यह उन अमर बलिदानियों के सम्मान और देश की आजादी के लिए अपने प्राण न्यौछावर करने वाले महापुरुषों के गौरव से जुड़ा हुआ है।

मुख्यमंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा है कि, प्रदेश के विकास की कोई भी बड़ी से बड़ी परियोजना शहीदों के सम्मान और उनकी गरिमा से ऊपर कभी नहीं हो सकती। राज्य सरकार ने इस घटना को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और अक्षम्य अपराध मानते हुए यह संकल्प लिया है कि भविष्य में किसी भी निर्माण कार्य या सड़क चौड़ीकरण की प्रक्रिया के दौरान राष्ट्रीय प्रतीकों, महापुरुषों की प्रतिमाओं और हमारी ऐतिहासिक विरासत की मर्यादा पर रत्ती भर भी आंच नहीं आने दी जाएगी।

सीएम ने लिया संज्ञान

आपको बता दें कि, शाहजहांपुर में सड़क चौड़ीकरण की एक बड़ी और महत्वाकांक्षी परियोजना पर निर्माण कार्य चल रहा था। इसी दौरान वहां स्थापित शहीदों की प्रतिमाओं को उनके मूल स्थान से हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई। स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों और वहां मौजूद नागरिकों के अनुसार निर्माण कार्य में लगी निजी कंपनी के कर्मचारियों और इंजीनियरों ने इस दौरान संवेदनहीनता की सारी हदें पार कर दीं।

प्रतिमाओं को पूरी सावधानी और राजकीय सम्मान के साथ स्थानांतरित करने के बजाय उन्हें भारी मशीनों और जेसीबी के जरिए इस कदर बेरहमी से हटाया गया कि, कई मूर्तियों के हिस्से बुरी तरह खंडित हो गए और वे जमीन पर बिखर गए। जैसे ही इस घटना की तस्वीरें और खंडित मूर्तियों के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए, पूरे शाहजहांपुर जिले सहित राजधानी लखनऊ तक हड़कंप मच गया। स्थानीय लोगों और शहीद परिवारों में गहरा दुख और गुस्सा फैल गया, जिसके तुरंत बाद यह मामला मुख्यमंत्री कार्यालय के संज्ञान में लाया गया।

गंभीर धारों में मुकदमा दर्ज करने के आदेश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, जो अपनी प्रखर राष्ट्रवादी छवि और राष्ट्रीय नायकों के प्रति अटूट श्रद्धा के लिए जाने जाते हैं ने इस घटना की विस्तृत जानकारी ली और बेहद नाराज हुए। उन्होंने तत्काल शासन के शीर्ष अधिकारियों की एक आपात बैठक बुलाई और स्पष्ट कर दिया कि शहीदों का अपमान उत्तर प्रदेश की पावन धरती पर किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं किया जाएगा।

मुख्यमंत्री के सख्त रुख के बाद शासन ने बिजली की गति से कार्रवाई शुरू की और सबसे पहले उस संबंधित निर्माण कंपनी को तत्काल प्रभाव से ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है, जिसका सीधा परिणाम यह होगा कि, अब वह कंपनी भविष्य में उत्तर प्रदेश सरकार का कोई भी सरकारी ठेका या टेंडर प्राप्त नहीं कर सकेगी। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने आदेश दिया कि कंपनी के मालिकों, साइट इंजीनियरों और वहां मौजूद सुपरवाइजरों के खिलाफ राष्ट्रीय भावनाओं को ठेस पहुंचाने और घोर लापरवाही बरतने की गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की जाए।

मुख्यमंत्री का चाबुक केवल निर्माण कंपनी पर ही नहीं चला बल्कि उन्होंने उन जिम्मेदार सरकारी अधिकारियों पर भी गाज गिराई है जिनकी देखरेख में यह पूरा प्रोजेक्ट संचालित हो रहा था। योगी आदित्यनाथ ने कड़ा निर्देश दिया कि, जिन अफसरों की जवाबदेही के तहत यह सड़क चौड़ीकरण का कार्य हो रहा था उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर विभागीय जांच बिठा दी जाए। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से प्रशासनिक विफलता है क्योंकि अधिकारियों का यह प्राथमिक कर्तव्य था कि वे ठेकेदार को स्पष्ट और लिखित निर्देश देते कि मूर्तियों के स्थानांतरण के दौरान पूरी मर्यादा और सम्मान का पालन किया जाए।

सियासी गलियारों में उबाल

मुख्यमंत्री ने प्रशासन को यह भी सख्त हिदायत दी है कि, जो मूर्तियां क्षतिग्रस्त हुई हैं उनकी तुरंत विशेषज्ञ मूर्तिकारों से मरम्मत कराई जाए या आवश्यकता पड़ने पर नई भव्य प्रतिमाओं का निर्माण कराकर उन्हें पूरी गरिमा, सम्मान और विधिवत पूजा-अर्चना के साथ नए और उचित स्थान पर पुनर्स्थापित किया जाए।

इस संवेदनशील घटना के बाद उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में भी जबरदस्त उबाल देखने को मिला है। प्रमुख विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को लेकर सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल खड़े किए हैं। समाजवादी पार्टी के मुखिया और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस पूरी घटना को बेहद विचलित करने वाला और राष्ट्रभक्तों की भावनाओं को आहत करने वाला बताया है।

उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि, सौंदर्यीकरण और विकास का कोई भी कार्य शहीदों के सम्मान से बढ़कर नहीं हो सकता और यह घटना प्रशासन की संवेदनहीन मानसिकता का परिचायक है। वहीं कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने भी इस मामले में सरकार को घेरते हुए कहा कि जो सत्ता शहीदों की धरोहरों और उनकी प्रतिमाओं की रक्षा करने में नाकाम है वह प्रदेश की जनता को सुरक्षा का क्या भरोसा देगी।

सख्त गाइडलाइंस तैयार करने के निर्देश

विपक्ष के इन चौतरफा हमलों के बीच मुख्यमंत्री की त्वरित और बेहद कड़ी कार्रवाई ने यह संदेश साफ कर दिया है कि उनकी सरकार में प्रशासनिक जवाबदेही सर्वोपरि है और किसी भी स्तर पर होने वाली ऐसी ढिलाई को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

आने वाले दिनों में इस घटना के दूरगामी परिणाम देखने को मिल सकते हैं क्योंकि मुख्यमंत्री ने लोक निर्माण विभाग और अन्य निर्माण एजेंसियों के लिए नई और सख्त गाइडलाइंस तैयार करने के निर्देश दिए हैं। अब यह अनिवार्य किया जा सकता है कि, भविष्य में किसी भी जिले में निर्माण कार्य के दौरान यदि कोई प्रतिमा या ऐतिहासिक स्मारक मार्ग में आता है तो उसे हटाने से पहले संबंधित जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली एक उच्च स्तरीय समिति से लिखित अनुमति लेनी होगी और पूरी प्रक्रिया की अनिवार्य रूप से वीडियोग्राफी भी करानी होगी ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

शाहजहांपुर के जिलाधिकारी ने भी मुख्यमंत्री के कड़े आदेशों का पालन करते हुए जिले के सभी प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में स्थित सभी महापुरुषों की प्रतिमाओं की सुरक्षा और उनकी स्थिति का तत्काल ऑडिट करें। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी भी प्रतिमा के आसपास किसी प्रकार का अतिक्रमण न हो और उनकी नियमित सफाई तथा देखरेख की पुख्ता व्यवस्था बनी रहे।

पल-पल की अपडेट ले रहे सीएम

शाहजहांपुर की इस घटना ने प्रशासन को एक बड़ा सबक सिखाया है कि विकास की गति में मानवीय संवेदनाओं और राष्ट्रीय गौरव के प्रतीकों को नजरअंदाज करना कितना भारी पड़ सकता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा निर्माण कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने और अधिकारियों के निलंबन के साहसिक फैसले का आम जनता और सामाजिक संगठनों ने पुरजोर स्वागत किया है।

लोगों का मानना है कि इस प्रकार की नजीर पेश करने वाली कार्रवाई से निजी ठेकेदारों और गैर-जिम्मेदार अफसरों में कानून का डर पैदा होगा और वे भविष्य में ऐसी अक्षम्य लापरवाही करने की हिम्मत नहीं जुटा पाएंगे। शहीदों के परिजनों ने भी मुख्यमंत्री की इस सक्रियता पर संतोष प्रकट किया है लेकिन उनकी मांग है कि जब तक सभी प्रतिमाओं को उनके पुराने वैभव और सम्मान के साथ दोबारा स्थापित नहीं कर दिया जाता तब तक प्रशासन को अपनी सक्रियता कम नहीं करनी चाहिए। मुख्यमंत्री कार्यालय इस पूरे मामले की पल-पल की अपडेट ले रहा है और दोषियों को सलाखों के पीछे भेजने की प्रक्रिया भी तेज कर दी गई है।

 

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