2040 तक महाशक्तिशाली बनेगा भारत, IAF के बेड़े में शामिल होंगे ये कातिल स्वदेशी हथियार

नई दिल्ली। भारत की सेना में अगला डेढ़ दशक एक ऐसे स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज होने जा रहा है, जो न सिर्फ भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता को परिभाषित करेगा, बल्कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन को पूरी तरह से भारत के पक्ष में कर देगा। दरअसल, भारतीय वायुसेना (IAF) ने अपनी भविष्य की रणनीति को अंतिम रूप दे दिया है, जिसके तहत साल 2040 तक आसमान में भारत की ताकत पूरी तरह स्वदेशी नजर आएगी।

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तैयार की जा रही शक्तिशाली कॉम्बैट फ्लीट

रिपोर्ट के अनुसार, वायुसेना का मकसद एक ऐसा शक्तिशाली कॉम्बैट फ्लीट तैयार करना है, जिसके तहत लगभग 60 प्रतिशत लड़ाकू विमान पूरी तरह से भारत में विकसित और निर्मित होंगे। यह रणनीतिक बदलाव न केवल सुरक्षा के लिहाज से अहम है, बल्कि यह आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत रक्षा निर्यात और घरेलू तकनीक के क्षेत्र में एक बड़ी छलांग साबित होगा।

Tejas (LCA) and 'AMCA' A

वर्तमान में जिस तरह से वैश्विक भू-राजनीति बदल रही है, उसे देखते हुए वायुसेना अपनी स्वीकृत 42 स्क्वाड्रन की क्षमता को फिर से हासिल करने के लिए युद्ध स्तर पर काम कर रही है। वायुसेना की इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य आधार और रीढ़ की हड्डी तेजस (LCA) और ‘AMCA’ (Advanced Medium Combat Aircraft) कार्यक्रम हैं।

सूत्रों से हवाले से मिली खबर के अनुसार, वर्ष 2040 तक भारतीय वायुसेना के बेड़े में लगभग 454 स्वदेशी लड़ाकू विमान शामिल होने की संभावना है। यह संख्या न केवल भारत की रक्षात्मक क्षमता को बढ़ाएगी, बल्कि पड़ोसी देशों, विशेषकर पाकिस्तान और चीन के मुकाबले भारत की हवाई श्रेष्ठता को एक नया आयाम प्रदान करेगी। वायुसेना की इस रणनीति का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा पुराने पड़ चुके सोवियत और फ्रांसीसी मूल के विमानों को चरणबद्ध तरीके से हटाकर उनकी जगह अत्याधुनिक स्वदेशी प्लेटफार्मों को तैनात करना है।

योजना के अनुसार, वायुसेना में 180 तेजस Mk1A लड़ाकू विमानों को शामिल करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। इसके साथ ही, लगभग 40 पुराने तेजस Mk1 विमान भी अगले दशक के अंत तक सेवा में बने रहेंगे, जो शुरुआती प्रशिक्षण और गश्ती में मदद करेंगे। ये नए विमान आने वाले 5 से 6 वर्षों में जगुआर और मिग-21 जैसे पुराने स्क्वाड्रनों की जगह लेंगे, जिन्होंने दशकों तक देश की सेवा की है।

138 तेजस Mk2 विमानों बेड़े में किया जाएगा शामिल

जैसे-जैसे हम 2030 के दशक की ओर बढ़ेंगे, भारतीय वायुसेना की मध्यम श्रेणी की मारक क्षमता का भार ‘तेजस Mk2’ के कंधों पर होगा। वायुसेना लगभग 138 तेजस Mk2 विमानों को अपने बेड़े में शामिल करने की तैयारी कर रही है। यह विमान मौजूदा तेजस का एक बड़ा और अधिक शक्तिशाली संस्करण होगा, जो मिराज-2000 और मिग-29 जैसे दिग्गज विमानों की विरासत को आगे बढ़ाएगा।

शुरुआत में तेजस Mk2 को मिग-29UPG स्क्वाड्रनों के विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है, लेकिन आने वाले समय में यह मिराज-2000 और जगुआर DARIN-III विमानों को भी रिप्लेस करेगा। इस क्रमिक बदलाव का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि, पुराने विमानों के रिटायर होने के बावजूद वायुसेना की ऑपरेशनल रेडीनेस यानी युद्धक क्षमता पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा, बल्कि नई तकनीक के आने से मारक क्षमता और सटीक हो जाएगी, लेकिन भारतीय वायुसेना के इस आधुनिकीकरण अभियान का सबसे चमकीला सितारा निस्संदेह ‘AMCA’ यानी एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट होगा।

चुनिंदा देशों की कतार में खड़ा होगा भारत

यह भारत का अपना पांचवीं पीढ़ी का स्टेल्थ फाइटर जेट होगा, जो भारत को उन चुनिंदा देशों की कतार में खड़ा कर देगा, जिनके पास खुद की स्टेल्थ तकनीक है। वायुसेना की योजना कुल 96 AMCA विमानों को बेड़े में शामिल करने की है। इस कार्यक्रम को दो चरणों में बांटा गया है। पहले चरण के तहत 40 AMCA Mk1 विमान बनाए जाएंगे, जो अमेरिकी जनरल इलेक्ट्रिक के GE F-414 इंजनों से लैस होंगे।

रक्षा विशेषज्ञों का अनुमान है कि, इनकी डिलीवरी 2035 के आसपास शुरू हो जाएगी और 2037 तक ये विमान पूरी तरह ऑपरेशनल होकर मोर्चे पर तैनात हो जाएंगे। इसके बाद दूसरे चरण में 50 से 56 AMCA Mk2 विमानों का उत्पादन किया जाएगा, जो अधिक शक्तिशाली स्वदेशी इंजनों और अत्याधुनिक एवियोनिक्स सिस्टम से लैस होंगे।

AMCA का भारतीय वायुसेना में शामिल होना युद्ध के मैदान की पूरी परिभाषा बदल देगा। इसमें ऐसी स्टेल्थ तकनीक का उपयोग किया गया है जो दुश्मन के रडार को चकमा देने में सक्षम है। साथ ही, सेंसर फ्यूजन और नेटवर्क-सेंट्रिक वारफेयर जैसी खूबियां पायलट को युद्ध की स्थिति में बेहतर निर्णय लेने और दुश्मन पर हावी होने में मदद करेंगी। यह विमान न केवल रक्षा करेगा, बल्कि दुश्मन की सीमा के भीतर घुसकर उसके महत्वपूर्ण ठिकानों को नष्ट करने की क्षमता रखेगा।

दूसरे देशों पर निर्भर नहीं रहेगा भारत

हालांकि, स्वदेशीकरण वायुसेना की प्राथमिकता है, लेकिन वर्तमान सुरक्षा चुनौतियों और विमानों की संख्या में आ रही कमी को देखते हुए विदेशी विमानों के विकल्प को भी खुला रखा गया है। वायुसेना 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) कार्यक्रम पर सक्रियता से काम कर रही है। इसके साथ ही, रूस के साथ 60 Su-57E पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों की संभावित खरीद पर भी चर्चा जारी है।

Tejas (LCA) and 'AMCA' A

2040 तक का यह रोडमैप भारतीय वायुसेना को न केवल आत्मनिर्भर बनाएगा, बल्कि तकनीक के मामले में भी अग्रणी रखेगा। तेजस, AMCA और चुनिंदा विदेशी अत्याधुनिक विमानों का यह संतुलन भारतीय वायुसेना को एशिया की सबसे घातक और संतुलित वायु शक्ति में तब्दील कर देगा। यह पूरी कवायद न केवल सीमाओं की रक्षा के लिए है, बल्कि यह दुनिया को एक स्पष्ट संदेश है कि भविष्य का भारत अपनी सुरक्षा के लिए किसी दूसरे देश पर निर्भर नहीं रहेगा।

जैसे-जैसे नए विमान स्क्वाड्रनों में शामिल होंगे, भारत की हवाई सीमाओं की चौकसी और अधिक अभेद्य हो जाएगी, जिससे किसी भी हिमाकत का करारा जवाब दिया जा सकेगा। यह बदलाव भारतीय रक्षा उद्योग के लिए भी एक नए युग की शुरुआत है, जहां ‘डिजाइन से लेकर डिलीवरी’ तक सब कुछ भारत की अपनी धरती पर होगा।

 

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