भारत-UAE के बीच ऐतिहासिक रक्षा और ऊर्जा डील, मोदी के 4 घंटे के दौरे से देश को मिलेंगे ये 6 बड़े फायदे

अबू धाबी। कूटनीति की दुनिया में समय से ज्यादा मुलाकातों का असर मायने रखता है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया संयुक्त अरब अमीरात (UAE) दौरे ने इसे सच साबित कर दिखाया है। महज चार घंटे की इस संक्षिप्त लेकिन रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण यात्रा ने भारत की भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा तैयारियों और तकनीकी कौशल की नई इबारत लिख दी है।

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वैश्विक बाजार में अस्थिरता

एक ऐसे समय में जब पश्चिम एशिया में जारी तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में अस्थिरता के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार डगमगा रहा है, पीएम मोदी और यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के बीच हुई यह बैठक भारत के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं मानी जा रही है।

Oil and LPG

इस दौरे ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत और यूएई के संबंध अब केवल पारंपरिक व्यापार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये एक गहरी रणनीतिक साझेदारी में बदल चुके हैं, जो आने वाले दशकों में दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को नई ऊंचाई प्रदान करेगी।

इस यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पहलू भारत की ऊर्जा सुरक्षा को चाक-चौबंद करना रहा है। मध्य पूर्व में जारी उथल-पुथल के बीच भारत के लिए अपनी घरेलू जरूरतों को पूरा करना एक बड़ी चुनौती रही है। इस दौरे के दौरान इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL) और अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC) के बीच हुए दीर्घकालिक एलपीजी आपूर्ति समझौते ने करोड़ों भारतीय रसोईघरों को राहत की गारंटी दी है।

यूएई से आता है LPG का 40% हिस्सा

गौरतलब है कि, भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा यूएई से आयात करता है। अब नए समझौते के तहत यह आपूर्ति न केवल प्राथमिकता के आधार पर होगी, बल्कि इसमें निरंतरता भी सुनिश्चित की जाएगी। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत में एलपीजी की उपलब्धता पर कोई आंच नहीं आएगी।

ऊर्जा क्षेत्र में दूसरा बड़ा धमाका रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (SPR) को लेकर हुआ है। कच्चे तेल की कीमतों में अनिश्चितता को देखते हुए भारत अपने भूमिगत तेल भंडारों को भरने पर ध्यान दे रहा है। यूएई की कंपनी ADNOC भारत के इन रणनीतिक भंडारों में निवेश करने वाली एकमात्र विदेशी संस्था है।

नए समझौते के तहत दोनों देशों ने इस सहयोग को और अधिक विस्तार देने पर सहमति जताई है। इससे भारत के पास आपातकालीन स्थितियों के लिए तेल का बड़ा स्टॉक मौजूद रहेगा, जो देश की आर्थिक संप्रभुता को सुरक्षित रखेगा। यह समझौता यूएई के लिए भी फायदेमंद है क्योंकि उसे अपनी बढ़ी हुई तेल उत्पादन क्षमता के लिए भारत जैसा एक भरोसेमंद और विशाल दीर्घकालिक बाजार मिल रहा है।

संयुक्त विकास के द्वार खुले

पीएम मोदी की इस यात्रा ने भारत की रक्षा क्षमताओं को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान दी है। दोनों देशों के बीच हुए रणनीतिक रक्षा साझेदारी फ्रेमवर्क ने सामान्य सैन्य अभ्यासों की सीमा को लांघकर उन्नत सैन्य तकनीक के संयुक्त विकास का द्वार खोल दिया है। अब भारत और यूएई न केवल खुफिया जानकारी साझा करेंगे, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर मिलकर काम करेंगे। सबसे बड़ी उपलब्धि रक्षा उपकरणों के सह-उत्पादन को लेकर है, जो भारत के मेक इन इंडिया अभियान को वैश्विक सप्लाई चेन से जोड़ता है।

Oil and LPG

समुद्री शक्ति को बढ़ाने की दिशा में गुजरात के वडिनार में एक आधुनिक जहाज मरम्मत केंद्र स्थापित करने का फैसला लिया गया है। यह केंद्र केवल भारत के लिए ही नहीं, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए एक रीजनल हब के रूप में उभरेगा। इससे न केवल भारत के समुद्री बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलेगी, बल्कि हजारों की संख्या में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। यह परियोजना भारत को उन चुनिंदा देशों की कतार में खड़ा कर देगी जिनके पास जहाजों के रखरखाव और मरम्मत की विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध हैं।

तैयार होगी साझेदारी की जमीन

भविष्य की तकनीक यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में यूएई का भारत को समर्थन ऐतिहासिक है। यूएई की प्रमुख टेक कंपनी G42 ने भारत में आठ नेशनल-स्केल एआई सुपरकंप्यूटर स्थापित करने का ऐलान किया है। आठ एक्साफ्लॉप्स की कंप्यूट क्षमता वाला यह सिस्टम भारत के भीतर ही होस्ट किया जाएगा, जो देश के संप्रभु डेटा और गवर्नेंस फ्रेमवर्क के तहत काम करेगा।

Oil and LPG

यह समझौता विशेष रूप से C-DAC और मोहम्मद बिन जायद यूनिवर्सिटी ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बीच साझेदारी के माध्यम से जमीन पर उतरेगा। इससे भारतीय शोधकर्ताओं और स्टार्टअप्स को बड़े पैमाने पर डेटा प्रोसेसिंग और एआई मॉडल्स को प्रशिक्षित करने की ऐसी शक्ति मिलेगी, जो अभी तक केवल चुनिंदा विकसित देशों के पास ही थी।

विशाल निवेश का ऐलान

इन सभी समझौतों के साथ यूएई ने भारत में 5 अरब डॉलर (लगभग 41,000 करोड़ रुपये) के विशाल निवेश की घोषणा की है। यह निवेश केवल कागजों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य भारत के बुनियादी ढांचा विकास को गति देना, बैंकिंग क्षेत्र (विशेषकर RBL बैंक) की ऋण क्षमता को बढ़ाना और सम्मान कैपिटल जैसी आवास वित्त कंपनियों में तरलता सुनिश्चित करना है। यह निवेश सीधे तौर पर भारत के मध्यम वर्ग के लिए सस्ते आवास और उद्यमियों के लिए आसान ऋण की राह खोलेगा।

 

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