50+ की उम्र में भी दिखना है जवान और फिट, तो डाइट में आज से ही शामिल करें ये 5 जरूरी विटामिन्स

जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, शरीर में तमाम तरह के बदलाव होने लगते हैं, जिससे कई तरह की मुश्किलें आने लगती है। माना जाता है कि 50 साल की उम्र आते-आते आपकी ऊर्जा, हड्डियों का घनत्व, याददाश्त और रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने लगती है। ऐसे में डाइट में कुछ स्पेशल पोषक तत्त्वों का शामिल करना अनिवार्य हो जाता है।

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हेल्थ एक्सपर्ट्स और कुछ मेडिकल रिपोर्ट्स पर गौर करें तो, 50 की उम्र के बाद हमारा शरीर भोजन से पोषक तत्वों को उतनी कुशलता से अवशोषित नहीं कर पाता, जितनी आसानी से वह युवावस्था में करता था। यही कारण है कि, इस उम्र में केवल पेट भरना काफी नहीं है, बल्कि शरीर को सही ईंधन यानी पौष्टिक डाइट देना अनिवार्य हो जाता है।

धीमा हो जाता है मेटाबॉलिज्म

विटामिन्स भले ही सूक्ष्म मात्रा में शरीर को चाहिए होते हैं, लेकिन आधे दशक की यात्रा के बाद शरीर को सुचारू रूप से चलाने में इनकी भूमिका किसी लाइफलाइन से कम नहीं होती। सही विटामिन्स का चयन न केवल उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को सुखद बनाता है, बल्कि कैंसर, ऑस्टियोपोरोसिस और अल्जाइमर जैसी घातक बीमारियों के जोखिम को भी कई गुना कम कर देता है।

उम्र बढ़ना एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, लेकिन इसके साथ आने वाली शारीरिक गिरावट को सही पोषण के जरिए धीमा किया जा सकता है। 50 साल की उम्र के बाद शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है और पाचन तंत्र की दीवारें विटामिन्स को सोखने में आलस दिखाने लगती हैं।

‘नोलेज’ की एक ताजा स्वास्थ्य रिपोर्ट इस बात की तस्दीक करती है कि, बुजुर्गों में होने वाली अधिकांश समस्याओं का सीधा संबंध सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी से होता है। जब शरीर को जरूरी विटामिन्स नहीं मिलते, तो वह अपनी संचित ऊर्जा का इस्तेमाल करने लगता है, जिससे मांसपेशियों में नुकसान और हड्डियों में खोखलापन आने लगता है, इसलिए, फिट रहने के लिए अब आपको केवल कैलोरी नहीं, बल्कि विटामिन्स के पावर हाउस पर ध्यान देना होगा।

 विटामिन D

उम्र बढ़ने के साथ जो सबसे बड़ी चुनौती सामने आती है, वह है विटामिन डी की कमी। इसे अक्सर सनशाइन विटामिन कहा जाता है क्योंकि हमारा शरीर इसे धूप के संपर्क में आने पर खुद बनाता है, लेकिन यहां एक पेंच है, 50 के बाद हमारी त्वचा की धूप से विटामिन डी बनाने की क्षमता काफी कम हो जाती है। इसके अलावा, बुजुर्ग लोग अक्सर घर के भीतर ज्यादा समय बिताते हैं, जिससे यह कमी और गहरा जाती है।

विटामिन डी का सबसे महत्वपूर्ण कार्य शरीर में कैल्शियम को अवशोषित करना है। यदि आपके शरीर में विटामिन डी की कमी है, तो आप कितना भी कैल्शियम क्यों न खा लें, वह हड्डियों तक नहीं पहुंचेगा। रिसर्च बताती है कि पर्याप्त विटामिन डी लेने से ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा कम होता है और गिरने या फ्रैक्चर होने की संभावना न्यूनतम हो जाती है। यह न केवल हड्डियों के लिए, बल्कि अवसाद से लड़ने और हृदय स्वास्थ्य को बेहतर रखने के लिए भी अनिवार्य है।

कैल्शियम की जरूरत जीवन भर रहती है, लेकिन 50 के बाद यह अनिवार्य की श्रेणी में आ जाता है। हड्डियों का घनत्व उम्र के साथ कम होने लगता है। विशेष रूप से महिलाओं में मेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर गिर जाता है, जिससे हड्डियां बहुत तेजी से कैल्शियम खोने लगती हैं।

विशेषज्ञों का सुझाव है कि इस उम्र में दूध, दही और पनीर जैसे डेयरी उत्पादों के साथ-साथ रागी और हरी पत्तेदार सब्जियों को डाइट का हिस्सा बनाना चाहिए। कैल्शियम केवल हड्डियों के लिए ही नहीं, बल्कि नसों के सिग्नल भेजने और मांसपेशियों के संकुचन के लिए भी जरूरी है। यदि रक्त में कैल्शियम कम होगा, तो शरीर आपकी हड्डियों से कैल्शियम चुराना शुरू कर देगा, जिससे वे कमजोर और नाजुक हो जायेंगी।

विटामिन B12

अक्सर 50 के बाद लोग शिकायत करते हैं कि उन्हें चीजें याद नहीं रहतीं या वे जल्दी थक जाते हैं। इसका एक बड़ा कारण विटामिन B12 की कमी हो सकता है। यह विटामिन रेड ब्लड सेल्स (RBC) के निर्माण और नर्वस सिस्टम (तंत्रिका तंत्र) को स्वस्थ रखने के लिए जिम्मेदार है। उम्र के साथ पेट में ‘इंट्रिंसिक फैक्टर’ नामक प्रोटीन का उत्पादन कम हो जाता है, जो भोजन से B12 निकालने में मदद करता है।

B12 की कमी से न केवल एनीमिया (खून की कमी) हो सकता है, बल्कि यह याददाश्त को कमजोर कर सकता है और हाथ-पैरों में झुनझुनी या सुन्नता पैदा कर सकता है। शाकाहारी लोगों में इसकी कमी ज्यादा देखी जाती है, इसलिए उन्हें सप्लीमेंट्स या फोर्टिफाइड अनाज की सलाह दी जाती है।

विटामिन सी और ई

जैसे-जैसे हम बूढ़े होते हैं, हमारे शरीर की कोशिकाएं ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस के कारण क्षतिग्रस्त होने लगती हैं। यहां विटामिन सी और ई रक्षक बनकर आते हैं। विटामिन सी न केवल कोलेजन के निर्माण में मदद करता है, जो त्वचा की झुर्रियों को रोकता है, बल्कि यह इम्यून सिस्टम को इतना मजबूत बनाता है कि शरीर संक्रमणों से आसानी से लड़ सके। संतरा, कीवी, स्ट्रॉबेरी और ब्रोकली इसके बेहतरीन स्रोत हैं।

वहीं, विटामिन E एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है जो कोशिकाओं को मुक्त कणों के नुकसान से बचाता है। यह आंखों की रोशनी बनाए रखने और अल्जाइमर जैसी दिमागी बीमारियों की गति को धीमा करने में सहायक पाया गया है। बादाम, सूरजमुखी के बीज और एवोकैडो इसके अच्छे स्रोत माने जाते हैं।

विटामिन K

अक्सर चर्चाओं में छूट जाने वाला विटामिन के, 50 की उम्र के बाद बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है। इसका प्राथमिक कार्य रक्त का थक्का  बनाना है, जो चोट लगने पर अत्यधिक खून बहने से रोकता है। इसके अलावा, नई रिसर्च यह भी बताती है कि विटामिन के हड्डियों के मेटाबॉलिज्म में विटामिन डी के साथ मिलकर काम करता है। पालक, केल और ब्रोकली जैसी सब्जियों में यह प्रचुर मात्रा में होता है। यह धमनियों में कैल्शियम के जमाव को रोककर हृदय रोगों के खतरे को भी कम करता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि, आदर्श रूप से पोषक तत्व प्राकृतिक भोजन से ही आने चाहिए। लेकिन 50 के बाद जब अवशोषण की समस्या हो, तो डॉक्टर की सलाह पर मल्टीविटामिन लेना एक सुरक्षित निवेश हो सकता है। बिना डॉक्टरी सलाह के अत्यधिक मात्रा में विटामिन लेना (खासकर विटामिन A, D, E, K जो फैट सॉल्युबल हैं) शरीर के लिए हानिकारक भी हो सकता है।

50 की उम्र जीवन की दूसरी पारी की शुरुआत है। इस पारी में फिट रहने के लिए आपको अपने शरीर की भाषा समझनी होगी। विटामिन D, B12, कैल्शियम और एंटीऑक्सीडेंट्स का सही संतुलन आपको न केवल सक्रिय रखेगा, बल्कि बुढ़ापे के साथ आने वाली लाचारी से भी बचाएगा। याद रखें, उम्र सिर्फ एक संख्या है अगर आपका पोषण सही है। अपनी डाइट में रंग-बिरंगी सब्जियां, फल और पर्याप्त धूप शामिल करें, ताकि आपकी उम्र आपकी ऊर्जा के आड़े न आए।

 

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