
आधुनिक जीवन की भागदौड़, बदलती जीवनशैली और लगातार बढ़ते प्रदूषण के बीच सांस फूलना एक ऐसी समस्या है, जिसे सामान्य थकान या कमजोरी समझकर अक्सर इग्नोर कर दिया जाता है। कभी सीढ़ियां चढ़ते वक्त, कभी थोड़ी दूर पैदल चलने पर या फिर कभी अचानक बैठे-बैठे अगर आपकी सांसें उखड़ने लगती हैं, तो यह केवल शरीर की थकान का संकेत नहीं है, बल्कि शरीर के भीतर पनप रही किसी गंभीर और जानलेवा बीमारी का शुरुआती संकेत हो सकता है।
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डॉक्टर से तुरंत लें सलाह
चिकित्सा विज्ञान में सांस फूलने की स्थिति को डिस्पनिया कहा जाता है, जो फेफड़ों से लेकर हृदय तक की गंभीर विकृतियों की ओर इशारा करती है। अक्सर लोग इसे बढ़ते मोटापे या ढलती उम्र का स्वाभाविक असर मानकर घरेलू नुस्खों में वक्त बर्बाद कर देते हैं, लेकिन जब बिना किसी विशेष शारीरिक मेहनत के भी सांस लेने में तकलीफ होने लगे, तो इसे एक गंभीर खतरे की घंटी समझना चाहिए और तुरंत विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए।
हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि, बार-बार सांस फूलने की शिकायत को हल्के में लेना भविष्य में बड़ी मुसीबत को दावत देना है। यह स्थिति वास्तव में एक स्वतंत्र बीमारी नहीं बल्कि शरीर के भीतर चल रही किसी बड़ी गड़बड़ी का लक्षण है। सांस फूलने के कई सामान्य कारण हो सकते हैं, जैसे कि अत्यधिक भाग-दौड़ करना, शरीर में पोषक तत्वों की कमी से होने वाली शारीरिक कमजोरी या फिर मानसिक तनाव और एंग्जायटी।
नली में सूजन से होती है समस्या
हालांकि, वर्तमान समय में वायु प्रदूषण, धूल-मिट्टी के बारीक कण और वातावरण में व्याप्त एलर्जी भी सांस की नली में सूजन पैदा कर सांस लेने की प्रक्रिया को बाधित कर रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, आजकल की सेडेंटरी लाइफस्टाइल यानी लंबे समय तक बैठे रहने वाली जीवनशैली ने भी हमारी शारीरिक सहनशक्ति को न्यूनतम स्तर पर ला दिया है। इसके कारण जब कोई व्यक्ति अचानक कोई शारीरिक गतिविधि करता है, तो उसका शरीर ऑक्सीजन की बढ़ी हुई मांग को पूरा नहीं कर पाता और सांसें तेज चलने लगती हैं। गलत खानपान और धूम्रपान जैसी आदतें इस समस्या की आग में घी डालने का काम करती हैं। फेफड़ों की सेहत और सांसों की गति का सीधा संबंध है।
विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि, यदि किसी व्यक्ति को बार-बार सांस फूलने की समस्या हो रही है, तो यह फेफड़ों से जुड़ी गंभीर बीमारियों जैसे अस्थमा, ब्रोंकाइटिस या सीओपीडी का स्पष्ट संकेत हो सकता है। अस्थमा में सांस की नलियों में सूजन आ जाती है, जिससे हवा का मार्ग संकरा हो जाता है और ऑक्सीजन फेफड़ों तक सही मात्रा में नहीं पहुंच पाती।
वहीं ब्रोंकाइटिस में संक्रमण के कारण नलियों में बलगम जमा हो जाता है। इन स्थितियों के अलावा, फेफड़ों में होने वाला फाइब्रोसिस या इन्फेक्शन जैसे निमोनिया भी सांस फूलने की प्रमुख वजह बनता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स यह भी चेतावनी देते हैं कि, सांस फूलने का हर मामला फेफड़ों से ही जुड़ा हो, यह जरूरी नहीं है। यह हृदय रोग का भी एक अत्यंत महत्वपूर्ण और प्राथमिक लक्षण है।
हार्ट डिजीज का संकेत
हृदय और फेफड़े शरीर में एक टीम की तरह काम करते हैं। जब हृदय की कार्यक्षमता प्रभावित होती है और वह शरीर के बाकी हिस्सों तक पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन युक्त रक्त पंप नहीं कर पाता, तो इसकी भरपाई के लिए फेफड़ों को अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ती है। हार्ट फेलियर, कोरोनरी आर्टरी डिजीज या हार्ट के वॉल्व में खराबी होने पर सांस फूलना सबसे पहला संकेत होता है। कई बार लोग इसे फेफड़ों की समस्या समझकर इलाज करवाते रहते हैं, जबकि समस्या उनके दिल में छिपी होती है।
इसके अतिरिक्त, एनीमिया यानी शरीर में खून की कमी होना भी सांस फूलने का एक बड़ा कारण है। जब शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर गिर जाता है, तो रक्त ऑक्सीजन को ढोने की अपनी क्षमता खो देता है। ऐसी स्थिति में, हृदय और फेफड़े शरीर की ऑक्सीजन की भूख मिटाने के लिए अपनी गति बढ़ा देते हैं, जिससे मामूली चलने-फिरने पर भी सांस फूलने लगती है। इसके अलावा थायरॉयड ग्रंथि का असंतुलन, विशेष रूप से हाइपरथायरायडिज्म, भी चयापचय दर को बढ़ाकर सांसों की गति को तेज कर सकता है।
मोटापे भी है वजह
चिकित्सा विशेषज्ञों ने उन समूहों की भी पहचान की है जिन्हें इस समस्या का सबसे अधिक जोखिम होता है। बुजुर्गों में उम्र के साथ अंगों की प्राकृतिक गिरावट के कारण शारीरिक क्षमता कम हो जाती है, जिससे उन्हें श्वसन संबंधी जटिलताएं जल्दी घेर लेती हैं। वहीं, जो लोग लंबे समय से धूम्रपान कर रहे हैं, उनके फेफड़ों की बनावट स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त हो जाती है, जिसे ‘एम्फिसीमा’ कहा जाता है। ऐसे लोगों में सांस फूलना एक स्थायी समस्या बन जाती है।
मोटापे से ग्रस्त व्यक्तियों के शरीर का अतिरिक्त द्रव्यमान उनके डायाफ्राम और छाती की मांसपेशियों पर दबाव डालता है, जिससे फेफड़ों को फैलने के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिलती। प्रदूषित वातावरण या रासायनिक कारखानों में काम करने वाले लोग भी इसके सीधे निशाने पर होते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यदि सांस फूलने के साथ-साथ सीने में भारीपन, हाथ या जबड़े में दर्द, अत्यधिक पसीना आना, पैरों में सूजन या रात में सांस लेने में तकलीफ के कारण नींद खुल जाना जैसे लक्षण दिखें, तो यह एक मेडिकल इमरजेंसी है और बिना देरी किए अस्पताल पहुंचना चाहिए।
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