
वॉशिंगटन। वैश्विक राजनीति के मंच पर एक बार फिर धमाका करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर एक ऐसा आदेश जारी किया है, जिसने पूरी दुनिया की धड़कनें बढ़ा दी हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिकी नौसेना को सीधी चेतावनी देते हुए निर्देश दिया है कि, यदि समुद्र में कोई भी संदिग्ध नाव माइन बिछाती हुई नजर आए, तो उसे बिना किसी चेतावनी के तुरंत नष्ट कर दिया जाए।
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भड़क सकती है तीसरे विश्व युद्ध की चिंगारी
ट्रंप का यह रुख न केवल अमेरिका की आक्रामक सैन्य नीति को दर्शाता है, बल्कि यह संकेत भी दे रहा है कि आने वाले दिनों में मध्य पूर्व के इस संकरे गलियारे में महायुद्ध छिड़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के जानकार इसे बिना सोचे कार्रवाई वाले दौर की शुरुआत मान रहे हैं, जहां एक छोटी सी गलती भी तीसरे विश्व युद्ध की चिंगारी भड़का सकती है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ताजा बयान उनके पिछले कार्यकाल की याद दिलाता है, जहां वे अमेरिका फर्स्ट और त्वरित सैन्य कार्रवाई के लिए जाने जाते थे। इस बार उन्होंने होर्मुज के सामरिक महत्व को देखते हुए नौसेना को पूरी छूट दे दी है। राष्ट्रपति ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि, अमेरिकी हितों और वैश्विक व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा के लिए किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।
उन्होंने नौसेना के कमांडरों को निर्देशित किया है कि, समुद्र के भीतर विस्फोटक बिछाने वाली किसी भी गतिविधि को शत्रुतापूर्ण कृत्य माना जाए और उस पर तत्काल जवाबी कार्रवाई की जाए। ट्रंप का कहना है कि, अब विचार करने, चेतावनी देने या कूटनीतिक रास्तों के इंतजार का समय समाप्त हो चुका है। अब समय केवल और केवल सीधी कार्रवाई का है। राष्ट्रपति के इस सख्त लहजे ने पेंटागन से लेकर खाड़ी देशों की राजधानियों तक हलचल पैदा कर दी है।
तेजी से हो रहा माइन हटाने का काम
राष्ट्रपति के आदेश का दूसरा और सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माइन हटाने के ऑपरेशन से जुड़ा है। ट्रंप ने न केवल दुश्मन को मार गिराने की बात कही, बल्कि अमेरिकी नौसेना को यह भी आदेश दिया कि होर्मुज के इलाके में माइन स्वीपिंग यानी समुद्री बारूदी सुरंगों को हटाने की प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से तीन गुना तेज कर दिया जाए।
अमेरिकी रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि, इतनी तेजी से माइन हटाने का काम तभी किया जाता है जब युद्ध की आशंका प्रबल हो या खुफिया जानकारी मिली हो कि बड़े पैमाने पर समुद्री रास्ते को बाधित करने की साजिश रची जा रही है। यह आदेश स्पष्ट करता है कि अमेरिका किसी भी सूरत में होर्मुज के जलमार्ग पर अपनी पकड़ ढीली नहीं होने देना चाहता और वह वहां अपनी सैन्य उपस्थिति को और अधिक आक्रामक बनाने की दिशा में बढ़ चुका है।
हालांकि, राष्ट्रपति ने अपने सार्वजनिक संबोधन में किसी विशेष राष्ट्र का नाम लेने से परहेज किया, लेकिन अंतरराष्ट्रीय राजनीति के गलियारों में यह चर्चा आम है कि ट्रंप के निशाने पर सीधा ईरान है। ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रही खींचतान, विशेषकर परमाणु समझौते और आर्थिक प्रतिबंधों के बीच, यह आदेश आग में घी डालने जैसा है।
ईरान ने दी धमकी
इतिहास गवाह है कि, ईरान ने कई बार होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की धमकी दी है, जिसे वह अपना प्रभाव क्षेत्र मानता है। मौजूदा समय में जब दोनों देशों के बीच परमाणु मुद्दे पर बातचीत के बंद दरवाजे फिर से खुलते नजर आ रहे थे, ट्रंप के इस आक्रामक रुख ने कूटनीतिक कोशिशों पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह ईरान के लिए एक कड़ा सैन्य संदेश है कि यदि उसने समुद्री रास्तों में कोई दखलंदाजी की, तो उसे भारी कीमत चुकानी होगी।

इस आदेश के साथ ही वैश्विक स्तर पर एक बड़ा डर यह पैदा हो गया है कि बिना सोचे-समझे गोली मारने वाली नीति कहीं किसी बड़ी गलती का कारण न बन जाए। युद्ध के मैदान में कभी-कभी सामान्य मछली पकड़ने वाली नावें या व्यापारिक जहाज भी रडार पर संदिग्ध लग सकते हैं। अगर अमेरिकी नौसेना ने ट्रंप के आदेश का पालन करते हुए किसी ऐसी नाव पर हमला कर दिया जो वास्तव में विस्फोटक नहीं बिछा रही थी, तो यह एक अनियंत्रित सैन्य संघर्ष को जन्म दे सकता है। खाड़ी क्षेत्र पहले से ही बारूद के ढेर पर बैठा है, जहां एक छोटी सी चिंगारी भी वैश्विक ऊर्जा संकट पैदा कर सकती है।
दुनिया की ऊर्जा धमनी है होर्मुज
जानकारों का कहना है कि, सैन्य कमांडरों को दी गई इस तरह की खुली छूट अक्सर एस्केलेशन यानी तनाव को खतरनाक स्तर तक ले जाने का काम करती है। होर्मुज जलडमरूमध्य की अहमियत को समझे बिना इस तनाव की गंभीरता को नहीं समझा जा सकता। यह समुद्री रास्ता ओमान और ईरान के बीच स्थित है और इसकी चौड़ाई कुछ स्थानों पर महज 33 किलोमीटर तक सिमट जाती है। इतनी कम चौड़ाई के बावजूद, यह दुनिया की ऊर्जा धमनी मानी जाती है।
दुनिया भर में होने वाली तेल की कुल सप्लाई का लगभग 20 से 25 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। सऊदी अरब, इराक, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत और कतर जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देशों के जहाज इसी संकरे रास्ते से होकर अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचते हैं। यदि ट्रंप के इस आदेश के बाद यहां कोई सैन्य झड़प होती है और यह रास्ता कुछ दिनों के लिए भी बाधित होता है, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें रातों-रात 150 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकती हैं।
बढ़ सकती हैं शिपिंग बीमा दरें
इस सैन्य आदेश का असर सिर्फ अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका सीधा प्रभाव भारत, चीन और यूरोप की अर्थव्यवस्थाओं पर भी पड़ेगा। भारत अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से इसी रास्ते के जरिए आयात करता है। यदि होर्मुज में तनाव बढ़ता है, तो शिपिंग बीमा की दरें बढ़ जाएंगी और तेल महंगा होने से पूरी दुनिया में महंगाई का नया दौर शुरू हो सकता है।

ट्रंप की इस दादागिरी वाली नीति ने उन देशों को भी चिंता में डाल दिया है जो इस क्षेत्र में शांति और कूटनीति के पक्षधर रहे हैं। ट्रंप ने पहले भी वेनेजुएला और क्यूबा जैसे देशों की नाकेबंदी करके अपनी सख्त छवि पेश की थी, लेकिन ईरान के मामले में यह नीति कितनी सफल होगी, यह कहना मुश्किल है क्योंकि ईरान की भौगोलिक स्थिति और उसकी सैन्य क्षमता उसे अन्य देशों से अलग बनाती है।
अलर्ट पर हैं अमेरिकी युद्धपोत
डोनाल्ड ट्रंप का यह आदेश एक नए कोल्ड वॉर या कहें कि सीधे समुद्री युद्ध की ओर इशारा कर रहा है। व्हाइट हाउस की ओर से आए इस बयान के बाद अब सबकी निगाहें ईरान की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। क्या ईरान पीछे हटेगा या वह भी अपनी नौसेना को इसी तरह के जवाबी आदेश जारी करेगा?
फिलहाल, खाड़ी का पानी अशांत है और होर्मुज में तैनात अमेरिकी युद्धपोत अब हाई अलर्ट पर हैं। दुनिया भर के शेयर बाजार और तेल व्यापारी भी इस स्थिति पर नजर गड़ाए हुए हैं, क्योंकि यहां से निकलने वाली एक भी मिसाइल वैश्विक अर्थव्यवस्था का नक्शा बदल सकती है। ट्रंप ने अपनी चाल चल दी है, अब देखना यह है कि वैश्विक कूटनीति इस आसन्न संकट को टालने में कितनी सक्षम साबित होती है।
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