
जैसे ही मौसम करवट लेता है, हवाओं में केवल ठंडक या गर्माहट ही नहीं, बल्कि कई छिपे हुए वायरस भी सक्रिय हो जाते हैं। इन दिनों चिकित्सा जगत में एक ऐसे वायरस की चर्चा तेज है, जो दिखने में सामान्य सर्दी-जुकाम या फ्लू जैसा लगता है, लेकिन इसकी अनदेखी जानलेवा साबित हो सकती है। इसका नाम ह्यूमन मेटाप्न्यूमोवायरस (HMPV) है।
साल 2001 में पहली बार पहचाना गया यह वायरस अक्सर तब हमला करता है जब लोग फ्लू का सीजन खत्म मानकर बेफिक्र हो जाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इसके लक्षण ‘रेस्पिरेटरी सिंकाइटियल वायरस’ (RSV) से इतने मिलते-जुलते हैं कि आम इंसान तो क्या, कई बार डॉक्टर भी बिना लैब टेस्ट के इसे पहचान नहीं पाते। आइए जानते हैं इस रहस्यमयी वायरस का सच और इससे बचने के तरीके।
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चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि जब दुनिया इन्फ्लुएंजा (फ्लू) और कोविड-19 जैसी बीमारियों से निपटने में व्यस्त है, तब ‘ह्यूमन मेटाप्न्यूमोवायरस’ (HMPV) चुपचाप पैर पसार रहा है। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका के वेस्ट कोस्ट और कैलिफोर्निया में इसके मामलों में अचानक उछाल देखा गया है। भारत समेत दुनिया के अन्य हिस्सों में भी मौसम बदलने के साथ इसके सक्रिय होने की आशंका जताई जा रही है। यह वायरस मुख्य रूप से ऊपरी और निचले श्वसन तंत्र को प्रभावित करता है।
कैसे शिकार बनाता है यह वायरस
- HMPV के फैलने का तरीका काफी हद तक अन्य श्वसन रोगों जैसा ही है। यह मुख्य रूप से ‘ड्रॉपलेट्स’ (बूंदों) के माध्यम से फैलता है।
- जब कोई संक्रमित व्यक्ति खांसता या छींकता है, तो वायरस के कण हवा में फैल जाते हैं। यदि कोई स्वस्थ व्यक्ति उस हवा में सांस लेता है, तो वह संक्रमित हो सकता है।
- संक्रमित व्यक्ति से हाथ मिलाना, गले मिलना या उसके करीब जाने से भी यह वायरस आसानी से ट्रांसफर हो जाता है।
- यदि आप किसी ऐसी सतह जैसे दरवाजे का हैंडल, मोबाइल या मेज को छूते हैं जहां वायरस मौजूद है और उसके बाद अपने हाथ चेहरे, नाक या आंखों पर लगाते हैं, तो संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
HMPV की सबसे दिलचस्प और खतरनाक बात इसका समय है। आमतौर पर इन्फ्लुएंजा या फ्लू का प्रकोप सर्दियों के चरम पर होता है, लेकिन HMPV का स्वभाव थोड़ा अलग है। यह वायरस अक्सर फरवरी के अंत से सक्रिय होता है और मार्च के अंत से अप्रैल तक अपने पीक पर पहुंचता है। यह वह समय होता है जब लोग अपनी गर्म पोशाकें छोड़ रहे होते हैं और स्वास्थ्य के प्रति थोड़े लापरवाह हो जाते हैं। यही कारण है कि इसे पोस्ट-फ्लू विंटर वायरस भी कहा जा सकता है।
किसे है सबसे ज्यादा खतरा?
यूं तो यह वायरस किसी भी उम्र के व्यक्ति को संक्रमित कर सकता है, लेकिन कुछ विशेष समूहों के लिए यह बेहद जोखिम भरा है।
- छोटे बच्चे, जिनका श्वसन तंत्र अभी पूरी तरह विकसित नहीं हुआ है।
- बुजुर्ग, 65 वर्ष से अधिक आयु के लोग जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो रही है।
- कमजोर इम्यून सिस्टम वाले मरीज, जैसे कैंसर पीड़ित, एचआईवी पॉजिटिव या वे लोग जो हाल ही में अंग प्रत्यारोपण से गुजरे हैं।
- अस्थमा और सीओपीडी के मरीज, जिन्हें पहले से ही सांस लेने में दिक्कत है, उनके लिए HMPV निमोनिया या ब्रोंकाइटिस का कारण बन सकता है।
- स्टेरॉयड लेने वाले लोग, लंबे समय से स्टेरॉयड दवाओं का सेवन करने वालों में संक्रमण का असर गहरा हो सकता है।
लक्षण
HMPV को ‘छद्मवेशी’ वायरस कहा जा सकता है क्योंकि इसके लक्षण सामान्य सर्दी-जुकाम जैसे ही होते हैं। इनमें शामिल हैं।
- लगातार सूखी या बलगम वाली खांसी।
- तेज बुखार और शरीर में दर्द।
- नाक बंद होना या लगातार पानी बहना।
- गले में तेज खराश और निगलने में तकलीफ।
- गंभीर मामलों में छाती में जकड़न और सांस फूलना।
कोई खास दवा नहीं
वर्तमान में चिकित्सा विज्ञान के पास HMPV के लिए कोई विशेष एंटीवायरल दवा या वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। इसका इलाज मुख्य रूप से ‘सिम्पटोमैटिक’ (लक्षणों के आधार पर) किया जाता है। डॉक्टरों की सलाह है कि शरीर में पानी की कमी न होने दें, खूब तरल पदार्थ पिएं। शरीर को रिकवरी के लिए पर्याप्त समय और आराम दें। बुखार और दर्द कम करने के लिए पैरासिटामोल जैसी सामान्य दवाएं ली जा सकती हैं, लेकिन डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक्स न लें (क्योंकि यह एक वायरस है, बैक्टीरिया नहीं)।
सावधानी ही बचाव
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि चूंकि इसकी कोई वैक्सीन नहीं है, इसलिए स्वच्छता ही एकमात्र हथियार है। बार-बार साबुन से हाथ धोना, भीड़भाड़ वाले इलाकों में मास्क का उपयोग करना और बीमार व्यक्ति से दूरी बनाकर रखना आपको इस अदृश्य खतरे से बचा सकता है। यदि आपको सांस लेने में ज्यादा तकलीफ महसूस हो, तो इसे सामान्य फ्लू समझकर घर पर न बैठें, तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क करें।
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