
लखनऊ। भारतीय राजनीति में एक ऐसा कानूनी भूचाल आया है जिसने देश के सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है। कांग्रेस के कद्दावर नेता और रायबरेली से सांसद राहुल गांधी की नागरिकता को लेकर चल रहा विवाद अब एक बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने एक अभूतपूर्व आदेश जारी करते हुए नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है।
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सीबीआई करेगी मामले की जांच
जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की पीठ ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए न केवल पुलिस को मुकदमा दर्ज करने को कहा है, बल्कि उत्तर प्रदेश सरकार की उस मांग को भी स्वीकार कर लिया है, जिसमें इस पूरे प्रकरण की जांच सीबीआई से कराने की वकालत की गई थी। यह आदेश उस समय आया है जब राहुल गांधी रायबरेली से निर्वाचित होकर लोकसभा में विपक्ष की आवाज बने हैं। कोर्ट के इस सख्त रुख ने अब राहुल गांधी की सांसदी और उनके राजनीतिक भविष्य पर कानूनी तलवार लटका दी है।
इस पूरे कानूनी विवाद की जड़ें ब्रिटेन की नागरिकता से जुड़ी हैं, जिसने अब भारतीय नागरिकता कानून के पेचीदा गलियारों में अपनी जगह बना ली है। भारतीय संविधान और नागरिकता अधिनियम के तहत भारत में दोहरी नागरिकता का कोई प्रावधान नहीं है। कानून स्पष्ट कहता है कि, कोई भी व्यक्ति एक ही समय में भारत और किसी अन्य देश का नागरिक नहीं रह सकता। यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से किसी विदेशी देश की नागरिकता ग्रहण करता है, तो उसकी भारतीय नागरिकता स्वतः ही समाप्त हो जाती है।
खतरे में लोकसभा की सदस्यता
याचिकाकर्ता विग्नेश शिशिर ने इसी संवैधानिक प्रावधान को आधार बनाकर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उनका आरोप है कि राहुल गांधी के पास भारतीय पासपोर्ट के साथ-साथ ब्रिटिश नागरिकता के पुख्ता प्रमाण हैं। यदि यह आरोप सिद्ध होते हैं, तो न केवल उनकी लोकसभा सदस्यता खतरे में पड़ सकती है, बल्कि भविष्य में उनके चुनाव लड़ने पर भी स्थायी रोक लग सकती है।
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट रूम में उस समय सन्नाटा पसर गया जब याचिकाकर्ता ने यह दावा किया कि, इस मामले से जुड़ी कुछ टॉप सीक्रेट फाइलें जांच के लिए निर्णायक साबित हो सकती हैं। विग्नेश शिशिर ने अपने आधिकारिक बयान में उल्लेख किया कि, केंद्र सरकार, विशेष रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के नेतृत्व वाले मंत्रालयों ने इन महत्वपूर्ण दस्तावेजों को कोर्ट के समक्ष रखने की अनुमति प्रदान की है।
केस डायरी तैयार करने के निर्देश
इन फाइलों में राहुल गांधी की कथित ब्रिटिश नागरिकता से संबंधित कुछ गोपनीय पत्राचार और रिकॉर्ड होने की बात कही जा रही है। जस्टिस सुभाष विद्यार्थी ने उपलब्ध प्राथमिक साक्ष्यों और याचिका की गंभीरता को देखते हुए यह माना कि मामला जांच के योग्य है। अदालत ने स्पष्ट किया कि चूंकि यह मामला अंतरराष्ट्रीय दस्तावेजों और एक सांसद की योग्यता से जुड़ा है, इसलिए इसकी गहन और निष्पक्ष जांच अनिवार्य है।
रायबरेली के पुलिस प्रशासन को कोर्ट ने तत्काल प्रभाव से केस डायरी तैयार करने और प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया है, लेकिन इस कहानी में सबसे बड़ा ट्विस्ट तब आया जब कोर्ट ने जांच की कमान सीबीआई को सौंपने के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी। दरअसल, किसी विदेशी देश की नागरिकता की पुष्टि करना राज्य पुलिस के अधिकार क्षेत्र से बाहर की बात होती है, क्योंकि इसमें इंटरपोल और विदेशी सरकारों के साथ समन्वय की आवश्यकता होती है।
याचिकाकर्ता बोले- कई सबूत है
सीबीआई जैसी केंद्रीय एजेंसी अब राहुल गांधी के उन कथित दस्तावेजों की पड़ताल करेगी, जिनके आधार पर यह दावा किया जा रहा है कि उन्होंने ब्रिटेन में अपनी नागरिकता दर्ज कराई थी। बीजेपी नेता विग्नेश शिशिर ने कोर्ट के बाहर मीडिया से बात करते हुए कहा कि वे इस जांच में पुलिस और जांच एजेंसियों का पूरा सहयोग करेंगे और उनके पास ऐसे कई सबूत हैं जो यह साबित कर देंगे कि, राहुल गांधी ने देश से अपनी असल नागरिकता छिपाई है।
राजनीति के जानकारों का मानना है कि, यह मामला केवल कानूनी नहीं बल्कि एक बड़ी सियासी जंग का हिस्सा बन चुका है। कांग्रेस पार्टी ने अभी तक इस पर आधिकारिक तौर पर कानूनी प्रक्रिया का हवाला दिया है, लेकिन पार्टी के अंदर इसे राजनीतिक प्रतिशोध के तौर पर देखा जा रहा है। दूसरी ओर, सत्तापक्ष का कहना है कि संविधान सर्वोपरि है और यदि किसी ने नियमों का उल्लंघन कर संसद में प्रवेश किया है, तो उसे जनता के सामने आना ही होगा।
रायबरेली में मिली थी प्रचंड जीत
2024 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी ने रायबरेली से प्रचंड जीत हासिल की थी, लेकिन अब उस जीत की वैधता पर ही सवालिया निशान लग गया है। यदि सीबीआई जांच में यह पाया गया कि, राहुल गांधी ने नामांकन के समय अपनी नागरिकता की जानकारी गलत दी थी या वे वाकई किसी दूसरे देश के नागरिक हैं, तो चुनाव आयोग लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत उनकी सदस्यता रद्द करने की सिफारिश कर सकता है।
आने वाले दिनों में इस मामले की तपिश और बढ़ने वाली है। सीबीआई जल्द ही इस मामले में प्रारंभिक जांच शुरू कर सकती है और जरूरत पड़ने पर राहुल गांधी को पूछताछ के लिए समन भी भेजा जा सकता है। यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक जाने की भी पूरी संभावना है, क्योंकि यह सीधे तौर पर एक सांसद के लोकतांत्रिक अधिकारों और देश के नागरिकता कानूनों की व्याख्या से जुड़ा है।
फिलहाल, इलाहाबाद हाईकोर्ट के इस आदेश ने यह साफ कर दिया है कि कानून की नजर में कोई भी व्यक्ति, चाहे वह कितना ही रसूखदार क्यों न हो, जवाबदेही से बच नहीं सकता। अब पूरे देश की नजरें सीबीआई की उस रिपोर्ट पर टिकी हैं जो राहुल गांधी की नागरिकता का सच दुनिया के सामने लाएगी। क्या राहुल गांधी अपनी भारतीय नागरिकता को निर्विवाद रूप से सिद्ध कर पाएंगे या यह कानूनी मोड़ उनकी राजनीतिक पारी के लिए सबसे बड़ी चुनौती साबित होगा, यह समय ही बताएगा।
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