
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश की अर्थव्यवस्था और संसाधनों के उचित उपयोग को लेकर की गई हालिया अपील का असर अब कॉर्पोरेट जगत में बड़े पैमाने पर दिखने लगा है। देश के दिग्गज उद्योगपतियों में शुमार और आरपीजी ग्रुप के चेयरमैन हर्ष गोयनका ने इस दिशा में एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए अपनी कंपनियों के लिए नए और सख्त निर्देश जारी कर दिए हैं।
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वर्क फ्रॉम होम के आदेश
गोयनका ने स्पष्ट कर दिया है कि अब व्यावसायिक जगत में दिखावे और फिजूलखर्ची के दिन लद चुके हैं और इसकी जगह अब बचत, जिम्मेदारी और राष्ट्र के प्रति समर्पण की संस्कृति लेगी। हर्ष गोयनका का यह निर्णय न केवल कंपनी के मुनाफे को प्रभावित करेगा, बल्कि यह कॉर्पोरेट इंडिया के काम करने के तरीके में भी एक बड़ा बदलाव लाने वाला साबित हो सकता है।

हर्ष गोयनका ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए अपने इस बड़े फैसले की जानकारी साझा की, जिसमें उन्होंने सीधे तौर पर प्रधानमंत्री के नेशनल एजेंडा का समर्थन करने की बात कही है। उनके द्वारा जारी किए गए निर्देशों में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव वर्क फ्रॉम होम को लेकर है।
उन्होंने समूह की सभी कंपनियों को आदेश दिया है कि, जो कर्मचारी अपने घर से काम करने में सक्षम हैं, उन्हें इसकी छूट दी जाए। गोयनका का मानना है कि, तकनीक के इस दौर में अनावश्यक रूप से ऑफिस आने-जाने से न केवल कर्मचारियों का कीमती समय बर्बाद होता है, बल्कि कंपनी के संसाधनों और पर्यावरण पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ता है। उनके इस कदम को वर्क-लाइफ बैलेंस और लागत कटौती के एक बेहतरीन मिश्रण के रूप में देखा जा रहा है।
नहीं होगा घरेलू उड़ानों का इस्तेमाल
कॉर्पोरेट जगत में अक्सर अधिकारियों की हवाई यात्राएं और भव्य मीटिंग्स चर्चा का विषय रहती हैं, लेकिन हर्ष गोयनका ने अब इस पर भी कैंची चला दी है। नई गाइडलाइंस के अनुसार, ग्रुप के अधिकारियों की विदेशी यात्राओं में अब भारी कटौती की जाएगी। इतना ही नहीं, घरेलू उड़ानों का इस्तेमाल भी अब केवल तभी किया जा सकेगा जब वह व्यवसाय के लिए अत्यंत आवश्यक हो।
गोयनका ने निर्देश दिया है कि, जो इंटर-सिटी मीटिंग्स और कॉन्फ्रेंस पहले दूसरे शहरों में जाकर फिजिकली आयोजित की जाती थीं, उन्हें अब पूरी तरह से वर्चुअल मोड पर शिफ्ट कर दिया जाएगा। उनका तर्क है कि, तकनीक ने जब हमें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग जैसी सुविधाएं दी हैं, तो केवल एक मीटिंग के लिए एक शहर से दूसरे शहर उड़ान भरना अब समझदारी नहीं बल्कि फिजूलखर्ची है।

पर्यावरण संरक्षण और सस्टेनेबिलिटी को लेकर भी हर्ष गोयनका ने एक बेहद सख्त और भविष्यवादी रुख अपनाया है। उन्होंने घोषणा की है कि आरपीजी ग्रुप अब भविष्य में जितनी भी नई कारें खरीदेगा या लीज पर लेगा, वे केवल इलेक्ट्रिक या हाइब्रिड मॉडल ही होंगे। यह कदम सीधे तौर पर देश के ग्रीन एनर्जी मिशन को गति देने वाला है। इसके साथ ही, उन्होंने अपने कर्मचारियों के लिए भी एक विशेष सलाह जारी की है।
पब्लिक ट्रांसपोर्ट का करें इस्तेमाल
गोयनका चाहते हैं कि, ऑफिस आने वाले कर्मचारी निजी वाहनों के बजाय कारपूलिंग करें या बस और मेट्रो जैसे पब्लिक ट्रांसपोर्ट का अधिक से अधिक इस्तेमाल करें। इससे न केवल सड़कों पर ट्रैफिक का बोझ कम होगा, बल्कि प्रदूषण के स्तर में भी गिरावट आएगी। हर्ष गोयनका का मानना है कि, कंपनी के भीतर होने वाले इंटरनल रिव्यू, जॉब इंटरव्यू और रूटीन मीटिंग्स के लिए तकनीक का भरपूर सहारा लेना चाहिए। इससे न केवल कंपनी का पैसा बचेगा, बल्कि अधिकारियों की कार्यक्षमता में भी सुधार होगा।
उन्होंने अपने संदेश के अंत में एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात कही कि ये कदम केवल आर्थिक लाभ के लिए नहीं उठाए गए हैं, बल्कि इनका उद्देश्य प्रधानमंत्री के राष्ट्रीय विजन का समर्थन करना है। वे चाहते हैं कि कंपनी के भीतर जिम्मेदारी और समझदारी की एक ऐसी संस्कृति विकसित हो, जहां हर कर्मचारी संसाधन की कीमत को समझे। गोयनका के इस साहसी फैसले के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या देश के अन्य बड़े कॉर्पोरेट घराने भी इसी तरह के कठोर और दूरगामी कदम उठाते हैं।
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