
भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म में साहस, शक्ति और अटूट भक्ति के पर्याय माने जाने वाले भगवान हनुमान का जन्मोत्सव इस वर्ष 2 अप्रैल को देश भर में पूरे उत्साह के साथ मनाया जाएगा। चैत्र मास की पूर्णिमा तिथि को अवतरित होने वाले अंजनी पुत्र की कृपा पाने के लिए यह दिन आध्यात्मिक दृष्टि से वर्ष का सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं और धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इसी पावन तिथि पर संकटमोचन हनुमान जी का इस पृथ्वी पर आगमन हुआ था, इसलिए देशभर के मंदिरों और घरों में इस दिन को उनके जन्मोत्सव के रूप में बेहद हर्षोल्लास से मनाया जाता है।
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भगवान शिव के 11वें अवतार हैं हनुमान जी
इस वर्ष की तिथि गणना और हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 1 अप्रैल को सुबह 7:08 मिनट से हो रही है जो अगले दिन 2 अप्रैल को सुबह 7:41 मिनट तक प्रभावी रहेगी। शास्त्रों में उदया तिथि की प्रधानता को देखते हुए हनुमान जयंती का मुख्य उत्सव 2 अप्रैल को ही मनाया जाएगा।

हनुमान जी का जन्म त्रेता युग में चैत्र पूर्णिमा की सुबह मंगलकारी बेला में हुआ था और उस दिन मंगलवार होने के कारण ही उनका इस दिन से गहरा नाता माना जाता है। हनुमान जी को भगवान शिव के 11वें रुद्र अवतार के रूप में पूजा जाता है जिन्हें अलौकिक और दिव्य शक्तियों का स्वामी कहा गया है। उनके पिता केसरी और माता अंजनी की तपस्या से प्रसन्न होकर महादेव ने उनके घर में पुत्र रूप में जन्म लिया था ताकि वे भविष्य में प्रभु श्री राम के सहायक बन सकें।
शास्त्रों में हनुमान जी को बल, बुद्धि और विद्या का दाता कहा गया है जिनके पास अष्ट सिद्धि और नवनिधि जैसी अपार शक्तियां विद्यमान हैं। उन्हें पवन पुत्र भी कहा जाता है क्योंकि उनके जन्म में वायु देव का विशेष आशीर्वाद शामिल था। धर्म ग्रंथों में वर्णित आठ ऐसे पौराणिक पात्रों में हनुमान जी का नाम प्रमुखता से लिया जाता है जिन्हें अमर माना गया है। अश्वत्थामा, राजा बलि, महर्षि वेद व्यास, विभीषण, कृपाचार्य, परशुराम और मार्कण्डेय ऋषि के साथ हनुमान जी भी अष्ट चिरंजीवियों में शामिल हैं जिनका प्रतिदिन स्मरण करने से मनुष्य को लंबी आयु और निरोगी शरीर की प्राप्ति होती है।
ब्रह्म मुहूर्त में उठकर करें पूजा
हनुमान जन्मोत्सव के दिन पूजा करने की विधि अत्यंत प्रभावशाली मानी गई है। चूंकि हनुमान जी का जन्म सूर्योदय के समय हुआ था इसलिए इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर पूजा करना श्रेष्ठ फलदायी होता है। भक्तों को चाहिए कि वे सुबह जल्दी उठकर घर की अच्छी तरह साफ-सफाई करें और गंगाजल का छिड़काव कर पूरे वातावरण को पवित्र कर लें।
स्नान आदि से निवृत्त होकर हनुमान मंदिर या घर के पूजा स्थल पर हनुमान जी को सिंदूर और चमेली के तेल का चोला अर्पित करना चाहिए क्योंकि चमेली का तेल उन्हें अत्यंत प्रिय है। पूजा के दौरान भगवान को अबीर, गुलाल, अक्षत, फूल और धूप-दीप अर्पित करना चाहिए। विशेष रूप से सरसों के तेल का दीपक जलाकर हनुमान जी को पान का बीड़ा चढ़ाना एक रामबाण उपाय माना गया है, जिसमें गुलकंद और बादाम कतरी शामिल हो। ऐसा माना जाता है कि, पान का बीड़ा अर्पित करने से साधक के जीवन के सभी रुके हुए काम फिर से बनने लगते हैं।
शनि देव की अशुभ दृष्टि से मिलती है राहत
ज्योतिष शास्त्र की दृष्टि से भी हनुमान जन्मोत्सव का दिन बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि जिन लोगों की कुंडली में शनि देव अशुभ स्थिति में हैं या जिन पर शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव चल रहा है उनके लिए बजरंगबली की आराधना संजीवनी के समान कार्य करती है। हनुमान जी की उपासना करने से शनि ग्रह से जुड़ी तमाम व्याधियां दूर हो जाती हैं और जीवन में मंगल का आगमन होता है। पूजा के समापन पर हनुमान चालीसा, सुंदरकांड और हनुमान आरती का पाठ करने से मानसिक शांति और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।
विभिन्न राशियों के जातकों के लिए भी इस दिन विशेष मंत्रों का विधान बताया गया है जो उनके जीवन के कष्टों को दूर करने में सहायक होते हैं।
- मेष राशि के जातकों को ॐ सर्वदुखहराय नमः का जाप करना चाहिए
- वृषभ राशि वालों के लिए ॐ कपिसेनानायक नमः मंत्र लाभकारी रहता है।
- मिथुन राशि के जातक ॐ मनोजवाय नमः और कर्क राशि वाले ॐ लक्ष्मणप्राणदात्रे नमः का उच्चारण कर सकते हैं।
- सिंह राशि के लिए ॐ परशौर्य विनाशन नमः मन्त्र का उच्चारण करें
- कन्या राशि के लिए ॐ पंचवक्त्र नमः मंत्र की महिमा बताई गई है।
- तुला राशि के जातक ॐ सर्वग्रह विनाशिने नमः
- वृश्चिक राशि वाले ॐ सर्वबन्धविमोक्त्रे नमः का जाप कर लाभ उठा सकते हैं।
- धनु राशि के लिए ॐ चिरंजीविते नमः
- मकर राशि हेतु ॐ सुरार्चिते नमः का विधान है
- कुंभ राशि के जातकों को ॐ वज्रकाय नमः
- मीन राशि वालों को ॐ कामरूपिणे नमः मंत्र का जाप करना चाहिए।
हनुमान जी के बारह विशेष नामों का स्मरण करना भी इस दिन अत्यंत कल्याणकारी सिद्ध होता है। ॐ हनुमान, ॐ अंजनी सुत, ॐ वायु पुत्र, ॐ महाबल, ॐ रामेष्ठ, ॐ फाल्गुण सखा, ॐ पिंगाक्ष, ॐ अमित विक्रम, ॐ उदधिक्रमण, ॐ सीता शोक विनाशन, ॐ लक्ष्मण प्राण दाता और ॐ दशग्रीव दर्पहा जैसे नामों के उच्चारण मात्र से ही व्यक्ति के भय का नाश होता है और उसे हर कार्य में विजय प्राप्त होती है। इस पावन अवसर पर दान-पुण्य का भी विशेष महत्व है और भक्तों द्वारा हनुमान जी को बूंदी का भोग लगाकर प्रसाद वितरित करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है।
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