
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्रदेश के लाखों शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के हित में एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा को 20 लाख रुपये से बढ़ाकर अब 25 लाख रुपये कर दी गई है।
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जारी हुआ शासनादेश
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गत दिवस यानी 16 मार्च को इस संबंध में औपचारिक शासनादेश जारी कर दिया गया है। इस निर्णय से न केवल कर्मचारियों की वित्तीय सुरक्षा सुदृढ़ होगी, बल्कि सेवानिवृत्ति के बाद उनके जीवन स्तर में भी गुणात्मक सुधार आएगा। सरकार का यह कदम प्रदेश के लगभग ढाई लाख परिवारों के लिए एक बड़ी राहत और होली के उपहार के रूप में देखा जा रहा है।
उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक और शैक्षिक इतिहास में यह निर्णय इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सीधे तौर पर उन कर्मचारियों को प्रभावित करता है जो दशकों से शिक्षा की लौ जलाए हुए हैं। अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षक और कर्मचारी लंबे समय से ग्रेच्युटी की सीमा बढ़ाए जाने की मांग कर रहे थे। सरकार ने इस मांग को वेतन समिति उत्तर प्रदेश 2016 की सिफारिशों के साथ जोड़ते हुए अब अमली जामा पहना दिया है।
छह मार्च को वित्त विभाग ने दी सहमति
शासनादेश के अनुसार, यह वृद्धि उन सभी शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों पर लागू होगी जिन्होंने 60 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्ति का विकल्प चुना है। वित्त विभाग की ओर से इस प्रस्ताव पर 6 मार्च को ही सहमति दे दी गई थी, जिसके बाद अब इसे पूरे प्रदेश में प्रभावी ढंग से लागू कर दिया गया है।
इस फैसले की तकनीकी बारीकियों को समझें तो यह वृद्धि महंगाई भत्ते यानी डीए के साथ जुड़ी हुई है। केंद्र और राज्य सरकार के मौजूदा नियमों के तहत, जब भी महंगाई भत्ता मूल वेतन का 50 प्रतिशत या उससे अधिक हो जाता है, तब ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा में 25 प्रतिशत की वृद्धि का प्रावधान स्वतः सक्रिय हो जाता है।

वर्तमान में महंगाई भत्ता 50 प्रतिशत की सीमा को पार कर चुका है, जिसके परिणामस्वरूप योगी सरकार ने पुरानी सीमा यानी 20 लाख रुपये में 5 लाख रुपये का इजाफा करते हुए इसे 25 लाख रुपये तय कर दिया है। यह संशोधन न केवल सेवानिवृत्ति ग्रेच्युटी के लिए है, बल्कि दुर्भाग्यवश सेवा काल के दौरान मृत्यु होने की स्थिति में मिलने वाली डेथ ग्रेच्युटी पर भी समान रूप से लागू होगा, जिससे पीड़ित परिवारों को पहले के मुकाबले अधिक आर्थिक संबल मिल सकेगा।
इससे पहले 2017 में जारी हुआ था शासनादेश
ऐतिहासिक रूप से देखा जाए तो इससे पहले 7 मई 2017 को एक शासनादेश जारी किया गया था, जिसमें ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा 20 लाख रुपये निर्धारित की गई थी। उस समय से अब तक महंगाई और जीवनयापन की लागत में काफी वृद्धि हुई है। इसी को ध्यान में रखते हुए वेतन समिति की सिफारिशों को आधार बनाकर वित्त विभाग ने 23 दिसंबर 2016 और 2 जुलाई 2024 के प्रावधानों के आलोक में समीक्षा की।
सम्यक विचार-विमर्श के बाद यह निष्कर्ष निकाला गया कि, कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए ग्रेच्युटी की ऊपरी सीमा को बढ़ाया जाना अनिवार्य है। इस निर्णय का सीधा लाभ उन ढाई लाख कर्मचारियों को मिलेगा जो एडेड माध्यमिक विद्यालयों में विभिन्न पदों पर कार्यरत हैं। शिक्षक संगठनों और कर्मचारी यूनियनों ने सरकार के इस कदम का व्यापक स्वागत किया है। उनका मानना है कि, सेवानिवृत्ति के समय मिलने वाली एकमुश्त राशि में 5 लाख रुपये की यह बढ़ोतरी वर्तमान आर्थिक परिदृश्य में अत्यंत सहायक सिद्ध होगी।
शिक्षक अक्सर अपनी सेवानिवृत्ति की राशि का उपयोग बच्चों की उच्च शिक्षा, विवाह या अपने स्वास्थ्य संबंधी खर्चों के लिए करते हैं। ऐसे में ग्रेच्युटी की सीमा बढ़ने से उन्हें अपने पारिवारिक दायित्वों को निभाने में अधिक आसानी होगी। माध्यमिक शिक्षक संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि, यह निर्णय शिक्षकों के प्रति सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाता है, हालांकि वे अन्य लंबित मांगों पर भी सरकार से इसी तरह की सकारात्मक प्रतिक्रिया की अपेक्षा रखते हैं।
चुनाव में मिल सकता है फायदा
राजनीतिक दृष्टिकोण से भी यह फैसला अत्यंत सामयिक माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावी समीकरणों को देखते हुए जहां विपक्षी दल अपने-अपने फॉर्मूलों के माध्यम से विभिन्न वर्गों को साधने में जुटे हैं, वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सीधे तौर पर कर्मचारी वर्ग को बड़ी सौगात देकर अपनी स्थिति मजबूत की है।
प्रदेश में शिक्षकों और कर्मचारियों का एक बड़ा और प्रभावशाली वोट बैंक है, जो न केवल मतदान के दिन बल्कि पूरे चुनाव प्रचार के दौरान एक बड़ी भूमिका निभाता है। ऐसे में 25 लाख की ग्रेच्युटी का यह दांव सरकार के पक्ष में एक सकारात्मक माहौल तैयार करने वाला साबित हो सकता है। सरकार ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि, वह अपने कर्मचारियों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है और नियमों के दायरे में रहकर हर संभव लाभ प्रदान करने के लिए तैयार है।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि, इस शासनादेश के जारी होने के बाद अब उन सभी पेंडिंग केसों और भविष्य के सेवानिवृत्ति दावों में नई सीमा के आधार पर गणना की जाएगी। वित्त विभाग ने सभी संबंधित आहरण-वितरण अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे नए नियमों का पालन सुनिश्चित करें ताकि किसी भी शिक्षक या कर्मचारी को अपने हक की राशि प्राप्त करने में अनावश्यक देरी का सामना न करना पड़े।
यह निर्णय केवल आर्थिक लाभ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन सरकारी कर्मचारियों के मनोबल को भी बढ़ाता है जो अपनी पूरी कार्य अवधि के दौरान निष्ठापूर्वक सेवा करते हैं। 25 लाख रुपये की यह सीमा अब राज्य के अन्य विभागों के अनुरूप हो गई है, जिससे कर्मचारियों के बीच एक समानता का भाव भी पैदा हुआ है।
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