
देहरादून। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी का आज मंगलवार को निधन हो गया है। 91 वर्षीय भुवन चंद्र खंडूरी पिछले कुछ समय से अस्वस्थ थे और देहरादून के मैक्स अस्पताल में भर्ती थे। उनके निधन के बाद उत्तराखंड में तीन दिन का राजकीय शोक घोषित किया गया है। इस दौरान सभी जिलों में सरकारी दफ्तर बंद रहेंगे।
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प्रदेश में शोक की लहर
पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय सेना के पूर्व जांबाज अधिकारी मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चंद्र खंडूड़ी के निधन के साथ ही उत्तराखड़ की राजनीति में एक युग का अंत हो गया। जैसे ही उनके निधन की खबर आई पूरे प्रदेश में शोक की लहर दौड़ गई।
भुवन चंद्र खंडूड़ी का जाना उत्तराखंड के लिए एक अपूरणीय क्षति है। वह एक ऐसी शख्सियत थे जिन्होंने सेना में रहते हुए देश की सीमाओं की रक्षा की और राजनीति में कदम रखने के बाद अपनी बेदाग छवि और अनुशासित कार्यशैली से उत्तराखंड के विकास को एक नई दिशा दी। उन्हें राज्य की राजनीति में मिस्टर क्लीन के रूप में जाना जाता था। उनके निधन पर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और देश के तमाम वरिष्ठ राजनेताओं ने गहरा दुख व्यक्त किया है।

उत्तराखंड शासन द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, पूर्व मुख्यमंत्री के निधन के कारण राज्य में तीन दिनों तक समस्त जनपदों में सरकारी कार्यालय पूरी तरह बंद रहेंगे। इस अवधि के दौरान प्रदेश में किसी भी प्रकार के शासकीय मनोरंजन या आधिकारिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन नहीं किया जाएगा। उत्तराखंड के महान सपूत को अंतिम विदाई देने के लिए सरकार ने फैसला किया है कि 20 मई को पूरे पुलिस सम्मान के साथ उनकी अंत्येष्टि की जाएगी। अंत्येष्टि के दिन भी राज्य सरकार के सभी दफ्तरों में अवकाश रहेगा।
1 अक्टूबर 1933 को हुआ था जन्म
पौड़ी गढ़वाल के मूल निवासी भुवन चंद्र खंडूड़ी का जन्म 1 अक्टूबर 1933 को हुआ था। सार्वजनिक जीवन और राजनीति में आने से पहले उनका एक बेहद गौरवशाली सैन्य इतिहास रहा। उन्होंने साल 1954 से लेकर 1990 तक लगभग 36 वर्षों तक भारतीय सेना में अपनी सेवाएं दीं। इस दौरान उन्होंने देश के कई महत्वपूर्ण सैन्य अभियानों में हिस्सा लिया, जिसमें 1971 का भारत-पाकिस्तान युद्ध भी शामिल है, जहां उन्होंने बतौर रेजिमेंट कमांडर मोर्चे का नेतृत्व किया था।
देश के प्रति उनकी उत्कृष्ट सेवाओं को देखते हुए साल 1982 में उन्हें अति विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया गया था। शिक्षा के क्षेत्र में भी वह बेहद समृद्ध थे। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय, सैन्य अभियांत्रिकी महाविद्यालय पुणे, इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियर्स नई दिल्ली और रक्षा प्रबंध संस्थान सिकंदराबाद से अपनी उच्च शिक्षा पूरी की थी।
2009 में संभाली थी प्रदेश की कमान
सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद खंडूड़ी ने जनसेवा का रास्ता चुना और राजनीति में प्रवेश किया। वह पहली बार 1991 में उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र से लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए और संसद पहुंचे। इसके बाद वह कई बार इस क्षेत्र से सांसद चुने गए और केंद्र सरकार में भी महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली।
उत्तराखंड के राजनीतिक इतिहास में बीसी खंडूड़ी का नाम बेहद सम्मान के साथ लिया जाता है। वह दो बार राज्य के मुख्यमंत्री पद पर आसीन रहे। पहली बार उन्होंने 8 मार्च 2007 से 27 जून 2009 तक सूबे की कमान संभाली। इसके बाद, सितंबर 2011 में जब तत्कालीन मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने अपने पद से इस्तीफा दिया, तो भारतीय जनता पार्टी ने राज्य की कमान एक बार फिर खंडूड़ी के हाथों में सौंपी। वह 11 सितंबर 2011 से मार्च 2012 तक दूसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री रहे। उनके दोनों ही कार्यकालों को उनके कड़े फैसलों, भ्रष्टाचार पर लगाम और प्रशासनिक शुचिता के लिए याद किया जाता है।
पीएम मोदी और राष्ट्रपति ने दी श्रद्धांजलि
उनके निधन की खबर मिलते ही दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सभी नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने उनके योगदान को याद करते हुए इसे देश और उत्तराखंड के लिए एक बड़ा नुकसान बताया है। वहीं, बीजेपी के राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ-साथ विपक्षी दल कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत तथा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने भी गहरा शोक प्रकट किया है।
विपक्षी नेताओं का कहना है कि भुवन चंद्र खंदूरी का जाना उत्तराखंड के एक ईमानदार, कर्मठ और मार्गदर्शक नेता का जाना है, जिसकी भरपाई कभी नहीं की जा सकती। बुधवार को पूरे राजकीय और सैन्य सम्मान के साथ उनकी अंतिम यात्रा निकाली जाएगी, जिसमें देश और राज्य के कई बड़े दिग्गजों के शामिल होने की उम्मीद है।
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