पूर्व अमेरिकी राजदूत का ट्रंप पर तीखा वार, कहा- ‘भारत के मुंह पर थूका’, 30 साल की मेहनत पर फेरा पानी

वॉशिंगटन। अमेरिका की राजनीति में एक बार फिर से भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर भूचाल आ गया है। पूर्व अमेरिकी राजदूत और डेमोक्रेटिक पार्टी के कद्दावर नेता रेहम इमैनुएल ने डोनाल्ड ट्रंप की विदेश नीति की धज्जियां उड़ाते हुए एक ऐसा बयान दिया है, जिसने वॉशिंगटन से लेकर नई दिल्ली तक सनसनी फैला दी है। इमैनुएल ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि डोनाल्ड ट्रंप ने अपने कार्यकाल के दौरान उन रिश्तों को गहरी चोट पहुंचाई है, जिन्हें बनाने में पिछले 30 सालों के अमेरिकी राष्ट्रपतियों ने दिन-रात एक कर दिया था।

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पाकिस्तान प्रेम की खोली पोल

2028 के राष्ट्रपति चुनाव की तैयारियों में जुटे इमैनुएल का यह हमला न केवल राजनीतिक है, बल्कि यह ट्रंप के उस पाकिस्तान प्रेम की भी पोल खोलता है जिसने दक्षिण एशिया में अमेरिका की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Rahm Emmanuel

रेहम इमैनुएल ने एक विशेष बातचीत में भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते फासले के लिए पूरी तरह से डोनाल्ड ट्रंप के रवैये को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कड़े और विवादास्पद शब्दों का प्रयोग करते हुए कहा कि डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के तहत अमेरिका ने जानबूझकर भारत को अपने से दूर किया है।

इमैनुएल के अनुसार, ट्रंप का व्यवहार ऐसा था मानो उन्होंने भारत के स्वाभिमान और उसके भरोसे के मुंह पर थूक दिया हो। उन्होंने तर्क दिया कि शीत युद्ध की समाप्ति के बाद से लेकर अब तक, चाहे वह बिल क्लिंटन हों, जॉर्ज बुश हों या बराक ओबामा, हर अमेरिकी राष्ट्रपति का एक साझा प्रोजेक्ट रहा था, भारत को अमेरिका के सबसे करीबी रणनीतिक साझेदार के रूप में स्थापित करना, लेकिन ट्रंप ने सत्ता में आते ही इस ऐतिहासिक प्रोजेक्ट को न केवल डिस्टर्ब किया, बल्कि इसे पूरी तरह से पटरी से उतार दिया।

इमैनुएल, जो लंबे समय से ट्रंप की नीतियों के कट्टर आलोचक रहे हैं, का मानना है कि ट्रंप की अमेरिका फर्स्ट की संकीर्ण सोच ने अमेरिका के उन पुराने और भरोसेमंद दोस्तों को भी डरा दिया है जो दशकों से उनके साथ खड़े थे। उनका कहना है कि, केवल भारत ही नहीं, बल्कि जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देश भी आज अमेरिका के साथ रक्षा और कूटनीतिक सौदे करने से पहले सौ बार सोच रहे हैं।

आतंकवाद का पनाहगाह है पाकिस्तान

ट्रंप की अनिश्चित बयानबाजी और उनके द्वारा सहयोगियों पर डाले गए अनुचित दबाव की वजह से ये देश अब अमेरिका से कन्नी काट रहे हैं और अपने लिए नए विकल्पों की तलाश कर रहे हैं। रेहम ने साफ किया कि, अगर वह आगामी राष्ट्रपति चुनाव जीतते हैं, तो उनकी पहली प्राथमिकता भारत के साथ उन जख्मों को भरना होगी, जो ट्रंप के कार्यकाल के दौरान मिल रहे हैं।

इस तीखी आलोचना का एक बड़ा हिस्सा ट्रंप के पाकिस्तान के प्रति अचानक जागे प्रेम पर आधारित है। रेहम इमैनुएल ने विदेश नीति के जानकारों के हवाले से सवाल उठाया कि, आखिर क्यों ट्रंप ने एक विश्वसनीय लोकतांत्रिक राष्ट्र भारत के मुकाबले उस पाकिस्तान के पाले में खड़ा होना पसंद किया, जो आतंकवाद का पनाहगाह माना जाता है।

उन्होंने विशेष रूप से पिछले साल मई में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए चार दिवसीय सैन्य संघर्ष का जिक्र किया। इमैनुएल के अनुसार, जब भारत अपनी सीमाओं की रक्षा कर रहा था, तब ट्रंप की बयानबाजी दिल्ली के लिए अपमानजनक और असहज करने वाली थी। ट्रंप ने ऐसे बयान दिए जो पूरी तरह से भारत के राष्ट्रीय हितों के खिलाफ थे और पाकिस्तान के हौसले बुलंद करने वाले थे।

सबसे चौंकाने वाला खुलासा ट्रंप का पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर के प्रति लगाव को लेकर किया गया। इमैनुएल ने कटाक्ष करते हुए कहा कि, डोनाल्ड ट्रंप उस पाकिस्तानी जनरल असीम मुनीर को अपना पसंदीदा फील्ड मार्शल कहते हैं, जो लगातार भारत के खिलाफ जहर उगलता रहता है। एक तरफ भारत आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रहा है और दूसरी तरफ अमेरिका का तत्कालीन राष्ट्रपति भारतीय हितों को चोट पहुंचाने वाले सैन्य तानाशाहों की तारीफों के पुल बांध रहा था।

इमैनुएल 2028 में लड़ सकते हैं चुनाव

इमैनुएल का मानना है कि, यह नीतिगत विरोधाभास अमेरिकी विदेश नीति के इतिहास में एक काला धब्बा है, जिसने दक्षिण एशिया में शक्ति संतुलन को बिगाड़ने का काम किया है। रेहम इमैनुएल की नजरें अब 2028 के राष्ट्रपति चुनाव पर हैं और वह खुद को एक ऐसे नेता के रूप में पेश कर रहे हैं जो अमेरिका की खोई हुई अंतरराष्ट्रीय साख को वापस दिला सके।

Rahm Emmanuel

प्रतिनिधि सभा में इलिनोइस का प्रतिनिधित्व कर चुके इमैनुएल जानते हैं कि, अमेरिका में रहने वाले भारतीय-अमेरिकी समुदाय का वोट बैंक कितना महत्वपूर्ण है। उनके इस बयान को उसी समुदाय को साधने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है। उन्होंने बार-बार इस बात पर जोर दिया कि, भारत के बिना अमेरिका की इंडो-पैसिफिक रणनीति कभी सफल नहीं हो सकती, लेकिन ट्रंप ने अपनी सनक में इस बुनियादी हकीकत को नजरअंदाज कर दिया।

इमैनुएल ने दुखती रग पर रखा हाथ

रेहम इमैनुएल का यह बयान केवल चुनावी स्टंट नहीं है, बल्कि यह वॉशिंगटन के भीतर चल रही उस बड़ी चिंता को दर्शाता है कि, क्या अमेरिका अब भी एक भरोसेमंद वैश्विक साथी है। ट्रंप के कार्यकाल के दौरान टैरिफ को लेकर भारत के साथ हुई तनातनी और एच-1बी वीजा नियमों में किए गए सख्त बदलावों ने भारतीय मध्यम वर्ग और व्यापारिक जगत में भी काफी नाराजगी पैदा की थी। इमैनुएल ने इन्हीं दुखती रगों पर हाथ रखा है।

 

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