
तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य गतिरोध एक बार फिर से एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है, जिसने वैश्विक समुदाय को चिंता में डाल दिया है। मंगलवार को अमेरिकी सेना ने दावा किया कि, उसने ईरान के छह से अधिक सैन्य ठिकानों पर बमबारी की, जो करीब पांच घंटे तक चली। इस दावे का जवाब देते हुए ईरान ने बताया कि उसने भी कई अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना निशाना बनाया । इस बढ़ते टकराव का सीधा असर वैश्विक तेल बाजार पर पड़ा है, जहां कच्चे तेल की कीमतों में लगभग दो प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
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अमेरिका ने फिर किया ईरान पर हमला
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि, अमेरिकी सेना ने 13 जुलाई की रात ईरान के खिलाफ एक बड़ा अभियान चलाया, जो करीब पांच घंटे तक जारी रहा। इस दौरान सेना ने बुशेहर, चाबहार, जास्क, कोनारक, अबू मूसा और बंदर अब्बास सहित कई इलाकों में सटीक हमले किए और बड़े स्तर पर तबाही मचाई।

अमेरिकी पक्ष का कहना है कि, ये हमले ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को कमज़ोर करने के लिए किये गये हैं, जिनका इस्तेमाल वह वाणिज्यिक जहाजों और आम नागरिकों पर हमले के लिए कर सकता है। इस हमले के दौरान अमेरिका ने तटीय रक्षा प्रणालियों, मिसाइल और ड्रोन ठिकानों के साथ ही समुद्री क्षमताओं को निशाना बनाया। अमेरिका ने ये भी दावा किया कि, इस समय मध्य-पूर्व क्षेत्र में 50,000 से अधिक अमेरिकी सैनिक तैनात हैं और हाई अलर्ट पर हैं।
यहां ध्यान देने वाली बात ये है कि, ये हमला पहली बार नहीं हुआ है, बल्कि पिछले कई हफ्तों से चल लगातार चल रहा है। अमेरिका ने जुलाई की शुरुआत में भी चाबहार, बंदर अब्बास, कोनारक और बुशेहर जैसे इलाकों में हमले किये थे, जिसके बाद स्थिति और बिगड़ती चली गई और दोनों देशों के वार्ता की मेज पर आने की उम्मीद धुंधली पड़ने लगी।
ईरान का पलटवार
इधर,ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने भी जवाबी कार्रवाई का दावा किया है। IRGC की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि, उसने बहरीन में स्थित अल-जुफैर बेस को निशाना बनाया, जहां हथियारों का भंडार, सैटेलाइट संचार केंद्र और अमेरिकी सैनिकों से जुड़ी एक इमारत मौजूद थी। इसके अलावा IRGC ने एक अमेरिकी MQ-1 ड्रोन को मार गिराने का भी दावा किया है।
ईरान ने ये भी दावा किया कि, उसने हॉर्मुज जलडमरूमध्य में दो ऐसे बड़े तेल टैंकरों पर हमला किया, जो उन्हें संदिग्ध नजर आ रहे थे।
इसी बीच संयुक्त अरब अमीरात ने आरोप लगाया है कि, हॉर्मुज क्षेत्र में उसके दो तेल टैंकरों पर भी हमला किया गया। इस पूरे घटनाक्रम को देखकर ये स्पष्ट हो गया है कि, ये संघर्ष अब सिर्फ अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि पूरे खाड़ी क्षेत्र को अपनी आगोश में लेने लगा है। इस हमले का असर मिडिल ईस्ट की सुरक्षा के साथ ही होर्मुज से गुजरने वाले वाणिज्यिक नौवहन पर भी पड़ रहा है।
तेल व्यापार पर असर
आपको बता दें कि, इस सैन्य टकराव सबसे बुरा प्रभाव अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर देखने को मिल रहा है। जब ये ये युद्ध शुरू हुआ है तब से कच्चे तेल की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि हुई है। ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़कर करीब 85 डॉलर प्रति बैरल तक जा पहुंची, जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड लगभग 80 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया।

तेल बाजार में यह उछाल पिछले एक महीने के उच्चतम स्तर पर है। विश्व विशेषज्ञों का कहना है कि, अगर हॉर्मुज जलडमरूमध्य में ऐसे ने तनाव बढ़ता रहा, तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हो सकती है और महंगाई का स्तर तेजी से बढ़ेगा, जिससे दुनियाभर में हाहाकार मच जायेगा, क्योंकि दुनिया के कच्चे तेल के एक बड़े हिस्से का परिवहन इसी मार्ग से होता है।
संयुक्त राष्ट्र में उठा मामला
ईरान ने इस मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र में भी उठाया है और अमेरिका पर पहले हुए समझौतों को कमजोर करने का आरोप लगाया है। ध्यान देने वाली बात यह है कि, इससे पहले अमेरिका और ईरान के बीच एक शांति समझौते पर सहमति बन चुकी थी, जिसके तहत लड़ाई को रोका गया था और हॉर्मुज जलडमरूमध्य को व्यापार के लिए फिर से खोला गया था। लेकिन कुछ ही समय बाद ईरान पर हॉर्मुज में दो जहाजों पर हमला करने का आरोप लगा, जिसके जवाब में अमेरिका ने दोबारा कार्रवाई शुरू कर दी और युद्ध की आग एक बार फिर भड़क उठी।
हाल के संघर्ष पर नजर
- अमेरिकी सेना ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर बरसाए बम, 5 घंटे तक चली सैन्य कार्रवाई।
- बुशेहर, चाबहार, जास्क, कोनारक, अबू मूसा और बंदर अब्बास को बनाया निशाना।
- डिफेंस सिस्टम, मिसाइल, ड्रोन ठिकाने और नौसैनिक क्षमताओं पर किये गये हमले।
- मध्य-पूर्व में तैनात 50,000 से अधिक अमेरिकी सैनिक हाई अलर्ट पर हैं।
- IRGC का दावा उसने भी बहरीन के अल-जुफैर बेस पर जवाबी हमले किया।
- ईरान ने हॉर्मुज में दो तेल टैंकरों पर हमले किये।
- UAE ने अपने दो तेल टैंकरों पर हमले का आरोप लगाया।
- ईरान ने संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका पर समझौता तोड़ने का आरोप लगाया।
- संघर्ष बढ़ने से वैश्विक तेल कीमतों में तेजी से हुआ इजाफा
- दोनों देशों के बीच हुआ शांति समझौता टूटा, टकराव शुरू
खत्म हुई शांति की उम्मीद
मिडिल ईस्ट में इस समय जो स्थिति बनी हुई है, उसे देखकर ये कहना गलत नहीं होगा की शांति वार्ता की उम्मीद करना अब बेमानी है दरअसल, एक बार शांति समझौता हुआ और संघर्ष भी थमा, लेकिन दोनों पक्षों के बीच अविश्वास इतना गहरा है कि, एक घटना से समझौता टूट गया और दोनों देश फिर से आमने-सामने आ गये।

अगर ऐसे ही हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव जारी रहा, तो इसका असर सिर्फ अमेरिका और ईरान तक सीमित न रहकर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था, खासकर तेल आयात करने वाले देशों पर पड़ सकता है। साथ ही, क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री व्यापार को लेकर भी चिंताएं और गहरा सकती हैं।
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