
नयी दिल्ली।केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को लोकसभा में दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (संशोधन) विधेयक, 2025 पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए देश की बैंकिंग प्रणाली में आए सकारात्मक सुधारों को रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि आईबीसी के प्रभावी कार्यान्वयन से न केवल बैंकिंग व्यवस्था मजबूत हुई है, बल्कि वाणिज्यिक बैंकों की गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों की वसूली में भी बड़ी सफलता मिली है।
वित्त मंत्री के अनुसार, बैंकों के कुल एनपीए की वसूली में इस संहिता का योगदान 54 प्रतिशत से भी अधिक रहा है। उन्होंने सदन को सूचित किया कि इस नए संशोधन विधेयक के माध्यम से आईबीसी में 12 महत्वपूर्ण बदलाव प्रस्तावित हैं, जिनका उद्देश्य पूरी प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और कुशल बनाना है।
सदन में चर्चा के दौरान वित्त मंत्री ने बताया कि संसद की प्रवर समिति द्वारा दी गई 17 प्रमुख अनुशंसाओं को सरकार ने स्वीकार कर लिया है। इसके अतिरिक्त, पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए एक और महत्वपूर्ण प्रावधान जोड़ा गया है, जिसके तहत अब कर्जदाताओं की समिति को आवेदकों के चयन के ठोस कारणों को लिखित रूप में दर्ज करना अनिवार्य होगा।
सीतारमण ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि आईबीसी का मूल उद्देश्य केवल कर्ज वसूली का जरिया बनना नहीं था, बल्कि संकटग्रस्त कंपनियों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करना था। उन्होंने कहा कि पहले की तुलना में अब कंपनियां दिवाला संबंधी मामलों के समाधान में कहीं अधिक बेहतर और पेशेवर तरीके से कार्य कर रही हैं, जो भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत है।



