
लखनऊ। उत्तर प्रदेश निर्वाचन आयोग ने शुक्रवार को राज्य की फाइनल वोटर लिस्ट 2026 आधिकारिक तौर पर जारी कर दी है। इस मतदाता सूची का प्रकाशन एक लंबी और जटिल ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) प्रक्रिया के बाद किया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य राज्य की चुनाव प्रणाली में पारदर्शिता और शुद्धता लाना था। इस बार की वोटर लिस्ट ने राजनीतिक गलियारों और आम जनता के बीच बड़ी हलचल पैदा कर दी है, क्योंकि साल 2024 की तुलना में इस बार उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची से कुल 2.06 करोड़ मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं।
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आयोग ने साझा किए आंकड़े
यह बड़ी कटौती मुख्य रूप से उन वोटरों की हुई है, जो या तो अब इस दुनिया में नहीं हैं या फिर वे स्थायी रूप से किसी अन्य स्थान पर विस्थापित हो चुके हैं। इसके साथ ही एक ही मतदाता के कई स्थानों पर नाम दर्ज होने यानी डुप्लीकेट वोटर्स जैसी विसंगतियों को भी इस अभियान के तहत पूरी तरह साफ किया गया है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश में कुल पंजीकृत मतदाताओं की संख्या 13,39,84,792 रह गई है, जो आगामी लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के लिए निर्णायक होंगे।

निर्वाचन आयोग की तरफ से लखनऊ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस व्यापक बदलाव के आंकड़ों को साझा किया गया। आंकड़ों के विश्लेषण से यह स्पष्ट होता है कि, उत्तर प्रदेश की कुल मतदाता आबादी में पुरुषों की हिस्सेदारी 54.54 प्रतिशत है, जिनकी संख्या 7,30,71,061 है। वहीं, महिला मतदाताओं की संख्या 6,09,09,525 दर्ज की गई है, जो कुल मतदाताओं का 45.46 प्रतिशत है।
इस पुनरीक्षण अभियान का एक चिंताजनक पहलू यह रहा कि, पुरुषों के मुकाबले महिलाओं के नाम वोटर लिस्ट से अधिक कटे हैं, जिसके कारण राज्य का लिंग अनुपात घटकर अब 834 पर आ गया है। हालांकि, कुछ प्रमुख शहरों में मतदाताओं की जागरूकता के कारण नए नामों में बढ़ोतरी भी देखी गई है। गाजियाबाद में 2.43 लाख, लखनऊ में 2.85 लाख और प्रयागराज में 3.29 लाख नए मतदाता जोड़े गए हैं, जिससे इन शहरी क्षेत्रों की मतदाता शक्ति में इजाफा हुआ है।
12 लाख से अधिक मतदाता लिस्ट से बाहर हुए
राजधानी लखनऊ की स्थिति इस पुनरीक्षण अभियान में विशेष रूप से चर्चा का विषय बनी रही। जिले में नवंबर से शुरू हुए एसआईआर अभियान के दौरान लगभग 12 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम सूची से बाहर कर दिए गए। यह कदम उन वोटरों को फिल्टर करने के लिए उठाया गया था जो सालों से सूची में तो थे लेकिन वास्तविक रूप से वहां मौजूद नहीं थे। इसके बाद चलाए गए विशेष अभियान के जरिए लगभग 2.90 लाख नए और पात्र मतदाताओं को जोड़ने की कवायद की गई।
इसी तरह बाराबंकी और अन्य जिलों में भी राजनीतिक दलों के आरोपों और प्रत्यारोपों के बीच गहन सुनवाई हुई, जिसके बाद अंतिम सूची को अंतिम रूप दिया गया। आयोग ने स्पष्ट किया है कि, यह शुद्धिकरण प्रक्रिया लोकतंत्र की मजबूती के लिए अनिवार्य थी ताकि मतदान के समय केवल वास्तविक और पात्र नागरिक ही अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें। आम नागरिकों के लिए निर्वाचन आयोग ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर नाम चेक करने के लिए तीन बेहद सरल और डिजिटल विकल्प उपलब्ध कराए हैं।
ऐसे चेक करें नाम
पहला तरीका सर्च बाय एपिक नंबर है। यदि आपके पास आपका पुराना मतदाता पहचान पत्र है, तो उस पर दर्ज एपिक नंबर को पोर्टल पर डालकर आप तुरंत यह जान सकते हैं कि, आपका नाम इस नई सूची में बरकरार है या नहीं।
दूसरा तरीका उन लोगों के लिए सबसे आसान है जिनका मोबाइल नंबर निर्वाचन आयोग के रिकॉर्ड में दर्ज है। वे सर्च बाय मोबाइल विकल्प चुनकर ओटीपी के माध्यम से अपनी पूरी डिटेल प्राप्त कर सकते हैं।
तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण तरीका सर्च बाय डिटेल्स का है। इसमें यदि आपके पास एपिक नंबर या पंजीकृत मोबाइल नहीं है, तो आप अपना नाम, पिता का नाम, जन्मतिथि और अपने जिला व विधानसभा क्षेत्र का विवरण भरकर अपना नाम खोज सकते हैं।
नाम न होने पर फार्म 6 भरे
यदि किसी नागरिक को यह पता चलता है कि, उसका नाम इस फाइनल लिस्ट में शामिल नहीं है, तो उसे घबराने या निराश होने की आवश्यकता नहीं है। निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट रूप से कहा है कि, फाइनल लिस्ट जारी होने का मतलब यह कतई नहीं है कि अब नए नाम नहीं जुड़ेंगे, जिन पात्र नागरिकों के नाम सूची से गायब हैं, वे तत्काल फॉर्म 6 भरकर आवेदन कर सकते हैं।
यह आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से उपलब्ध है। डिजिटल इंडिया की दिशा में कदम बढ़ाते हुए आयोग ने voters.eci.gov.in पोर्टल पर ‘New Voter Registration’ का विशेष कॉलम बनाया है, जहां घर बैठे ही पंजीकरण किया जा सकता है। इसके अलावा, जो लोग पूरी विधानसभा की मतदाता सूची का अध्ययन करना चाहते हैं, वे आयोग के डाउनलोड सेक्शन में जाकर अपने क्षेत्र की पीडीएफ फाइल भी हासिल कर सकते हैं।
निर्वाचन आयोग की इस एसआईआर प्रक्रिया के पीछे के तकनीकी कारणों पर नजर डालें तो पता चलता है कि, आयोग ने साल 2003 के डेटा मैपिंग और तार्किक विसंगतियों के आधार पर लाखों लोगों को नोटिस जारी किए थे, जिन लोगों ने समय रहते अपने दस्तावेजों की कमी को पूरा नहीं किया या जो नोटिस का जवाब देने में असमर्थ रहे, उनके नाम नियमानुसार सूची से हटा दिए गए हैं।
फर्जी मतदान पर रोक लगाने की कोशिश
आयोग ने यह सुनिश्चित किया है कि आगामी चुनावों में फर्जी मतदान की कोई गुंजाइश न रहे। शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के सभी मतदान केंद्रों और बूथों पर इस नई सूची का सार्वजनिक प्रदर्शन किया गया है। साथ ही, जिला निर्वाचन अधिकारियों ने सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के साथ बैठकें की हैं ताकि उन्हें इस व्यापक बदलाव की जानकारी दी जा सके और वे भी अपनी स्तर पर मतदाताओं को जागरूक कर सकें। यह नई मतदाता सूची उत्तर प्रदेश की राजनीतिक दिशा तय करने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
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