
बरसात के मौसम में होने वाले यूरिन इंफेक्शन यानी यूटीआई की समस्या को सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यही लापरवाही आगे चलकर सेहत के लिए नुकसानदायक साबित होती है। शुरुआत में यह समस्या केवल पेशाब करते समय हल्की जलन, बार-बार पेशाब आने की इच्छा या पेट के निचले हिस्से में मामूली दर्द जैसी दिखाई देती है, लेकिन अगर समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए और उचित इलाज न कराया जाए, तो ये किडनी तक को अपनी चपेट में ले लेता है। खासतौर पर कम उम्र की लड़कियों और छोटी बच्चियों के मामले में अगर देखरेख और सफाई पर ध्यान न दिया जाए, तो स्थिति और भी ज्यादा गंभीर हो सकती है।
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नमी की वजह से होता है संक्रमण
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि, महिलाएं और लड़कियां अक्सर कुछ ऐसी सामान्य गलतियां करती हैं, जो इस संक्रमण को बढ़ावा देती हैं। जैसे लंबे समय तक गीले कपड़े पहने रहना, पर्याप्त मात्रा में पानी न पीना और स्वच्छता संबंधी अन्य छोटी-छोटी लापरवाहियां।

बारिश के मौसम में वातावरण में नमी का स्तर स्वाभाविक रूप से बढ़ जाता है। ऐसे में इस तरह की लापरवाही बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकती है। आइए विस्तार से जानते हैं, कि, आखिर यूटीआई होने के पीछे मुख्य वजहें क्या हैं और इससे बचाव के कौन-कौन से तरीके अपनाए जा सकते हैं।
ये हैं लक्षण
हेल्थ एक्सपर्ट्स बताते हैं कि, मानसून के दौरान लंबे समय तक गीले कपड़ों में रहना, शरीर में पानी की कमी और बारिश में भीगने के बाद उचित साफ-सफाई का ध्यान न रखना ये सब बैक्टीरिया के पनपने की मुख्य वजह बनते हैं। इसी वजह से इस मौसम में संक्रमण तेजी से फैलने की आशंका बढ़ जाती है।
डॉक्टर कहते हैं कि, अगर किसी मरीज को तेज बुखार आए, ठंड लगे, कमर या पीठ के एक तरफ तीव्र दर्द महसूस हो, उल्टी की समस्या हो या फिर अत्यधिक कमजोरी महसूस हो, तो यह इस बात का गंभीर संकेत हो सकता है कि, संक्रमण अब किडनी तक पहुंच चुका है। ऐसी स्थिति में बिल्कुल भी देरी नहीं करनी चाहिए, तत्काल डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
डॉक्टर सही समय पर यूरिन रूटीन टेस्ट और यूरिन कल्चर जैसी जांचें करवाकर संक्रमण की सही पहचान करते हैं और उसी आधार पर उपयुक्त एंटीबायोटिक दवा दी जाती है। राहत की बात यह है कि, अगर शुरुआत में ही इस पर ध्यान दे दिया जाता है, तो अधिकांश यूटीआई मामलों का इलाज आसानी से किया जा सकता है और आगे चलकर होने वाली गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।
बरसात में क्यों बढ़ जाते हैं मामले
चिकित्सक कहते हैं कि, महिलाओं में यूरिन इंफेक्शन होने की मुख्य वजह सिर्फ बारिश नहीं होती, बल्कि इस मौसम के दौरान अपनाई जाने वाली कुछ सामान्य आदतें और परिस्थितियां इसके लिए ज्यादा जिम्मेदार होती हैं। ज्यादा नमी, पसीना आना, लंबे समय तक गीले कपड़े पहने रहना, कम पानी पीना और व्यक्तिगत स्वच्छता का ठीक से ध्यान न रखना, ये सभी कारक मिलकर बैक्टीरिया को बढ़ने का पूरा मौका देते हैं।
बारिश के मौसम में कई लोगों को स्वाभाविक रूप से प्यास कम लगती है, जिसके चलते वे पानी भी कम मात्रा में पीते हैं। पानी कम पीने से पेशाब भी कम मात्रा में बनता है। इस वजह से बैक्टीरिया आसानी से यूरिनरी ट्रैक्ट में टिके रह जाते हैं और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
यूटीआई के लक्षण और इलाज
यूरिन इंफेक्शन की शुरुआत में आमतौर पर पेशाब करते समय जलन महसूस होना, बार-बार पेशाब लगने की इच्छा होना, पेशाब में बदबू आना, पेशाब का रंग धुंधला हो जाना या कभी-कभी पेशाब में खून आने जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। अगर इन शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर दिया जाए, तो आगे चलकर तेज बुखार, ठंड लगना, कमर में तेज दर्द, मतली या उल्टी जैसी अधिक गंभीर समस्याएं भी सामने आ सकती हैं।

हेल्थ एक्सपर्ट्स बताते हैं कि, गर्भवती महिलाओं, डायबिटीज के मरीजों, बुजुर्गों और उन लोगों को इस मामले में विशेष रूप से सतर्क रहना चाहिए, जिनकी इम्यूनिटी पहले से ही कमजोर है, क्योंकि इन वर्गों में संक्रमण के गंभीर रूप लेने की आशंका अपेक्षाकृत अधिक होती है। समय पर उचित जांच करवाना, डॉक्टर की सलाह अनुसार सही एंटीबायोटिक दवा लेना और पर्याप्त मात्रा में पानी पीना, ये तीनों ही उपाय संक्रमण को गंभीर रूप लेने से रोकने में काफी कारगर साबित होते हैं।
किडनी तक पहुंचने का खतरा
डॉक्टर्स का कहना है कि, अक्सर लोग यह सोचकर लापरवाही बरत लेते हैं कि, यूरिन इंफेक्शन अपने आप ठीक हो जाएगा, लेकिन कई मामलों में यही सोच और लापरवाही संक्रमण को धीरे-धीरे किडनी तक पहुंचा देती है, जिससे स्थिति काफी गंभीर हो सकती है।
डॉक्टर कहते हैं, मानसून का मौसम सीधे तौर पर यूटीआई की वजह नहीं बनता, लेकिन इस मौसम में मौजूद अतिरिक्त नमी, गर्माहट और लोगों की कुछ रोजमर्रा की आदतें मिलकर संक्रमण के खतरे को काफी हद तक बढ़ा देती हैं।
उनके अनुसार, अधिकांश यूरिन इंफेक्शन के मामलों के लिए ई. कोलाई नामक बैक्टीरिया जिम्मेदार होता है, जो अनुकूल परिस्थितियां मिलते ही तेजी से बढ़ने लगता है। इसलिए इस मौसम में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना, पर्याप्त पानी पीना और शुरुआती लक्षण दिखते ही डॉक्टर से संपर्क करना, यही यूटीआई से बचाव और समय पर इलाज का सबसे कारगर तरीका है।
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