साहित्य भूषण सम्मान से नवाजे गए डॉ. जितेन ठाकुर, सीएम धामी का ऐलान बनाएंगे दो ‘साहित्य ग्राम’

 देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून स्थित मुख्यमंत्री आवास का मुख्य सेवक सदन सोमवार को शब्दों की साधना और रचनात्मक ऊर्जा का साक्षी बना। दरअसल, आज यहां उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान समारोह-2025 का आयोजन किया गया कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश की उन महान साहित्यिक विभूतियों को सम्मानित किया, जिन्होंने अपनी लेखनी से देवभूमि की संस्कृति, लोक भाषाओं और सामाजिक चेतना को सींचने का काम किया है।

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लेखकों को मिलेगा आधुनिक मंच

CM Dhami

समारोह की सबसे अहम बात रही मुख्यमंत्री द्वारा की गई वह ऐतिहासिक घोषणा रही, जिसमें उन्होंने प्रदेश में दो ‘साहित्य ग्राम’ स्थापित करने का ऐलान किया। यह कदम न केवल लेखकों को एक आधुनिक मंच प्रदान करेगा, बल्कि उत्तराखंड को साहित्यिक पर्यटन के वैश्विक फलक पर एक नई पहचान दिलाएगा। हिमालय की कंदराओं से निकली ज्ञान की इस रश्मि ने आज स्पष्ट कर दिया कि उत्तराखंड की पहचान सिर्फ उसके प्राकृतिक सौंदर्य से नहीं, बल्कि उसकी बौद्धिक संपदा से भी है।

समारोह का मुख्य आकर्षण वह पल रहा जब साहित्य के क्षेत्र में अपने असाधारण योगदान के लिए डॉ. जितेन ठाकुर को राज्य के सर्वोच्च ‘उत्तराखंड साहित्य भूषण सम्मान’ से विभूषित किया गया। मुख्यमंत्री धामी ने उन्हें शाल ओढ़ाकर और स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। इसके साथ ही, उन वरिष्ठ साहित्यकारों को भी नमन किया गया, जिन्होंने दशकों से अपनी लेखनी के माध्यम से समाज का मार्गदर्शन किया है।

साहित्यिक सेवा की लंबी और गौरवशाली पारी खेलने वाले डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र, श्याम सिंह कुटौला, डॉ. प्रीतम सिंह, केसर सिंह राय और अताए साबिर अफजल मंगलौरी को दीर्घकालीन उत्कृष्ट साहित्य सृजन पुरस्कार से नवाजा गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि, इन साहित्यकारों का अनुभव और उनका सृजन आने वाली पीढ़ियों के लिए पाथेय का काम करेगा।

पेश की उत्तराखंड के भविष्य का रोडमैप

समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड के भविष्य के लिए एक बड़ा रोडमैप पेश किया। उन्होंने घोषणा की कि, प्रदेश के दो अलग-अलग हिस्सों में आधुनिक सुविधाओं से लैस साहित्य ग्राम स्थापित किए जाएंगे। ये गांव लेखकों, कवियों और शोधकर्ताओं के लिए एक ऐसा केंद्र होंगे जहां वे प्रकृति की गोद में बैठकर बिना किसी व्यवधान के अपनी रचनाओं को आकार दे सकेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा, आज दुनिया साहित्यिक पर्यटन की ओर बढ़ रही है। लोग उन जगहों को देखना चाहते हैं जहां महान रचनाओं का जन्म हुआ। सुमित्रानंदन पंत की कौसानी हो या शिवानी जी की कर्मभूमि, उत्तराखंड ने हमेशा से सृजन को प्रेरित किया है। ये साहित्य ग्राम हमारी सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के साथ-साथ युवाओं को लेखन के प्रति आकर्षित करेंगे।

नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और अपनी मिट्टी की खुशबू से जोड़ने के लिए सीएम धामी ने डिजिटल क्रांति का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सरकार अब डिजिटल प्लेटफॉर्म और युवा कलमकार प्रतियोगिताओं के जरिए स्थानीय भाषाओं गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी के संरक्षण पर विशेष ध्यान दे रही है। मुख्यमंत्री ने चिंता व्यक्त की, कि यदि हम अपनी बोलियों को भूल गए, तो हम अपनी पहचान खो देंगे। उन्होंने साहित्यकारों से आग्रह किया कि, वे अपनी रचनाओं में स्थानीय मुहावरों और लोक गाथाओं को प्रमुखता दें, ताकि लुप्त होती बोलियों को नया जीवन मिल सके।

महिला लेखन को प्रोत्साहन

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समारोह में विविधता का सम्मान करते हुए महिला लेखन को विशेष प्रोत्साहन दिया गया। प्रो. दिवा भट्ट को ‘साहित्य नारी वंदन सम्मान’ से नवाजा गया, जो राज्य की महिला लेखिकाओं के संघर्ष और उनकी रचनात्मकता का सम्मान है। बाल साहित्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए प्रो. दिनेश चमोला को सम्मानित किया गया। वहीं, मौलिक रचनाओं के लिए डॉ. भूपेंद्र बिष्ट, डॉ. सुधा जुगरान और शीशपाल गुसाई को गौरव मिला। लोक भाषाओं के क्षेत्र में तारा पाठक, हेमंत सिंह बिष्ट और गजेंद्र नौटियाल के योगदान को सराहा गया।

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री धामी ने साहित्य की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा, साहित्य समाज का दर्पण होता है, लेकिन एक साहित्यकार केवल शब्दों की रचना नहीं करता, बल्कि वह समाज को दिशा दिखाने वाला मशालची होता है। उन्होंने सुमित्रानंदन पंत, गौरा पंत ‘शिवानी’ और शैलेश मटियानी जैसी महान विभूतियों का स्मरण करते हुए कहा कि राज्य आंदोलन से लेकर स्वतंत्रता संग्राम तक, कवियों की कविताओं और लेखकों के लेखों ने जनमानस में क्रांति की ज्वाला जगाई थी।

 प्रकाशन के लिए अनुदान भी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पंच प्रण के विजन का उल्लेख करते हुए धामी ने कहा कि, आज भारत अपनी सांस्कृतिक जड़ों की ओर लौट रहा है। उत्तराखंड भाषा संस्थान के माध्यम से सरकार अब बिखरी हुई साहित्यिक धरोहरों को संकलित करने का काम कर रही है। सरकार लेखकों को उनके ग्रंथों के प्रकाशन हेतु आर्थिक अनुदान भी दे रही है ताकि धन के अभाव में कोई उत्कृष्ट कृति अप्रकाशित न रह जाए।

समारोह के अंत में कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि साहित्यकारों का सम्मान करना दरअसल राज्य की आत्मा का सम्मान करना है। कार्यक्रम में विधायक खजान दास, सविता कपूर सहित भारी संख्या में प्रबुद्ध नागरिक और साहित्यकार उपस्थित रहे, जिन्होंने इस पहल को उत्तराखंड के सांस्कृतिक इतिहास का एक स्वर्णिम अध्याय बताया।

 

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