पीठ दर्द को न करें नजरअंदाज, किडनी की बीमारी का भी हो सकता है संकेत, जानें लक्षण और बचाव के तरीके

आधुनिक जीवनशैली में पीठ दर्द आम समस्या बन गया है, जिसे अक्सर हम घंटों बैठकर काम करने की वजह से हो रही थकान, गलत पोश्चर बैठने या भारी सामान उठाने का परिणाम मानकर इग्नोर कर देते हैं। साथ ही दर्द को दबाने के लिए पेनकिलर या बाम का सहारा लेते हैं, लेकिन डॉक्टर्स के नजरिए से देखें तो ये एक बड़ी लापरवाही है जो हम पर भारी पड़ सकती है।

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अस्पष्ट होते हैं शुरुआती लक्षण

हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि, लगातार बना रहने वाला पीठ दर्द केवल मांसपेशियों की अकड़न नहीं, बल्कि शरीर के भीतर गुर्दे यानी किडनी में पनप रही किसी गंभीर समस्या का शुरुआती संकेत हो सकता है। यह समझना बेहद जरूरी है कि कब एक साधारण सा दिखने वाला दर्द आपके महत्वपूर्ण अंगों की विफलता की ओर इशारा कर रहा है। किडनी की बीमारी अक्सर साइलेंट किलर की तरह व्यवहार करती हैं, जहां शुरुआती लक्षण इतने अस्पष्ट होते हैं कि, मरीज उन्हें रोजमर्रा की छोटी-मोटी तकलीफ समझकर छोड़ देता है, जबकि शरीर अंदर ही अंदर बड़ी चुनौतियों से जूझ रहा होता है।

back pain

पीठ दर्द और किडनी के दर्द के बीच के सूक्ष्म अंतर को समझना पहचान की पहली सीढ़ी है। मेडिकल एक्सपर्ट्स का मानना है कि, हर तरह का बैक पेन एक जैसा नहीं होता और इनकी प्रकृति ही बीमारी की जड़ तक पहुंचने का रास्ता बताती है। मांसपेशियों से जुड़ा दर्द आमतौर पर शारीरिक गतिविधि या मूवमेंट के साथ घटता-बढ़ता है। यदि आप झुकते हैं, चलते हैं या कोई स्ट्रेचिंग करते हैं और दर्द में बदलाव महसूस होता है, तो इसकी संभावना अधिक है कि समस्या मस्कुलोस्केलेटल है।

मसल्स की समस्या मानकर न करें नजरंदाज

ऐसे मामलों में आराम करने, गर्म सिकाई करने या मालिश से त्वरित राहत मिल जाती है। इसके विपरीत, किडनी से जुड़ा दर्द शरीर की गहराई में महसूस होता है। यह दर्द अक्सर पसलियों के ठीक नीचे, पीठ के ऊपरी या मध्य भाग के बजाय किनारों यानी फ्लैंक्स में होता है। किडनी का दर्द शारीरिक हलचल से ज्यादा प्रभावित नहीं होता और सबसे चिंताजनक बात यह है कि, यह आराम करने या लेटने पर भी कम नहीं होता। यह एक गहरा और लगातार बना रहने वाला दर्द है जो कभी-कभी पेट के निचले हिस्से या जांघों की ओर भी जा सकता है।

हेल्थ विशेषज्ञ कहते हैं कि, अक्सर मरीज बैक पेन को मसल्स की समस्या मानकर तब तक नजरअंदाज करते रहते हैं जब तक कि स्थिति गंभीर न हो जाए। उनके अनुसार, जब किडनी में पथरी, संक्रमण या सूजन जैसी स्थिति होती है, तो शरीर जो संकेत देता है वह मांसपेशियों के खिंचाव से बिल्कुल अलग होता है। किडनी का दर्द धीरे-धीरे शुरू हो सकता है, लेकिन इसका व्यवहार स्थिर रहता है। यह मांसपेशियों के दर्द की तरह किसी विशेष झटके या गलत पोश्चर से पैदा नहीं होता, बल्कि यह अंग के भीतर बढ़ रहे दबाव या टॉक्सिन्स के संचय का परिणाम होता है। डॉक्टरों का कहना है कि, जब तक लोग इस अंतर को समझते हैं, तब तक अक्सर बीमारी दूसरे या तीसरे स्टेज में पहुंच चुकी होती है।

पेशाब के पैटर्न में बदलाव, खतरे की घंटी

किडनी की समस्याओं की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि, ये शुरुआत में किसी बड़े धमाके के साथ नहीं आतीं। यह धीरे-धीरे बढ़ती हैं और सामान्य परेशानियों के पीछे खुद को छिपा लेती हैं। शरीर के अन्य अंगों पर दिखने वाले प्रभाव भी किडनी की सेहत का हाल बयां करते हैं। उदाहरण के लिए, यदि पीठ दर्द के साथ-साथ आपको अपने पेशाब के पैटर्न में बदलाव महसूस हो रहा है, तो यह खतरे की घंटी है।

पेशाब करते समय जलन होना, पेशाब का रंग सामान्य से अधिक गहरा या मटमैला होना और पेशाब में अत्यधिक झाग आना इस बात का प्रमाण है कि, किडनी प्रोटीन को सही ढंग से फिल्टर नहीं कर पा रही है। इसके अलावा, सुबह सोकर उठने पर आंखों के नीचे सूजन या दिन ढलते-ढलते पैरों और टखनों में आने वाली हल्की सूजन भी यह बताती है कि शरीर से तरल पदार्थों का निकास सही तरीके से नहीं हो रहा है। लगातार रहने वाली थकान, जी मिचलाना या शरीर में भारीपन महसूस होना भी किडनी की कार्यक्षमता में गिरावट के लक्षण हो सकते हैं।

बिना सलाह, न लें पेन किलर

एक्सपर्ट्स का कहना है कि, हमारी दैनिक आदतें भी किडनी के स्वास्थ्य को सीधे तौर पर प्रभावित करती हैं। जैसे कि, पर्याप्त मात्रा में पानी न पीना, अत्यधिक नमक का सेवन और बिना डॉक्टरी सलाह के बार-बार पेनकिलर्स लेना किडनी के लिए घातक साबित होता है। अक्सर लोग पीठ दर्द होने पर खुद ही दवा की दुकान से पेनकिलर खरीदकर खा लेते हैं, जो किडनी पर अतिरिक्त दबाव डालती है और समस्या को और बिगाड़ सकती है।

डॉक्टरों का सुझाव है कि, यदि पीठ दर्द दो हफ्ते से अधिक समय तक बना रहे और वह आराम करने से ठीक न हो रहा हो, तो उसे केवल मांसपेशियों का दर्द मानकर छोड़ना नहीं चाहिए। एक साधारण अल्ट्रासाउंड या यूरिन टेस्ट यह स्पष्ट कर सकता है कि, समस्या मांसपेशियों में है या शरीर के भीतर मौजूद उन दो महत्वपूर्ण अंगों में जो हमारे रक्त को साफ करने का काम करते हैं।

 

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