डोनाल्ड ट्रंप का सनसनीखेज बयान, ईरान की परमाणु क्षमता नष्ट, अब समझौते की मेज पर आया तेहरान

वाशिंगटन। मध्य पूर्व की भू-राजनीति में एक ऐसा अभूतपूर्व भूचाल आ गया है, जिसने पूरी दुनिया के राजनयिकों और सैन्य विशेषज्ञों को गहरी सोच में डाल दिया है। संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सनसनीखेज दावा किया है। उन्होंने कहा है कि, ईरान के साथ जारी संघर्ष अब अपने निर्णायक पड़ाव पर पहुंच चुका है और दोनों देश एक बेहद ऐतिहासिक और व्यापक डील की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं।

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ईरान के बयान पर टिकी निगाहें

ट्रंप का यह बयान ऐसे समय पर आया है जब खाड़ी क्षेत्र में युद्ध के बादल मंडरा रहे थे, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति के कड़े शब्दों ने यह साफ कर दिया है कि, भारी सैन्य दबाव के बाद अब कूटनीति का नया दौर शुरू हो चुका है। राष्ट्रपति ने न केवल भविष्य के समझौते की बात की बल्कि ईरान की वर्तमान सैन्य स्थिति पर जो तीखी टिप्पणी की है उसने वैश्विक रक्षा गलियारों में खलबली मचा दी है क्योंकि उनका मानना है कि ईरान सैन्य रूप से पूरी तरह परास्त हो चुका है और उसकी परमाणु महत्वाकांक्षाओं को अमेरिका ने हमेशा के लिए नेस्तनाबूद कर दिया है। इस बड़ी खबर के बाद से इजरायल से लेकर सऊदी अरब और तमाम यूरोपीय देशों की नजरें अब व्हाइट हाउस और तेहरान के अगले आधिकारिक कदम पर टिकी हैं क्योंकि यह समझौता पूरी दुनिया का नक्शा बदल सकता है।

Donald Trump

व्हाइट हाउस में पत्रकारों को संबोधित करते हुए ट्रंप अपने चिर-परिचित आक्रामक अंदाज में नजर आए। उन्होंने सीधे तौर पर ऐलान किया कि, अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य रूप से पूर्ण विजय प्राप्त कर ली है। उन्होंने विस्तार से अपनी बात रखते हुए कहा कि, ईरान की नौसेना और वायुसेना के साथ-साथ उनकी पूरी संचार व्यवस्था अब लगभग जमींदोज हो चुकी है और उनके पास जो कुछ भी उन्नत सैन्य साजो-सामान था वह अमेरिकी हमलों और निरंतर दबाव के आगे टिक नहीं सका।

खत्म हुई ईरान की सैन्य क्षमता

ट्रंप ने स्पष्ट किया कि, ईरान के पास अब प्रतिरोध करने के लिए कुछ भी शेष नहीं बचा है और सैन्य रूप से वे पूरी तरह खत्म हो चुके हैं, जिसके कारण अब वे समझौते की मेज पर आने के लिए मजबूर हुए हैं। राष्ट्रपति के इस दावे ने यह संकेत दिया है कि, अमेरिका ने पिछले कुछ समय में गुप्त और घोषित दोनों रूपों में ईरान की सैन्य रीढ़ पर ऐसे घातक वार किए हैं, जिससे तेहरान अब किसी भी प्रकार का संघर्ष जारी रखने की स्थिति में नहीं रह गया है।

इस पूरी प्रेस कॉन्फ्रेंस का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र बिंदु ईरान का परमाणु कार्यक्रम रहा जिस पर ट्रंप ने दावा किया कि, उनकी सरकार ने ईरान की परमाणु क्षमता को इस हद तक खत्म कर दिया है कि, वे अब भविष्य में कभी भी परमाणु हथियार नहीं बना पाएंगे। उन्होंने बराक ओबामा के कार्यकाल में हुई पुरानी परमाणु डील पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर उन्होंने अपने पहले कार्यकाल में उस समझौते को खत्म न किया होता तो ईरान के पास कई साल पहले ही परमाणु बम होता और वे उसका इस्तेमाल भी कर चुके होते।

राष्ट्रपति ने पूरी दृढ़ता के साथ कहा कि अब जो नई डील होने जा रही है उसमें ईरान इस बात पर आधिकारिक रूप से राजी हो गया है कि वह परमाणु हथियारों की दौड़ से हमेशा के लिए बाहर रहेगा। ट्रंप के अनुसार ईरान की सबसे बड़ी मजबूरी यह है कि उनके पास अब रक्षा का कोई प्रभावी तंत्र नहीं बचा है क्योंकि उनकी मिसाइलें और एंटी-एयरक्राफ्ट सिस्टम पूरी तरह नष्ट हो चुके हैं जिससे वे सुरक्षा के लिहाज से बिल्कुल लाचार हो गए हैं।

हमले के साथ खुला था कूटनीति का रास्ता

ट्रंप ने बातचीत के दौरान एक और चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि, अमेरिकी सेना ईरान के एक बहुत बड़े बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने के बेहद करीब थी, लेकिन बातचीत की प्रक्रिया को देखते हुए अंतिम समय में उसे टाल दिया गया। उन्होंने बताया कि अमेरिकी सेना दुनिया के सबसे बड़े इलेक्ट्रिक जेनरेशन प्लांट्स में से एक को मार गिराने का मौका देख रही थी जो ईरान की ऊर्जा व्यवस्था की कमर तोड़ देता पर इसे केवल इसलिए रोका गया क्योंकि दूसरी तरफ से बातचीत के सकारात्मक संकेत मिल रहे थे। यह खुलासा स्पष्ट करता है कि, अमेरिका इस समय अपनी ताकत का प्रदर्शन करते हुए ईरान को समझौते के लिए विवश कर रहा है, जहां एक तरफ विनाशकारी हमले की धमकी बरकरार है, तो दूसरी तरफ कूटनीति का रास्ता भी खुला रखा गया है।

Donald Trump

ईरान के साथ इस संभावित डील को अंजाम देने के लिए राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी सबसे भरोसेमंद और कद्दावर टीम को मैदान में उतारा है जिसमें उपराष्ट्रपति जेडी वैंस और विदेश नीति के जानकार मार्को रुबियो जैसे नाम शामिल हैं। इसके अलावा ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर और उनके करीबी सहयोगी स्टीव विटकॉफ भी इस संवेदनशील मिशन का हिस्सा हैं और खुद राष्ट्रपति इस पूरी प्रक्रिया की पल-पल की निगरानी कर रहे हैं।

तेल बाजार में आएगी स्थिरता

विशेषज्ञों का मानना है कि, इस टीम की संरचना यह दर्शाती है कि, यह समझौता केवल सैन्य स्तर तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि इसमें आर्थिक और क्षेत्रीय शांति के बड़े आयाम भी शामिल होंगे। अगर ट्रंप का यह दावा हकीकत में बदलता है और ईरान के साथ यह व्यापक समझौता हो जाता है तो यह इस सदी का सबसे बड़ा कूटनीतिक बदलाव होगा जो इजरायल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ वैश्विक तेल बाजार में भी स्थिरता लाएगा। फिलहाल पूरी दुनिया इस बात का इंतजार कर रही है कि तेहरान इस पर क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया देता है क्योंकि ट्रंप का संदेश बिल्कुल साफ है कि अमेरिका ने अपनी ताकत दिखा दी है और अब वह अपनी ही शर्तों पर क्षेत्र में शांति चाहता है।

 

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