हाथों में होने वाली झुनझुनी को न करें नजरअंदाज, हो सकती है इन गभीर बीमारियों की वजह

क्या आपने कभी महसूस किया है कि, अचानक आपके हाथों में सुई चुभने जैसी झुनझुनी होने लगती है या हाथ पूरी तरह सुन्न पड़ जाता है? अक्सर हम इसे ‘हाथ सो जाना’ कहकर नजरअंदाज कर देते हैं और हाथ को थोड़ा हिला-डुलाकर वापस अपने काम में लग जाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि, यह मामूली सी दिखने वाली झुनझुनी आपके शरीर के भीतर पनप रही किसी बड़ी स्वास्थ्य समस्या का शुरुआती अलार्म हो सकती है?

इसे भी पढ़ें-  माइग्रेन के दर्द से रहते हैं परेशान तो इन घरेलू नुस्खों को अपनाएं, मिलेगा आराम

चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि, हाथों का सुन्न होना या बार-बार झुनझुनी महसूस होना केवल गलत पोजीशन में बैठने या सोने का नतीजा नहीं है, बल्कि यह नसों की कमजोरी, विटामिन की भारी कमी या डायबिटीज जैसी गंभीर स्थितियों का संकेत भी हो सकता है।

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और डेस्क जॉब की बढ़ती संस्कृति के बीच, हाथों और कलाई से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। ‘द हार्टी सोल’ की एक हालिया रिपोर्ट और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के विश्लेषण के अनुसार, झुनझुनी के पीछे के कारणों को समझना बेहद जरूरी है, क्योंकि सही समय पर पहचान न होने पर यह नसों को स्थायी नुकसान पहुंचा सकता है।

प्राथमिक तौर पर झुनझुनी या सुन्नपन तब महसूस होता है, जब शरीर के किसी हिस्से की नसों पर दबाव पड़ता है या उस हिस्से में रक्त का प्रवाह अस्थायी रूप से बाधित हो जाता है। उदाहरण के लिए, यदि आप अपने हाथ पर सिर रखकर सो जाते हैं, तो नसों पर पड़ने वाला दबाव मस्तिष्क तक जाने वाले संकेतों को धीमा कर देता है। जैसे ही दबाव हटता है, नसें फिर से सक्रिय होती हैं और हमें झुनझुनी महसूस होती है, लेकिन, यदि यह समस्या बिना किसी बाहरी दबाव के बार-बार हो रही है, तो यह संकेत है कि समस्या शरीर के आंतरिक तंत्र में है।

कार्पल टनल सिंड्रोम 

हाथों में झुनझुनी का सबसे प्रमुख और आम कारण ‘कार्पल टनल सिंड्रोम’ माना जाता है। हमारी कलाई में एक संकरी नली जैसी संरचना होती है जिसे कार्पल टनल कहते हैं। इसमें से मध्यिका नस गुजरती है। जब किसी कारणवश कलाई में सूजन आती है या नस दब जाती है, तो अंगूठे और शुरुआती तीन उंगलियों में तेज झुनझुनी, सुन्नपन और दर्द होने लगता है, जो लोग कंप्यूटर पर घंटों टाइपिंग करते हैं या हाथ से जुड़े बारीक काम करते हैं, उनमें यह समस्या सबसे ज्यादा देखी जाती है। कभी-कभी यह दबाव कलाई में न होकर कोहनी या गर्दन की नसों से भी जुड़ा हो सकता है, जिसका असर उंगलियों तक पहुंचता है।

डायबिटीज और नसों की कमजोरी  

डायबिटीज यानी मधुमेह एक ऐसी बीमारी है जो धीरे-धीरे शरीर के हर अंग को प्रभावित करती है। लंबे समय तक ब्लड शुगर लेवल बढ़ा रहने से शरीर की नसें क्षतिग्रस्त होने लगती हैं, जिसे मेडिकल भाषा में डायबिटिक न्यूरोपैथी कहा जाता है। इसकी शुरुआत अक्सर हाथों और पैरों में झुनझुनी, जलन या सुन्नपन से होती है। यदि आपको झुनझुनी के साथ-साथ हाथों में कमजोरी महसूस हो रही है या छोटी वस्तुएं पकड़ने में दिक्कत आ रही है, तो यह शुगर लेवल बढ़ने का एक बड़ा संकेत हो सकता है।

विटामिन B12 की कमी 

भारतीय संदर्भ में विटामिन B12 की कमी हाथों के सुन्न होने का एक बहुत बड़ा कारण बनकर उभरी है। विटामिन B12 हमारी नसों की सुरक्षात्मक परत के निर्माण के लिए अनिवार्य है। जब शरीर में इस विटामिन की कमी होती है, तो नसें कमजोर पड़ने लगती हैं और संदेशों का आदान-प्रदान ठीक से नहीं हो पाता। इसके कारण न केवल हाथों-पैरों में झुनझुनी होती है, बल्कि अत्यधिक थकान, याददाश्त में कमी और मानसिक सुस्ती भी महसूस हो सकती है। चूंकि B12 मुख्य रूप से मांसाहारी भोजन और डेयरी उत्पादों में पाया जाता है, इसलिए शाकाहारी लोगों में इसकी कमी होने की संभावना अधिक रहती है।

थायरॉयड और मेटाबॉलिज्म का कनेक्शन

हाथों में झुनझुनी की एक और  छिपी हुई वजह थायरॉयड हो सकती है। जब थायरॉयड ग्रंथि पर्याप्त हार्मोन का उत्पादन नहीं करती, तो शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ जाता है। इसके कारण शरीर के ऊतकों में तरल पदार्थ जमा होने लगता है, जो नसों पर दबाव डालता है। अक्सर थायरॉयड के मरीजों को कलाई में भारीपन और उंगलियों में सुन्नपन की शिकायत रहती है, जिसे वे अक्सर पहचान नहीं पाते।

खराब ब्लड सर्कुलेशन  

खराब रक्त संचार भी हाथों को सुन्न कर सकता है। विशेष रूप से ठंड के मौसम में या अचानक तापमान बदलने पर कुछ लोगों की उंगलियां सफेद या नीली पड़ने लगती हैं और उनमें झुनझुनी होती है। इसे ‘रेनॉड्स डिजीज’ कहा जाता है। इसमें धमनियां संकुचित हो जाती हैं, जिससे रक्त उंगलियों के पोरों तक नहीं पहुंच पाता। इसके अलावा, कंधे और गर्दन के बीच नसों या रक्त वाहिकाओं पर दबाव पड़ने से भी झुनझुनी हो सकती है, खासकर तब जब आप भारी वजन उठाते हैं या लंबे समय तक हाथ ऊपर रखते हैं।

स्ट्रोक हो सकता है

हाथों की झुनझुनी हमेशा धीमी गति से बढ़ने वाली समस्या नहीं होती। कुछ मामलों में यह एक मेडिकल इमरजेंसी का संकेत हो सकती है। यदि अचानक शरीर के एक तरफ का हाथ या पैर सुन्न हो जाए, चेहरे की मांसपेशियां लटकने लगें, बोलने में लड़खड़ाहट हो या तेज चक्कर आएं, तो यह ‘स्ट्रोक’ का लक्षण हो सकता है। ऐसी स्थिति में एक मिनट की देरी भी जानलेवा साबित हो सकती है और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

कैसे करें बचाव 

यदि आप बार-बार झुनझुनी महसूस कर रहे हैं, तो सबसे पहले अपनी लाइफस्टाइल का विश्लेषण करें। काम के बीच में छोटे ब्रेक लें और कलाइयों व गर्दन की स्ट्रेचिंग करें। अपने आहार में विटामिन B12, फोलेट और मैग्नीशियम युक्त खाद्य पदार्थों को शामिल करें। यदि समस्या एक हफ्ते से ज्यादा बनी रहती है, तो डॉक्टर से मिलकर नसों की जांच (NCV Test) और ब्लड टेस्ट जरूर करवाएं। याद रखें, शरीर का हर सुन्नपन केवल थकान नहीं होता, कभी-कभी यह एक बड़ी चेतावनी होती है जिसे समय रहते सुनना ही समझदारी है।

 

इसे भी पढ़ें- 50+ की उम्र में भी दिखना है जवान और फिट, तो डाइट में आज से ही शामिल करें ये 5 जरूरी विटामिन्स

Related Articles

Back to top button