बड़ी कामयाबी: दिल्ली मेट्रो ‘पोस्टर कांड’ का मास्टरमाइंड शब्बीर अहमद गिरफ्तार, ISI और बांग्लादेश कनेक्शन का खुलासा

नई दिल्ली।  भारत की सुरक्षा एजेंसियों को आतंकवाद के खिलाफ एक और बड़ी कामयाबी मिली है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक सनसनीखेज ऑपरेशन के तहत लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के खतरनाक आतंकी शब्बीर अहमद लोन को दबोच लिया है। शब्बीर  को ही हाल ही में दिल्ली मेट्रो और देश के अन्य हिस्सों में लगाए गए भारत विरोधी पोस्टरों के पीछे का असली मास्टरमाइंड बताया जा रहा है।

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यह गिरफ्तारी केवल एक आतंकी की पकड़ नहीं है, बल्कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के उस नए ब्लूप्रिंट का पर्दाफाश है, जो बांग्लादेश की धरती का इस्तेमाल कर भारत के खिलाफ पोस्टर वॉर और टेरर मॉड्यूल खड़ा करने की साजिश रच रहा था।

कई दिनों से तलाश में जुटी थी दिल्ली पुलिस

जानकारी के मुताबिक, दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल पिछले कई दिनों से मेट्रो पोस्टर केस के मुख्य हैंडलर की तलाश में जुटी थी। गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए सेल ने दिल्ली बॉर्डर के पास जाल बिछाया और लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी शब्बीर अहमद लोन को गिरफ्तार कर लिया। अधिकारियों के अनुसार, शब्बीर इस पूरे मॉड्यूल का कंट्रोल टावर था। वह इस माड्यूल के लिए न केवल रसद और फंडिंग का इंतजाम कर रहा था, बल्कि पकड़े गए अन्य आठ आरोपियों को सीधे निर्देश भी दे रहा था।

साजिश की शुरुआत 8 फरवरी को उस वक्त हुई थी, जब दिल्ली के अति-सुरक्षित इलाके जनपथ मेट्रो स्टेशन पर अचानक पाकिस्तान समर्थक और आतंकवाद समर्थक पोस्टर दिखाई देने लगे। इन पोस्टरों में न केवल आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के मारे गए कमांडर बुरहान वानी का महिमामंडन किया गया था, बल्कि भारत नरसंहार बंद करो और कश्मीर मुक्त कर जैसे भड़काऊ नारे लिखे गए थे। दिल्ली पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत एफआईआर दर्ज की और जांच स्पेशल सेल को सौंप दी।

बांग्लादेश कनेक्शन और ISI की नई चाल

जांच में जो सबसे चौंकाने वाला खुलासा हुआ, वह था इसका बांग्लादेश कनेक्शन। शब्बीर अहमद लोन सीधे तौर पर बांग्लादेश में बैठकर इस मॉड्यूल को ऑपरेट कर रहा था। जांच एजेंसियों के मुताबिक, ISI अब कश्मीर के बजाय अंतरराष्ट्रीय सीमाओं विशेषकर बांग्लादेश का उपयोग कर आतंकियों को भारत में घुसाने और स्लीपर सेल तैयार करने की रणनीति पर काम कर रही है।

इस मामले में पहले पकड़े गए 8 आरोपियों में से अधिकांश बांग्लादेशी नागरिक थे। ये आरोपी जाली भारतीय पहचान पत्रों के आधार पर अवैध रूप से सीमा पार कर भारत में दाखिल हुए थे। इनका मुख्य काम दिल्ली से लेकर कोलकाता तक भीड़भाड़ वाले इलाकों में भारत विरोधी माहौल बनाना और युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेलना था।

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि, इन पोस्टरों का उद्देश्य केवल कागज चिपकाना नहीं था, बल्कि यह एक साइकोलॉजिकल वॉरफेयर यानी मनोवैज्ञानिक युद्ध का हिस्सा था। बुरहान वानी की तस्वीरों का इस्तेमाल कर यह मॉड्यूल स्थानीय कश्मीरी युवाओं और देश के अन्य हिस्सों में मौजूद कट्टरपंथियों को एकजुट करने की कोशिश कर रहा था। शब्बीर अहमद लोन को जिम्मेदारी दी गई थी कि वह भारत के महानगरों में ऐसे छोटे-छोटे सेल बनाए जो भविष्य में बड़े आतंकी हमलों को अंजाम दे सकें।

पूछताछ में खुल सकते हैं और कई राज

वर्तमान में शब्बीर अहमद लोन स्पेशल सेल की हिरासत में है। सुरक्षा एजेंसियां उससे इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों और भविष्य की साजिशों के बारे में पूछताछ कर रही हैं। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि उसे फंडिंग के लिए हवाला के जरिए पैसे कहां से मिल रहे थे और दिल्ली में उसे छिपने के लिए किन लोगों ने मदद मुहैया कराई थी। उसका और आईएसआई का आगे का क्या प्लान है।

 

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