बंगाल-असम चुनाव ड्यूटी पर निकले CRPF जवानों ने रामलला के दरबार में टेका माथा

अयोध्या। राम की नगरी अयोध्या में रविवार को श्रद्धा और शक्ति का एक अद्भुत संगम देखने को मिला। दरअसल, यहां श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के बाहर सीआरपीएफ की बख्तरबंद गाड़ियों का एक विशाल रेला पहुंचा, जिसे देखकर स्थानीय लोग कुछ देर के लिए तो टेंशन में आ गए और जानने के लिए उत्सुक हो गये कि आखिर माजरा क्या है।

लोग टेढ़ी बाजार ओवर ब्रिज पर एक कतार में खड़ी लगभग सत्रह-अठारह बख्तरबंद गाड़ियों के वीडियो बनाने लगे, तस्वीरें खींचने लगे और एक-दूसरे से सवाल पूछने लगे कि, क्या हो गया गया। आइये हम आपको बताते हैं ये पूरा माजरा क्या था।

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रामलला के दर्शन को आए जवान

दरअसल, यह कोई सुरक्षा अभ्यास या आकस्मिक कार्रवाई नहीं थी, बल्कि यह सीआरपीएफ का वह जांबाज काफिला था, जो देश की आंतरिक सुरक्षा के मोर्चे से सीधे लोकतंत्र के सबसे बड़े उत्सव यानी विधानसभा चुनाव की जिम्मेदारी संभालने जा रहा था। जम्मू-कश्मीर की घाटियों में अपनी सेवाएं देने के बाद इन जवानों की तैनाती अब पश्चिम बंगाल और असम में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों के लिए की गई है।

Ayodhya

जम्मू-कश्मीर से लंबा सफर तय कर असम और पश्चिम बंगाल की ओर कूच कर रहा यह काफिला रविवार को जब अयोध्या से गुजरा, तो जवानों ने अपनी मंजिल पर पहुंचने से पहले मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के दर्शन करने का निर्णय लिया। जैसे ही यह काफिला टेढ़ी बाजार ओवर ब्रिज पर पहुंचा, तो सभी बख्तरबंद गाड़ियों को सड़क के किनारे सुरक्षित खड़ा कर दिया गया।

इसके बाद अपनी वर्दी और कर्तव्य के गौरव से लबरेज सीआरपीएफ के जवान गाड़ियों से उतरे और सीधे श्रीराम जन्मभूमि मंदिर की ओर चले गये। वहां पहुंचकर जवानों ने पूरी आस्था के साथ प्रभु राम की पूजा-अर्चना की और चुनाव जैसे चुनौतीपूर्ण कार्य को सफलतापूर्वक संपन्न करने के लिए भगवान का आशीर्वाद लिया।

चुनाव ड्यूटी पर जा रहा था CRPF काफिला

यह दृश्य न केवल जवानों की धार्मिक आस्था को दर्शाता है, बल्कि यह भी जाहिर करता है कि, एक सैनिक के लिए आत्मबल कितना महत्वपूर्ण है। कठिन ड्यूटी पर तैनात होने से पहले रामलला के चरणों में शीश झुकाना इन जवानों के लिए मानसिक संबल प्राप्त करने का एक जरिया बना।

आपको बता दें कि, देश में कहीं भी चुनाव होने पर निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी सीआरपीएफ के कंधों पर ही होती है। विधानसभा चुनावों के दौरान किसी भी प्रकार की हिंसा या गड़बड़ी को रोकने के लिए इन बलों की तैनाती अत्यंत संवेदनशील मानी जाती है।

चुनाव आयोग के निर्देशों के अनुसार ये जवान मतदान की तारीख से काफी पहले ही संबंधित केंद्रों पर पहुंच जाते हैं और पूरे इलाके को अपने सुरक्षा घेरे में ले लेते हैं। इसके बाद वे पोलिंग अधिकारियों और स्थानीय पुलिस प्रशासन के साथ तालमेल बिठाकर मतदाताओं को एक निडर वातावरण प्रदान करते हैं ताकि लोकतंत्र की बुनियाद सुरक्षित रहे। वर्तमान समय में पश्चिम बंगाल और असम में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हैं और चुनाव आयोग ने पूर्व में ही इन राज्यों के लिए चुनावी शंखनाद कर दिया था।

23 अप्रैल को होगा चुनाव

कार्यक्रम के अनुसार पश्चिम बंगाल की कुल दो सौ चौरानवे विधानसभा सीटों के लिए मतदान की प्रक्रिया दो चरणों में संपन्न कराई जाएगी। बंगाल की संवेदनशीलता को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं जिसके तहत पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल को और दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को होना सुनिश्चित है।

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इन दोनों ही चरणों के बाद मतों की गणना 4 मई को की जाएगी, जिससे यह तय होगा कि राज्य की कमान किसके हाथ में जाएगी। इसी कड़ी में असम राज्य की बात करें, तो वहां मतदान के लिए 9 अप्रैल की तारीख निर्धारित की गई है। असम में भी चुनावी नतीजों की घोषणा पश्चिम बंगाल के साथ ही 4 मई को की जाएगी।

अयोध्या की सड़कों पर खड़ी वे बख्तरबंद गाड़ियों और उनमें सवार जवानों का जज्बा यह साफ कर रहा था कि, वे चुनावी मोर्चे पर डटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। रामलला के दर्शन के उपरांत यह काफिला अपनी आगे की यात्रा के लिए रवाना हो गया। इस पूरी घटना ने न केवल अयोध्या के स्थानीय लोगों का ध्यान खींचा बल्कि यह संदेश भी दिया कि देश की सीमाओं और आंतरिक व्यवस्था की रक्षा करने वाले ये प्रहरी अपनी संस्कृति और जड़ों से कितने गहरे जुड़े हुए हैं।

 

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