अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर सीपीआर प्रशिक्षण, महिलाओं को सिखाए गए जीवन रक्षक उपाय

कार्यक्रम का शुभारंभ सुंदरम सेवा संस्थान की अध्यक्ष वंदना सिंह और डॉ. अंजू गोयल ने दीप प्रज्वलित कर किया।

लखनऊ। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर अयोध्या रोड स्थित गोयल सुपर स्पेशलिटी अस्पताल ने एपेक्स हॉस्पिटल के सहयोग से सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं को आपातकालीन स्वास्थ्य स्थितियों में प्राथमिक उपचार देने के लिए प्रशिक्षित करना था, ताकि वे परिवार और समाज में जीवन रक्षक की भूमिका निभा सकें।

कार्यक्रम का शुभारंभ सुंदरम सेवा संस्थान की अध्यक्ष वंदना सिंह और डॉ. अंजू गोयल ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि आज के समय में सीपीआर का ज्ञान हर व्यक्ति के लिए जरूरी है, विशेषकर महिलाओं के लिए। कई बार घर या आसपास किसी व्यक्ति को अचानक हृदयाघात या सांस रुकने जैसी गंभीर स्थिति का सामना करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में समय पर सही प्राथमिक उपचार मिल जाने से मरीज की जान बचाई जा सकती है।

उन्होंने बताया कि सीपीआर एक ऐसी तकनीक है, जिसके माध्यम से हृदय और फेफड़ों की क्रिया रुकने की स्थिति में मरीज को तुरंत सहायता दी जाती है। यदि किसी व्यक्ति को अचानक कार्डियक अरेस्ट हो जाए और तुरंत सीपीआर शुरू कर दिया जाए, तो उसके जीवित रहने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को सीपीआर की पूरी प्रक्रिया विस्तार से समझाई। प्रैक्टिकल सत्र में डमी के माध्यम से महिलाओं को यह सिखाया गया कि किस प्रकार हाथों की सही स्थिति रखनी है, छाती पर कितना और किस स्तर का दबाव देना है तथा कितनी गति से दबाव देना चाहिए। इसके साथ ही सांस रुकने की स्थिति में किस तरह से तत्काल प्रतिक्रिया देनी चाहिए, इसकी भी जानकारी दी गई।

कार्यक्रम में उपस्थित महिलाओं ने बड़े उत्साह के साथ प्रशिक्षण में भाग लिया और सीपीआर की तकनीकों को सीखने में गहरी रुचि दिखाई। प्रतिभागियों ने कहा कि इस तरह का प्रशिक्षण समाज के लिए बेहद उपयोगी है, क्योंकि आपात स्थिति में समय पर मदद मिलना किसी भी व्यक्ति के जीवन के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में गोयल आयुर्वेदिक कॉलेज, चंद्रा हॉस्पिटल, अवध नर्सिंग कॉलेज, निशात हॉस्पिटल और शेरवुड सहित आसपास के संस्थानों से आई दर्जनों महिलाओं ने भाग लिया। आयोजकों ने बताया कि भविष्य में भी इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक लोगों को जीवन रक्षक तकनीकों की जानकारी मिल सके और समाज में जागरूकता बढ़ाई जा सके।

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