काशी से सीएम योगी का कड़ा संदेश, फिल्मों में न करें अपराधियों का महिमामंडन, बिगड़ रहे युवा

वाराणसी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज वाराणसी के दौरे पर हैं। यहां उन्होंने काशी विश्वनाथ मन्दिर में पूजा अर्चना करने के बाद स्कूल चलो अभियान का आगाज किया। इसके साथ ही उन्होंने यहां चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य के गौरवशाली इतिहास पर आधारित एक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम को भी संबोधित किया।

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सही रोल मॉडल पेश करें

अपने संबोधन में सीएम ने फिल्म उद्योग और सिनेमा जगत के रचनाकारों को एक बेहद स्पष्ट और कड़ा संदेश देते हुए  फिल्मों के गिरते स्तर और समाज पर उनके नकारात्मक प्रभाव पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने फिल्म निर्माताओं और निर्देशकों से सीधे तौर पर आह्वान किया कि वे अपनी कला का उपयोग केवल मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि समाज को सकारात्मक दिशा देने और युवाओं के सामने सही रोल मॉडल पेश करने के लिए करें।

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह बयान ऐसे समय में आया है जब ओटीटी प्लेटफॉर्म और फिल्मों में हिंसा, अपराध और नकारात्मक किरदारों के महिमामंडन को लेकर देशव्यापी बहस छिड़ी हुई है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि, सिनेमा का काम केवल पैसा कमाना नहीं है, बल्कि एक स्वस्थ समाज की नींव रखना भी है। इस अवसर पर उनके साथ मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी मौजूद रहे, जिन्होंने उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बीच सांस्कृतिक सेतु को और मजबूत करने का संकल्प दोहराया।

फिल्म  जगत की कार्यशैली पर प्रहार

सम्राट विक्रमादित्य के जीवन पर आधारित एक भव्य नाट्य प्रस्तुति का अवलोकन करने के बाद जनसभा को संबोधित करते हुए योगी आदित्यनाथ ने फिल्म जगत की पुरानी कार्यशैली पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा, एक लंबा दौर ऐसा रहा जब भारतीय सिनेमा में नेक और ईमानदार किरदारों को कमजोर या खलनायक के रूप में दिखाया गया, जबकि असली खलनायकों को नायक बनाकर पेश किया गया। अपराधियों और माफियाओं का महिमामंडन करने वाली इन फिल्मों ने हमारी नई पीढ़ी को भ्रमित किया है।

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि, जब समाज के सामने गलत आदर्श रखे जाते हैं, तो उसका नतीजा बहुत भयानक होता है। उन्होंने दुख जताते हुए कहा, जब खलनायकों को फिल्मों के जरिए लार्जर दैन लाइफ’ दिखाया गया, तो इसका सीधा असर युवाओं की मानसिकता पर पड़ा। लोग अन्याय, उत्पीड़न और शोषण के खिलाफ अपनी आवाज खोने लगे थे, क्योंकि उन्हें लगने लगा था कि, अपराधी होना या नियमों को तोड़ना ही असल बहादुरी है। पीढ़ियां बिगड़ रही थीं क्योंकि उनके सामने सम्राट विक्रमादित्य या छत्रपति शिवाजी जैसे महापुरुषों के बजाय गलत लोगों को आदर्श बनाकर पेश किया जा रहा था।

 सांस्कृतिक गौरव को उतारें पर्दे पर

सिनेमा को समाज का दर्पण बताते हुए मुख्यमंत्री ने फिल्म निर्देशकों और निर्माताओं से एक विशेष आग्रह किया। उन्होंने कहा, मैं फिल्म जगत से जुड़े लोगों से कहना चाहता हूं कि, वे ऐसी फिल्में बनाएं जो मौजूदा पीढ़ी को प्रेरित कर सकें। हमारे पास इतिहास के ऐसे गौरवशाली पन्ने हैं, जिन पर हजारों फिल्में बनाई जा सकती हैं। सम्राट विक्रमादित्य का न्याय, उनका शौर्य और प्रजा के प्रति उनका समर्पण आज के युवाओं के लिए सबसे बड़ा सबक है।

योगी आदित्यनाथ ने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय सिनेमा ने ऐतिहासिक रूप से तब सबसे सकारात्मक भूमिका निभाई है, जब उसने देश के वास्तविक आदर्शों, संस्कृति और गौरव को पर्दे पर उतारा है। उन्होंने फिल्मकारों को चेतावनी भरे लहजे में आगाह किया कि मौजूदा पीढ़ी के सामने आप जो कुछ भी परोसेंगे, वे उसी तरह से गढ़े जाएंगे। अगर आप उन्हें साहस और सत्य की कहानियां दिखाएंगे तो वे वीर बनेंगे, लेकिन अगर आप नकारात्मकता दिखाएंगे तो समाज पतन की ओर जाएगा।

 एमपी के सीएम भी रहे मौजूद

इस कार्यक्रम की एक और खास बात उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्रियों का एक साथ मंच साझा करना रहा। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी सभा को संबोधित किया और सम्राट विक्रमादित्य की विरासत पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि उज्जैन के राजा विक्रमादित्य का काशी से अटूट संबंध रहा है और आज यह आयोजन उन ऐतिहासिक कड़ियों को फिर से जोड़ रहा है।

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सीएम मोहन यादव ने घोषणा की कि उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सरकारें मिलकर काम कर रही हैं ताकि दोनों राज्यों के बीच सांस्कृतिक संबंधों को एक नई ऊंचाई दी जा सके। उन्होंने कहा, हम चाहते हैं कि हमारे महापुरुषों का इतिहास केवल किताबों तक सीमित न रहे, बल्कि सांस्कृतिक कार्यक्रमों और आधुनिक माध्यमों से घर-घर पहुंचे।

भव्य नाट्य प्रस्तुति ने बांधा समां

वाराणसी में आयोजित इस कार्यक्रम में सम्राट विक्रमादित्य के जीवन और उनके न्यायप्रिय शासन को एक भव्य लाइट एंड साउंड शो और नाट्य प्रस्तुति के जरिए दिखाया गया। कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति से यह संदेश देने का प्रयास किया कि, किस तरह राजा विक्रमादित्य ने अधर्म का नाश कर धर्म की स्थापना की थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस प्रस्तुति की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम ही युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ने का काम करते हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह संबोधन फिल्म जगत के लिए एक नई गाइडलाइन की तरह देखा जा रहा है। उत्तर प्रदेश में बन रही फिल्म सिटी के संदर्भ में भी यह बयान महत्वपूर्ण है, क्योंकि योगी सरकार शुरू से ही ऐसे कंटेंट को बढ़ावा देने की पक्षधर रही है जो भारतीय मूल्यों पर आधारित हो। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि बॉलीवुड के फिल्ममेकर मुख्यमंत्री के इस आग्रह को कितनी गंभीरता से लेते हैं और क्या आने वाले समय में हमें भारतीय सिनेमा के पर्दे पर ‘खलनायकों’ के बजाय ‘असली नायकों’ का बोलबाला देखने को मिलेगा।

 

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