
लखनऊ। विकास के पथ पर तेजी से अग्रसर हो रहा उत्तर प्रदेश अब ‘उत्तम प्रदेश’ से आगे बढ़ चुका है और ‘उद्यम प्रदेश’ बनने जा रहा है। इसके लिए सीएम योगी आदित्यनाथ ने एक निर्णायक कदम उठाया है। लखनऊ में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि, प्रदेश की आर्थिक प्रगति का रास्ता बड़े कारखानों से ज्यादा उन छोटे कारीगरों, बुनकरों और हस्तशिल्पियों की गलियों से होकर गुजरता है, जो सदियों से प्रदेश की पहचान रहे हैं।
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अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश
दरअसल, सरकार का लक्ष्य अब इन पारंपरिक उद्योगों को आधुनिक तकनीक और वैश्विक बाजार से जोड़कर रोजगार का नया मॉडल खड़ा करना है। बैठक में सीएम ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिया कि, एमएसएमई और ओडीओपी योजनाओं का लाभ किसी खास समूह तक सीमित नहीं रहना नहीं चाहिए बल्कि प्रदेश के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक पहुंचाना जरूरी है।
समीक्षा बैठक का मुख्य केंद्र ‘कॉमन फैसिलिटी सेंटर’ रहे। प्रदेश में मौजूदा समय में 16 ऐसी बड़ी परियोजनाएं संचालित हो रही हैं, जहां करोड़ों रुपये की आधुनिक मशीनें और टूल्स लगे हैं। मुख्यमंत्री ने इस बात पर नाराजगी जाहिर की, कि कुछ केंद्रों में लाभार्थियों की संख्या बहुत कम है। उन्होंने अधिकारियों को दो-टूक शब्दों में कहा कि, सरकार इन केंद्रों पर 90 प्रतिशत तक का अनुदान इसीलिए देती है ताकि वह गरीब बुनकर या कारीगर, जो लाखों की मशीन खुद नहीं खरीद सकता, वह यहां आकर मामूली शुल्क पर अपनी गुणवत्ता सुधार सके।
जन-सुविधा केंद्र विकसित करने के निर्देश
योगी सरकार का निर्देश है कि, सीएफसी को क्लब न बनाया जाए, बल्कि इसे एक जन-सुविधा केंद्र के रूप में विकसित किया जाए। इसके लिए व्यापक प्रचार-प्रसार के निर्देश दिए गए हैं। एमएसएमई मंत्री राकेश सचान ने कहा कि, अब गांवों और कस्बों में मोबाइल संदेश, पम्पलेट और स्थानीय उद्योग बंधु की बैठकों के जरिए बताया जाएगा कि, आपके जिले में कौन सी मशीनरी उपलब्ध है। पारदर्शिता के लिए हर सेंटर पर सिटीजन चार्टर भी लगाया जाएगा, जिसमें दी जाने वाली सुविधाओं और उनकी फीस का पूरा ब्यौरा होगा।
उत्तर प्रदेश की बुनकरी दुनिया भर में मशहूर है, लेकिन लागत और बिजली की समस्याओं ने इस उद्योग को हमेशा प्रभावित किया। बैठक में बताया गया कि, योगी सरकार ने बुनकरों के हितों की रक्षा के लिए ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। सरकार ने वर्षों तक फ्लैट रेट विद्युत योजना को लागू रखा, जिसका सीधा लाभ छोटे बुनकरों को मिला। 2006 से लेकर 2023 तक सरकार ने लगभग 44 करोड़ रुपये का बिजली खर्च खुद वहन किया, ताकि बुनकरों पर कर्ज का बोझ न बढ़े।
अब सरकार का ध्यान डिजाइन और मार्केटिंग पर है। वाराणसी के सिल्क क्लस्टर और अंबेडकर नगर के बुनकर केंद्रों में अब आधुनिक डिजाइनिंग टूल्स और सॉफ्टवेयर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। लक्ष्य यह है कि, बनारसी साड़ी हो या अंबेडकर नगर का कपड़ा, उसकी फिनिशिंग ऐसी हो कि वह पेरिस और न्यूयॉर्क के शोरूम में सीधे टक्कर दे सके।
टेस्टिंग लैब से जुड़ा आगरा का चमड़ा उद्योग
बैठक में खुर्जा के ब्लैक पॉटरी क्लस्टर को एक सफलता की मिसाल के तौर पर पेश किया गया। कभी दम तोड़ रहे इस उद्योग में सीएफसी के आने के बाद क्रांतिकारी बदलाव आया है। यहां लाभार्थियों की संख्या 1200 से पार कर गई है और कारोबार जो कभी 15-20 लाख तक सीमित था, वह अब 95 लाख रुपये सालाना को पार कर रहा है। इसी तरह गाजियाबाद के इंजीनियरिंग क्लस्टर में अब 3डी प्रिंटिंग और सीएनसी मशीनों के जरिए युवाओं को ऐसी ट्रेनिंग दी जा रही है कि, वे अब डिफेंस कॉरिडोर के लिए कलपुर्जे बनाने की तैयारी कर रहे हैं।
सहारनपुर का लकड़ी शिल्प और आगरा का चमड़ा उद्योग भी अब आधुनिक टेस्टिंग लैब से जुड़ चुके हैं। मेरठ में तो गुड़ प्रसंस्करण से 1800 से ज्यादा किसानों को जोड़ा गया है, जो सीधे तौर पर कृषि और उद्योग के समन्वय का बेहतरीन उदाहरण है।
मुख्यमंत्री का विजन केवल सामान बनाना नहीं, बल्कि उसे बेचना भी है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि, वे बड़ी औद्योगिक इकाइयों के साथ समन्वय स्थापित करें। छोटे उद्योगों को इन बड़ी कंपनियों का वेंडर बनाया जाएगा। इससे छोटे उद्यमियों को एक स्थायी बाजार मिलेगा और बड़ी कंपनियों को स्थानीय स्तर पर कच्चा माल और पुर्जे सुलभ होंगे।
सरकार का मानना है कि उत्तर प्रदेश की ओडीओपी योजना पहले ही देश-दुनिया में सराही जा चुकी है। अब इसे अगले स्तर पर ले जाने का समय है। इसके लिए जिलों में प्रदर्शनी, हाट और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स का सहारा लिया जा रहा है। योगी सरकार का यह नया आर्थिक ब्लूप्रिंट न केवल यूपी की जीडीपी में इजाफा करेगा, बल्कि पलायन को रोककर स्थानीय स्तर पर लाखों नए रोजगार सृजित करेगा।
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