सीएम योगी दो दिन में साधेंगे पश्चिमी यूपी को, शामली को देंगे बड़ी सौगात

मेरठ। अभी उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने के लगभग एक साल का समय बाकी है, लेकिन बीजेपी पूरी तरह से एक्टिव नजर आ रही है। सीएम योगी इन दिनों पूरे प्रदेश का भ्रमण कर रहे हैं और जनता से रूबरू हो रहे हैं। इसी कड़ी में आज से दो दिन वे पश्चिम उत्तर प्रदेश के दौरे पर रहेंगे। यहीं वजह है कि यहां का प्रशासनिक अमला पूरी तरह मुस्तैद है और व्यवस्थाओं का जायजा ले रहा है।

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परखेंगे जमीनी हकीकत

17 और 18 जुलाई को मुख्यमंत्री पश्चिमी उत्तर प्रदेश के छह जिलों में पहुंचकर विकास परियोजनाओं की जमीनी हकीकत परखेंगे। साथ ही सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और कानून-व्यवस्था की स्थिति की भी बारीकी से समीक्षा करेंगे। मुख्यमंत्री के इस व्यस्त कार्यक्रम को देखते हुए मेरठ जोन के एडीजी ने शामली और बुलंदशहर सहित संबंधित जिलों की पुलिस को हाई अलर्ट पर रहने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही शासन स्तर से भी सुरक्षा, प्रोटोकॉल और तैयारियों को लेकर अधिकारियों को साफ और सख्त निर्देश जारी किए गए हैं, ताकि दौरे के दौरान किसी तरह की चूक की गुंजाइश न रहे।

2 दिन में 6 जिले साधेंगे सीएम

मुख्यमंत्री के इस दौरे के पूरे कार्यक्रम की बात करें, तो 17 जुलाई को उनका पहला पड़ाव गाजियाबाद रहेगा। इसके बाद वे शामली और वहां से बिजनौर जाएंगे। इसके अगले ही दिन यानी 18 जुलाई को वे अमरोहा, बुलंदशहर और संभल में रहेंगे यानी महज दो दिनों में मुख्यमंत्री का पूरा फोकस वेस्ट यूपी के इन छह जिलों पर केंद्रित रहने वाला है। हर जिले में सिर्फ औपचारिक दौरा नहीं होगा, बल्कि वहां समीक्षा बैठकें भी आयोजित की जाएंगी, जिनमें स्थानीय प्रशासन से विकास कार्यों की ताजा प्रगति रिपोर्ट मांगी जाएगी।

CM Yogi

इसके अलावा सीएम योगी विभिन्न सरकारी विभागों की योजनाओं की जमीनी स्थिति का भी जायजा लेंगे और जहां जरूरत होगी, वहां अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी देंगे। कुल मिलाकर यह दौरा सिर्फ प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि जवाबदेही तय करने वाला भी साबित होगा।

शामली को मिलेगी 617 करोड़ की सौगात

इस पूरे दौरे में शामली और बिजनौर जिलों को खास तवज्जो दी जा रही है। शामली के कैराना में एक बड़ी जनसभा आयोजित की जाएगी, जहां सीएम जनता को संबोधित करेंगे। इस मौके पर वे जिले को करीब 617.70 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं की सौगात भी देंगे, जो जिले में विकास में अहम भूमिका निभाएगी।

यह कार्यक्रम विजय सिंह पथिक राजकीय महाविद्यालय परिसर में आयोजित होना तय है। इसे देखते हुए प्रशासन ने पहले से ही व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। मंच से लेकर सुरक्षा घेरे तक, हर छोटी-बड़ी बात पर बारीकी से नजर रखी जा रही है। इसके साथ ही बिजनौर में भी मुख्यमंत्री विभिन्न विकास कार्यों की समीक्षा करेंगे। वहां चल रही योजनाओं से जुड़े कार्यक्रमों में शिरकत करेंगे।

सुरक्षा व्यवस्था रहेगी चाक-चौबंद  

सीएम योगी आदित्यनाथ की कानून-व्यवस्था को लेकर सख्त कार्यशैली किसी से छिपी नहीं है। यही वजह है कि, इस दौरे से पहले सभी संबंधित जिलों के पुलिस अधिकारियों को सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह चाक-चौबंद रखने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। प्रशासनिक अधिकारियों से भी कहा गया है कि, दौरे के दौरान किसी भी स्तर पर लापरवाही की गुंजाइश न रहे। जाहिर है, जब सीएम खुद फील्ड में उतरकर योजनाओं की हकीकत परखने वाले हों, तो प्रशासन की जवाबदेही और भी बढ़ जाती है। यही वजह है कि, इस बार पुलिस और प्रशासनिक अमला दोनों ही स्तर पर पूरी सतर्कता बरती जा रही है, ताकि हर व्यवस्था समय रहते दुरुस्त रहे।

कांवड़ यात्रा को लेकर मेरठ में हलचल

दिलचस्प बात यह है कि सीएम के इस दौरे के साथ-साथ 18 जुलाई को मेरठ में एक और महत्वपूर्ण प्रशासनिक गतिविधि होने की संभावना जताई जा रही है। इसका सीधा संबंध कांवड़ यात्रा की तैयारियों से है। जैसे-जैसे कांवड़ यात्रा नजदीक आ रही है, प्रशासनिक स्तर पर सक्रियता भी बढ़ती जा रही है।

प्रस्तावित कार्यक्रम के मुताबिक, पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण और प्रमुख सचिव सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मेरठ पहुंच सकते हैं। यहां एक अंतरराज्यीय समन्वय बैठक आयोजित होने की संभावना है, जो इस बार खासतौर पर अहम मानी जा रही है क्योंकि इसमें सिर्फ उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि उत्तराखंड, दिल्ली और राजस्थान के अधिकारी भी शामिल होंगे।

इन राज्यों में भी होंगी बैठकें

इस बैठक का मकसद साफ है, कांवड़ यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाना, ट्रैफिक प्रबंधन को सुचारू रखना, श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मुहैया कराना और अलग-अलग राज्यों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करना। चूंकि कांवड़ यात्रा में लाखों श्रद्धालु एक साथ अलग-अलग राज्यों से गुजरते हैं, ऐसे में सिर्फ एक राज्य की तैयारी काफी नहीं होती, बल्कि सभी संबंधित राज्यों के बीच तालमेल बेहद जरूरी हो जाता है। यही कारण है कि इस बैठक में एक विस्तृत और साझा रणनीति तैयार करने पर जोर दिया जाएगा।

यह सिलसिला यहीं खत्म नहीं होगा। मेरठ में होने वाली इस बैठक के बाद, इसी विषय पर आगे की बैठकें दिल्ली, गाजियाबाद और उत्तराखंड में भी आयोजित की जाएंगी, ताकि हर राज्य और हर स्तर पर तैयारियों की गहराई से समीक्षा हो सके।

कई मायनों ने खास है योगी का दौरा

कुल मिलाकर देखा जाए, तो मुख्यमंत्री का यह दो दिवसीय दौरा कई मायनों में खास है। एक तरफ यह वेस्ट यूपी में विकास कार्यों की समीक्षा और जनता से सीधे संवाद का मौका है, तो दूसरी तरफ यह आने वाली कांवड़ यात्रा जैसे बड़े धार्मिक आयोजन की तैयारियों को भी गति देने वाला साबित हो सकता है।

शामली को मिलने वाली सैकड़ों करोड़ की विकास परियोजनाएं इस बात का संकेत हैं कि, सरकार का फोकस अब सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के छोटे और मंझोले जिलों तक भी फैल रहा है। वहीं दूसरी ओर, कांवड़ यात्रा को लेकर बन रही अंतरराज्यीय रणनीति यह दिखाती है कि प्रशासन अभी से हर संभावित चुनौती से निपटने की तैयारी में जुटा हुआ है।

 

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