जालौर में सीएम योगी की बड़ी चेतावनी, बच्चों को बर्बादी की तरफ धकेल रहा स्मार्टफोन

लखनऊ/जालोर। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और तकनीक के इस दौर में जहां स्मार्टफोन हमारी हथेली का हिस्सा बन चुका है। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसके एक ऐसे काले पक्ष की तरफ देश का ध्यान खींचा है, जो हमारी आने वाली पीढ़ी को खोखला कर रहा है। राजस्थान के जालोर में आयोजित एक विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने न केवल तकनीक के दुरुपयोग पर चिंता जताई, बल्कि इसे नशे से भी ज्यादा खतरनाक करार दिया।

इसे भी पढ़ें- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की सीएम योगी की तारीफ, कहा- लखनऊ बना वर्ल्ड क्लास शहर

महायज्ञ में हुए शामिल

मुख्यमंत्री ने जालोर के ऐतिहासिक श्री रत्नेश्वर महादेव मंदिर जिसे सिरे मंदिर के नाम से भी जाना जाता है के 375 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित महायज्ञ में भाग लेते हुए यह स्पष्ट संदेश दिया कि, यदि हमने अपनी युवा पीढ़ी को स्मार्टफोन के इस आभासी दलदल’ से नहीं निकाला, तो डिप्रेशन और कुंठित बुद्धि जैसी बीमारियां हमारे समाज को मानसिक गुलामी की ओर ले जाएंगी।

CM Yogi Adityanath

सीएम ने अपने संबोधन की शुरुआत सीधे उन परिवारों और माताओं से संवाद के साथ की, जो अक्सर बच्चों को चुप कराने के लिए स्मार्टफोन पकड़ा देती हैं। उन्होंने कहा कि, स्मार्टफोन का अत्यधिक प्रयोग वर्तमान समय की सबसे बड़ी हानि है। यह केवल समय की बर्बादी नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर हमारी सोचने की सामर्थ्य को खत्म कर रहा है। मुख्यमंत्री ने आगाह किया कि, जो बच्चे घंटों स्मार्टफोन की स्क्रीन पर आंखें गड़ाए रहते हैं, उनकी बुद्धि विकसित होने के बजाय कुंठित होने लगती है।

उन्होंने विशेष रूप से ‘मातृशक्ति’ का आह्वान करते हुए कहा कि बच्चों को थोड़ी देर रोने दें या नाराज होने दें, वह उनकी सेहत के लिए उतना बुरा नहीं है जितना कि उन्हें शांत करने के लिए मोबाइल फोन पकड़ा देना। यह आदत बच्चों को समाज से काटकर एक कृत्रिम दुनिया में ले जा रही है, जहां से वापसी बहुत कठिन है।

अपनी जड़ों मे लौटने की दी सलाह

योगी आदित्यनाथ ने डिप्रेशन के बढ़ते मामलों को सीधे तौर पर स्मार्टफोन की लत से जोड़ा। उन्होंने कहा कि, आज युवाओं में छोटी-छोटी बातों पर आत्महत्या करने की जो प्रवृत्ति बढ़ी है, उसके पीछे स्मार्टफोन पर खेले जाने वाले हिंसक गेम्स और सोशल मीडिया की नकारात्मकता एक प्रमुख कारण है। जब बच्चा या युवा समाज से कटकर केवल स्क्रीन तक सीमित रह जाता है, तो उसके भीतर चुनौतियों का सामना करने की हिम्मत खत्म हो जाती है। सीएम ने कहा कि, सफलता और विफलता एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। अगर विफलता मिली है, तो उसके कारणों को ढूंढकर सफलता में बदलना ही जीवन है न कि उससे घबराकर आत्मघाती कदम उठाना।

 

सीएम योगी ने समाज को फिर से अपनी जड़ों की ओर लौटने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि स्मार्टफोन एक समय के बाद मानसिक बीमारी पैदा करने वाला यंत्र बन जाता है। इससे बचने का एकमात्र रास्ता यह है कि, हम अपने परिवार के लिए समय निकालें। उन्होंने व्यावहारिक सुझाव देते हुए कहा कि, भोजन करते समय या पूजा-पाठ के दौरान फोन का इस्तेमाल पूरी तरह बंद होना चाहिए। यदि उस समय कोई कॉल आता है, तो उसे बाद में कॉलबैक किया जा सकता है, लेकिन उस पल को स्मार्टफोन के लिए कुर्बान नहीं करना चाहिए।

अच्छी पुस्तकें पढ़ें युवा

उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे स्मार्टफोन पर बिताए जाने वाले समय को काटकर अच्छी पुस्तकों के अध्ययन, योग और शारीरिक व्यायाम पर लगाएं। उनका मानना है कि शारीरिक श्रम और ज्ञान का अर्जन ही एक युवा को व्यवस्थित और सुंदर जीवन दे सकता है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि, देश के दुश्मन और नशे के सौदागर भारत की युवा शक्ति को नशे के आगोश में धकेलने की साजिश रच रहे हैं। स्मार्टफोन का यह डिजिटल नशा भी उसी साजिश का हिस्सा जैसा है, जो युवाओं को शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर कर रहा है। उन्होंने समाज के हर तबके से अपील की कि नशे के इन सौदागरों को अपने गांव, कस्बे या परिवार में घुसने न दें।

लोभ का त्याग करना ही सबसे बड़ी साधना

सिरे मंदिर के आध्यात्मिक परिवेश में बोलते हुए मुख्यमंत्री ने प्रकृति और जीव-जंतुओं से सीखने की प्रेरणा दी। उन्होंने एक रोचक संस्मरण सुनाते हुए बताया कि जब वे मंदिर के समीप बंदरों के बीच थे, तो उन्होंने देखा कि एक बंदर ने तब तक दूसरी रोटी नहीं उठाई जब तक उसने पहली को पूरी तरह खत्म नहीं कर लिया। सीएम ने कहा कि जानवरों की यह शालीनता मनुष्यों के लिए एक बड़ी सीख है। आज के समय में मनुष्य हड़पने और संचय करने की प्रवृत्ति में अंधा हो चुका है, जबकि सनातन धर्म हमें जरूरतमंद तक पहुंचाने का भाव सिखाता है। लोभ का त्याग करना ही सबसे बड़ी साधना है।

CM Yogi Adityanath

उन्होंने शिव परिवार का उदाहरण देते हुए भारतीय संस्कृति के समतामूलक स्वरूप को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि किस तरह भगवान शिव के परिवार में परस्पर विरोधी स्वभाव के प्राणी शेर, बैल, चूहा, सांप और मोर एक साथ रहते हैं। यह हमें सिखाता है कि विरोधों के बीच भी सामंजस्य बिठाकर समाज को एकता के सूत्र में पिरोना ही एक भारत-श्रेष्ठ भारत की असली पहचान है। भारत ने हमेशा दुनिया को जीने की कला सिखाई है और यह हमारी संतों की तपस्या और वीरों के बलिदान का ही फल है कि हम आज एक समृद्ध विरासत के वारिस हैं।

 

इसे भी पढ़ें-लखनऊ को बड़ी सौगात, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सीएम योगी ने किया ग्रीन कॉरिडोर का उद्घाटन

Related Articles

Back to top button