
लखनऊ। पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध के बादलों और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आए भूचाल के बीच भारत सरकार ने देश की जनता को महंगाई से बचाने के लिए एक बहुत बड़ा सुरक्षा कवच प्रदान किया है। केंद्र सरकार ने घरेलू खपत को बढ़ावा देने और आम आदमी की जेब पर पड़ रहे बोझ को कम करने के उद्देश्य से पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली केंद्रीय उत्पाद शुल्क यानी एक्साइज ड्यूटी में 10-10 रुपये प्रति लीटर की कटौती करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है।
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बढ़ती कीमतों को रोकना है मकसद
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस फैसले की घोषणा करते हुए स्पष्ट किया कि वैश्विक स्तर पर जारी अस्थिरता का सीधा असर भारतीय उपभोक्ताओं पर न पड़े, यह सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। सरकार के इस साहसिक कदम का उद्देश्य न केवल ईंधन की कीमतों को बढ़ने से रोकना है बल्कि देश के भीतर जरूरी ऊर्जा संसाधनों की निरंतर उपलब्धता को भी बनाए रखना है।
इस महत्वपूर्ण फैसले पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी गहरी संतुष्टि व्यक्त करते हुए इसे एक अत्यंत जनहितैषी कदम बताया है। मुख्यमंत्री का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनावपूर्ण स्थिति के दौरान लिया गया यह निर्णय देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करेगा और बाजार में संतुलन बनाए रखने में मील का पत्थर साबित होगा।
उन्होंने केंद्र सरकार के इस विजन की सराहना करते हुए कहा कि यह फैसला न केवल आम नागरिकों को राहत देगा बल्कि परिवहन और कृषि क्षेत्र जैसे उन तमाम हिस्सों को भी सहारा देगा जो सीधे तौर पर डीजल और पेट्रोल की लागत से प्रभावित होते हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार यह निर्णय सही समय पर लिया गया एक ऐसा कदम है जो अंतरराष्ट्रीय संकट के दौर में भारतीय नागरिकों के हितों की सुरक्षा करता है और आर्थिक स्थिरता को नई दिशा देता है।
सप्लाई चेन पर सरकार की नजर
वित्त मंत्री ने इस निर्णय के पीछे की रणनीति साझा करते हुए बताया कि पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात को देखते हुए सरकार को यह कड़ा फैसला लेना पड़ा ताकि विदेशी बाजारों में होने वाले उतार-चढ़ाव का खामियाजा भारत के मध्यम और निम्न वर्ग को न भुगतना पड़े। सरकार इस बात पर निरंतर नजर बनाए हुए है कि अनिवार्य वस्तुओं की आपूर्ति श्रृंखला में कोई बाधा न आए और माल ढुलाई की लागत स्थिर रहे।
दरअसल जब भी कच्चे तेल के दाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते हैं, तो उसका सीधा असर महंगाई दर पर पड़ता है लेकिन एक्साइज ड्यूटी में की गई यह 10 रुपये की कटौती एक ऐसे शॉक एब्जॉर्बर की तरह काम करेगी जो कीमतों में होने वाली संभावित वृद्धि को सोख लेगी।
इतना ही नहीं, सरकार ने घरेलू बाजार में तेल की पर्याप्त सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए केवल टैक्स ही कम नहीं किया है बल्कि निर्यात को लेकर भी कड़े नियम लागू कर दिए हैं। वित्त मंत्री ने बताया कि अब डीजल के निर्यात पर 21.5 रुपये प्रति लीटर और विमान ईंधन यानी एटीएफ के निर्यात पर 29.5 रुपये प्रति लीटर की नई ड्यूटी लगाई गई है। इस कदम का मुख्य कारण यह है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमतें ऊंची होने की वजह से कई तेल कंपनियां घरेलू बाजार की तुलना में विदेशों में तेल बेचना ज्यादा फायदेमंद समझ रही थीं।
घरेलू मांग को प्राथमिकता
नई निर्यात ड्यूटी लगने से अब कंपनियों के लिए विदेश में तेल बेचना महंगा हो जाएगा जिससे वे मजबूर होकर भारत के भीतर अपनी सप्लाई बढ़ाएंगी। इस नीतिगत बदलाव से यह सुनिश्चित हो गया है कि भारतीय पेट्रोल पंपों पर तेल की कोई कमी नहीं होगी और घरेलू मांग को प्राथमिकता मिलेगी।
अगर उत्तर प्रदेश के संदर्भ में देखा जाए तो फिलहाल राज्य में पेट्रोल की कीमतें 94 से 95 रुपये प्रति लीटर के बीच चल रही हैं और डीजल 87 से 88 रुपये प्रति लीटर के आसपास मिल रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि एक्साइज ड्यूटी में इस कटौती का सीधा मतलब यह नहीं है कि कीमतें कल से ही बहुत नीचे गिर जाएंगी बल्कि इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि तेल कंपनियों को होने वाले घाटे की भरपाई हो जाएगी और वे आने वाले महीनों में कीमतें बढ़ाने पर मजबूर नहीं होंगी।
इससे तेल कंपनियों की वित्तीय स्थिति भी सुधरेगी और आम आदमी पर भी कीमतों की बढ़ोतरी का नया बोझ नहीं पड़ेगा। कुल मिलाकर मोदी सरकार का यह फैसला संकट के समय में भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक संजीवनी की तरह है जो देश को वैश्विक महंगाई की तपिश से बचाने का काम करेगा।
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