
लखनऊ। सूबे की राजधानी लखनऊ में आयोजित क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की बदलती कृषि व्यवस्था और किसानों की खुशहाली का एक नया रोडमैप पेश किया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि, उत्तर प्रदेश अब केवल परंपरागत खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि तकनीक और इनोवेशन के माध्यम से कृषि क्षेत्र में लैब से लैंड तक की दूरी को सफलतापूर्वक कम कर लिया गया है।
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पिछली सरकारों पर हमला
मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश की कृषि विकास दर में हुई अभूतपूर्व वृद्धि का उल्लेख करते हुए कहा कि, जो विकास दर कभी 8 प्रतिशत पर ठहरी हुई थी, वह अब 18 प्रतिशत के जादुई आंकड़े को छू रही है। पिछली सरकारों की कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार करते हुए सीएम ने कहा कि पहले नीतियां केवल कागजों पर बनती थीं और फाइलें दफ्तरों में ही दम तोड़ देती थीं, लेकिन 2017 के बाद उत्तर प्रदेश में कार्यसंस्कृति बदली है और काम धरातल पर दिखने लगे।

सीएम योगी ने कहा, हमारी प्राथमिकता केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उन्हें धरातल पर उतारकर किसानों को अवगत कराना है। 2017 से पहले प्रदेश में 69 कृषि विज्ञान केंद्र बंद होने की कगार पर थे। उनकी कोई जवाबदेही तय नहीं थी। पिछली सरकारों ने भारत सरकार द्वारा नए केंद्र देने के प्रस्ताव को भी ठुकरा दिया था। हमने सत्ता में आते ही उन केंद्रों को क्रियाशील किया और नए केंद्रों की स्थापना की। आज हर कृषि विज्ञान केंद्र अपनी पूरी क्षमता के साथ किसानों की सेवा कर रहा है।
खेत में किसानों से मिलते हैं अधिकारी और वैज्ञानिक
पिछले वर्ष शुरू किए गए खेती की बात खेत में कार्यक्रम की सफलता का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अलग-अलग क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियां और समस्याएं अलग-अलग होती हैं। इस कार्यक्रम के जरिए वैज्ञानिकों और अधिकारियों ने सीधे खेत पर जाकर किसानों की समस्याओं का समाधान किया, जिसका परिणाम आज किसानों के चेहरे पर दिख रहे उत्साह के रूप में सामने आ रहा है।
उन्होंने कहा कि कृषि इनोवेशन को धरातल पर उतारना एक बड़ी चुनौती थी, लेकिन यूपी ने इसे कर दिखाया है। मुख्यमंत्री ने नेतृत्व की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि, हमारे पास संसाधन, श्रम और तकनीक सब कुछ है, बस उसे सही दिशा देने की आवश्यकता है, जिसे वर्तमान सरकार बखूबी कर रही है।
मुख्यमंत्री ने आंकड़ों के जरिए उत्तर प्रदेश की उपलब्धियों को गिनाया। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश अकेले 425 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उत्पादन कर रहा है, जो अपने आप में एक कीर्तिमान है। आलू उत्पादन के मामले में भी यूपी 245 लाख मीट्रिक टन के साथ देश में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
हर क्षेत्र में आगे बढ़ रहा प्रदेश
सीएम ने कहा कि, सब्जी से लेकर फल तक, उत्तर प्रदेश ने हर क्षेत्र में लंबी छलांग लगाई है। जल्द ही प्रदेश को मिलने वाला पोटैटो सेंटर भी चालू हो जाएगा, जिससे आलू उत्पादक किसानों की आय में क्रांतिकारी बदलाव आएगा। उन्होंने कहा कि समय पर बीज और सही तकनीक मिलने से यूपी में कई स्थानों पर 100 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन रिकॉर्ड किया गया है।
किसानों को प्रेरित करने के लिए मुख्यमंत्री ने बाराबंकी के प्रगतिशील किसान राम शरण वर्मा का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा, राम शरण वर्मा 10वीं फेल हैं, लेकिन वे जिस तरह से वैज्ञानिक खेती कर रहे हैं, वह बड़े-बड़े विशेषज्ञों के लिए भी शोध का विषय है। हमें ऐसे किसानों को चिन्हित करना होगा और उनके अनुभवों को दूसरे किसानों के साथ साझा करना होगा।

उन्होंने कहा कि, आज प्रदेश का किसान तीन से चार फसलें ले रहा है। इटावा, औरैया और कानपुर देहात के किसान मक्का उत्पादन से प्रति एकड़ एक लाख रुपये तक कमा रहे हैं। यह भरोसा ही सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि है कि, किसान को अब पता है कि उसकी मेहनत बेकार नहीं जाएगी।
गांव में 10 से 12 घंटे मिल रही बिजली
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में कई अंतरराष्ट्रीय केंद्र उत्तर प्रदेश को उपलब्ध कराए गए हैं, जिनके बेहतरीन परिणाम मिल रहे हैं। उन्होंने प्राकृतिक और जैविक खेती को भविष्य की जरूरत बताते हुए कहा कि लागत कम करके उत्पादन बढ़ाना ही हमारा प्राथमिक लक्ष्य है। बिजली आपूर्ति पर बोलते हुए सीएम ने कहा कि अब गांवों को 10 से 12 घंटे निर्बाध बिजली मिल रही है, जिससे सिंचाई की समस्या दूर हुई है और किसान अब साल में तीसरी फसल लेने के लिए उत्साहित है।
संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि देश के कृषि उत्पादन में उत्तर प्रदेश का शेयर अब 20 फीसदी तक पहुंच गया है। कृषि और उत्पादन के बीच जो समन्वय सरकार ने स्थापित किया है, उससे विकास की गति तेज हुई है। उन्होंने वैज्ञानिकों और अधिकारियों से आह्वान किया कि वे अपनी ऊर्जा और शोध को आम किसान की आय बढ़ाने में लगाएं। खेती अब केवल जीवन यापन का साधन नहीं, बल्कि लाभ का व्यवसाय बन रही है और उत्तर प्रदेश इसमें देश का नेतृत्व करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
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