
लखनऊ। आज पूरे देश और उत्तर प्रदेश में भारतीय संविधान के शिल्पकार, समाज सुधारक और करोड़ों वंचितों की आवाज ‘भारत रत्न’ बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती मनाई जा रही है। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्य के शीर्ष नेतृत्व ने बाबासाहेब को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए उनके संवैधानिक आदर्शों और सामाजिक न्याय के प्रति उनके अटूट समर्पण को याद किया।
इसे भी पढ़ें- योगी सरकार का बड़ा फैसला, 3000 बढ़ेगी प्राइवेट कर्मचारियों की सैलरी, ये होगा नोएडा-लखनऊ का नया रेट कार्ड
प्रदेश भर में गूंजे अंबेडकर के विचार
राजधानी लखनऊ से लेकर प्रदेश के हर कोने में बाबासाहेब के विचारों की गूंज सुनाई दी, जहां नेताओं ने उनके बताए मार्ग पर चलकर एक समावेशी और समरस समाज के निर्माण का संकल्प दोहराया। आज के दिन को न केवल एक महापुरुष के जन्मदिन के रूप में मनाया गया, बल्कि यह उन लोकतांत्रिक मूल्यों को पुनर्जीवित करने का अवसर भी बना, जिनकी नींव बाबासाहेब ने स्वतंत्र भारत के लिए रखी थी। मुख्यमंत्री और अन्य मंत्रियों के संदेशों में स्पष्ट था कि, आधुनिक भारत की प्रगति का आधार वही समानता और न्याय है जिसका सपना डॉ. अंबेडकर ने देखा था।

लखनऊ स्थित विधान भवन और अन्य महत्वपूर्ण स्थलों पर आयोजित कार्यक्रमों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाबासाहेब की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर डिजिटल माध्यमों से भी प्रदेशवासियों को संबोधित किया। उन्होंने अपने संदेश में बाबासाहेब को समरस और समावेशी समाज की आधारशिला रखने वाला महान शिल्पकार बताया।
सच्चे राष्ट्रभक्त थे बाबा साहेब
मुख्यमंत्री ने इस बात पर विशेष बल दिया कि, बाबासाहेब केवल एक संविधान निर्माता नहीं थे, बल्कि वे अंत्योदय यानी समाज के अंतिम व्यक्ति के कल्याण के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले एक सच्चे राष्ट्रभक्त थे। उनके अनुसार, बाबासाहेब के उच्च आदर्श आज भी राज्य सरकार के लिए एक मार्गदर्शक की भूमिका निभाते हैं।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि, बाबासाहेब के जीवन का संघर्ष और उनकी सफलता की कहानी हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है जो विपरीत परिस्थितियों में भी समाज में बदलाव लाना चाहता है। सरकार की नीतियां आज भी उसी मां भारती के अमूल्य रत्न के सिद्धांतों से प्रेरित हैं, ताकि विकास की धारा समाज के हर तबके तक पहुंच सके।
केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री और उत्तर प्रदेश भाजपा के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने भी बाबासाहेब को नमन करते हुए उनके योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने वंचितों और उपेक्षितों के अधिकारों के लिए जो संघर्ष किया, उसी का परिणाम है कि आज भारत में सामाजिक बंधुत्व की नींव इतनी मजबूत है।
मानव गरिमा की आधारशिला रखी
उनके अनुसार, समाज में समानता और न्याय लाना ही बाबासाहेब के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है। भाजपा संगठन के दृष्टिकोण से उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी का हर कार्यकर्ता बाबासाहेब के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बाबासाहेब को एक महान समाज सुधारक बताते हुए कहा कि उनके द्वारा गढ़ा गया संविधान ही वह सुरक्षा कवच है जो भारत के लोकतंत्र को विश्व में सबसे सशक्त बनाता है।
राज्य के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने बाबासाहेब के जीवन को शिक्षा और संघर्ष का एक अद्भुत संगम बताया। उन्होंने कहा कि डॉ. अंबेडकर ने शिक्षा को समाज में परिवर्तन का सबसे सशक्त माध्यम माना था। वंचितों, श्रमिकों और किसानों को उनके अधिकार दिलाकर बाबासाहेब ने मानव गरिमा की जो आधारशिला रखी, वह आज भी अटल है।
केशव प्रसाद मौर्य ने केंद्र की मोदी सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज बाबासाहेब के आदर्शों को धरातल पर उतारा जा रहा है। उन्होंने पंचतीर्थ जैसे प्रयासों का उल्लेख करते हुए बताया कि, कैसे सरकार बाबासाहेब से जुड़े महत्वपूर्ण स्थानों को विकसित कर उनके प्रति सम्मान प्रकट कर रही है। उनके अनुसार, वर्तमान सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं सीधे तौर पर बाबासाहेब के समतामूलक समाज के सपने को साकार कर रही हैं, जिससे करोड़ों वंचितों के जीवन में नई आशा का संचार हुआ है।
आज आत्मचिंतन का दिन
वहीं, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने भी सोशल मीडिया और विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से बाबासाहेब को कोटि-कोटि नमन किया। उन्होंने उन्हें सामाजिक समरसता का अग्रदूत बताते हुए कहा कि बाबासाहेब का योगदान केवल दलितों या वंचितों तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने पूरे भारत को एक सूत्र में पिरोने वाला संविधान दिया है।
ब्रजेश पाठक ने कहा कि, आज का दिन आत्मचिंतन का भी है कि हम उनके बताए गए समरसता के मार्ग पर कितना आगे बढ़े हैं। उन्होंने राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि सरकार बाबासाहेब के सिद्धांतों को अपनी कार्यशैली का हिस्सा मानती है और बिना किसी भेदभाव के समाज के हर वर्ग के उत्थान के लिए कार्य कर रही है।
नेताओं के संबोधनों में बार-बार इस बात का जिक्र आया कि समाज में व्याप्त ऊंच-नीच के भेदभाव को मिटाकर ही एक अखंड और समृद्ध भारत का सपना पूरा किया जा सकता है। जयंती के इस उपलक्ष्य में प्रदेश भर में आयोजित संगोष्ठियों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने नई पीढ़ी को बाबासाहेब के संघर्षों से परिचित कराया।
इसे भी पढ़ें- लखनऊ में अजब खेल, बेटे से एक साल छोटी निकली मां, सिस्टम की गलती का खामियाजा भुगत रहा परिवार



