
लखनऊ। भारतीय राजनीति के क्षितिज पर आज भगवा रंग और भी गहरा नजर आ रहा है। पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों के रुझानों ने देश की राजनीतिक दिशा को एक नया मोड़ दे दिया है, जहां एक ओर चुनावी रणभेरी शांत होने के बाद मतपेटियों से निकल रहे आंकड़े भारतीय जनता पार्टी के लिए जश्न का पैगाम लेकर आए हैं।
वहीं दूसरी ओर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस बड़ी जीत को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन की जीत करार दिया है। लखनऊ के गलियारों से लेकर दिल्ली के सत्ता के केंद्रों तक आज सिर्फ एक ही चर्चा है मोदी मैजिक का बरकरार रहना और विपक्षी किलों का ढहना। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इन नतीजों को केवल एक चुनावी जीत नहीं, बल्कि सुशासन और राष्ट्रवाद पर जनता की अंतिम मुहर बताया है।
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भाजपा के खेमे में ख़ुशी
विधानसभा चुनाव 2026 के परिणाम जैसे-जैसे स्क्रीन पर चमक रहे हैं, वैसे-वैसे भाजपा खेमे में उत्साह की लहर दौड़ गई है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस ऐतिहासिक पल को रेखांकित करने में जरा भी देरी नहीं की। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से देश की जनता और प्रधानमंत्री के बीच के उस अटूट रिश्ते का जिक्र किया, जो पिछले कई वर्षों से भारतीय राजनीति का केंद्र बना हुआ है। सीएम योगी ने स्पष्ट रूप से कहा कि आज के नतीजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के यशस्वी नेतृत्व और उनकी लोक-कल्याणकारी नीतियों पर देशवासियों के उस अगाध और अटूट विश्वास का परिणाम हैं, जिसे विपक्ष की तमाम घेरेबंदी भी हिला नहीं पाई। उन्होंने इसे विकसित भारत के विराट संकल्प की सिद्धि की ओर एक बड़ा कदम बताया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रतिक्रिया इस मायने में महत्वपूर्ण है कि वह स्वयं भाजपा के सबसे बड़े स्टार प्रचारकों में से एक रहे हैं। उन्होंने इन तीनों राज्यों में चुनावी रैलियों के दौरान हिंदुत्व और विकास के मॉडल को प्रमुखता से रखा था। आज जब नतीजे उनके पक्ष में दिख रहे हैं, तो उन्होंने इसे प्रधानमंत्री के नए भारत के संकल्प से जोड़ दिया।
योगी ने लिखा कि पश्चिम बंगाल में पहली बार भाजपा का इस प्रचंड बहुमत के साथ आना और असम में लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी करना कोई साधारण घटना नहीं है। यह इस बात का प्रमाण है कि पूर्वी भारत की जनता अब उस राजनीति को नकार चुकी है जो तुष्टिकरण और हिंसा पर आधारित थी। पुडुचेरी में एनडीए गठबंधन की दूसरी बार वापसी ने यह साफ कर दिया है कि दक्षिण भारत में भी अब विकासवादी राजनीति की जड़ें गहरी हो चुकी हैं।
91 सीटों में सिमट टीएमसी
आंकड़ों की बाजीगरी पर नजर डालें तो पश्चिम बंगाल के नतीजों ने राजनीतिक पंडितों को हैरत में डाल दिया है। राज्य की 294 सीटों में से भाजपा अकेले 194 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जो ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। टीएमसी मात्र 91 सीटों पर सिमटती नजर आ रही है, जबकि कभी बंगाल की सत्ता पर दशकों तक राज करने वाली कांग्रेस और वामपंथी दल (CPIM) महज 1 या 2 सीटों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
बंगाल की इस ऐतिहासिक बढ़त पर योगी आदित्यनाथ ने विशेष रूप से वहां के कार्यकर्ताओं की सराहना की। उन्होंने कहा कि बंगाल में भाजपा कार्यकर्ताओं ने जिस संघर्ष और बलिदान के साथ काम किया, आज यह जीत उन सभी के पसीने और तपस्या का सुफल है। सुशासन और राष्ट्रवाद को आशीर्वाद देने वाली बंगाल की जनता का उन्होंने हृदय से आभार व्यक्त किया।
योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में असम और पुडुचेरी की विजय को भी समान महत्व दिया। असम में भाजपा की तीसरी बार जीत ने यह साबित कर दिया है कि डबल इंजन की सरकार का फॉर्मूला वहां की जनता को खूब रास आ रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जन-जन का यह अभूतपूर्व जनादेश न केवल भाजपा की जीत है, बल्कि उन ताकतों की हार है जो देश को बांटने की राजनीति करती थीं। उन्होंने असम के मुख्यमंत्री और वहां के संगठन को इस निरंतरता के लिए बधाई दी।
अब दूर नहीं विकसित भारत का लक्ष्य
पुडुचेरी की जीत को उन्होंने केंद्र सरकार की योजनाओं के सफल क्रियान्वयन का परिणाम बताया। योगी आदित्यनाथ के अनुसार, ये नतीजे आगामी लोकसभा चुनावों और अन्य राज्यों के चुनावों के लिए एक बड़े ट्रेलर की तरह हैं, जिसने विरोधियों के हौसले पस्त कर दिए हैं। मुख्यमंत्री ने जीत का श्रेय कार्यकर्ताओं को देते हुए कहा कि बीजेपी बंगाल, बीजेपी असम और बीजेपी पुडुचेरी के हर एक समर्पित पदाधिकारी और कर्मठ कार्यकर्ता ने घर-घर जाकर जो अलख जगाई थी, उसी का परिणाम आज सबके सामने है। उन्होंने विजयी प्रत्याशियों को उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि अब जिम्मेदारी और बढ़ गई है।
जनता ने जिस विश्वास के साथ ‘कमल’ का बटन दबाया है, अब उस विश्वास को सेवा और विकास के माध्यम से और अधिक मजबूत करना होगा। योगी ने यह भी संकेत दिया कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश अब एक ऐसी दिशा में बढ़ चुका है जहां ‘विकसित भारत 2047’ का लक्ष्य अब दूर नहीं लगता। इस चुनावी सुनामी ने न केवल भाजपा को मजबूती दी है, बल्कि कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों के अस्तित्व पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। बंगाल में कांग्रेस का लगभग सफाया होना और टीएमसी का अपने ही गढ़ में पिछड़ना यह दर्शाता है कि जनता अब सशक्त विकल्प की तलाश में भाजपा के साथ खड़ी है।
नये भारत की विजय- योगी
योगी आदित्यनाथ ने इस जीत को जन-जन का जनादेश कहते हुए विपक्षी गठबंधन पर भी परोक्ष रूप से निशाना साधा। उनका मानना है कि जनता ने नकारात्मक राजनीति और झूठे वादों को दरकिनार कर केवल काम और ईमानदारी को चुना है। यूपी के मुख्यमंत्री का यह बयान आने वाले समय में देश की राजनीति में भाजपा के बढ़ते दबदबे और उनकी अपनी बढ़ती स्वीकार्यता का भी परिचायक है। कुल मिलाकर, 2026 के ये चुनाव परिणाम भारतीय जनता पार्टी के लिए एक स्वर्णिम अध्याय की शुरुआत की तरह हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का प्रधानमंत्री मोदी के प्रति यह आभार प्रदर्शन न केवल प्रोटोकॉल का हिस्सा है, बल्कि यह उस सांगठनिक एकजुटता को भी दर्शाता है जो भाजपा की सबसे बड़ी ताकत है। बंगाल की गलियों से लेकर असम के चाय बागानों तक, आज भाजपा का परचम लहरा रहा है। योगी आदित्यनाथ के शब्दों में कहें तो, यह जीत ‘नए भारत’ की विजय है, यह सुशासन की विजय है और यह उस राष्ट्रवाद की विजय है जिसने भारत को विश्व पटल पर एक नई पहचान दी है। अब देखना यह होगा कि इन राज्यों में नई सरकारें किस तरह प्रधानमंत्री के ‘विकसित भारत’ के संकल्प को जमीन पर उतारती हैं।
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