
बुलंदशहर। कभी-कभी किसी शहर की पहचान सिर्फ उसकी सड़कों, इमारतों या विकास योजनाओं से ही नहीं होती, बल्कि उन गुमनाम चेहरों से भी होने लगती है, जो चुपचाप समाज के लिए बड़ा त्याग कर देते हैं। शनिवार को बुलंदशहर में ऐसा ही एक चेहरा सबके सामने आया, जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद मंच से एक स्वयंसेवक को सम्मानित किया, जिसने अपनी निजी जमीन एक सैनिक स्कूल के नाम कर दी थी।
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मौका था मुख्यमंत्री के बुलंदशहर दौरे का, जहां वे विकास परियोजनाओं की सौगात देने पहुंचे थे, लेकिन दिनभर के कार्यक्रम में सबसे ज्यादा तालियां और सबसे ज्यादा चर्चा जिस पल की हुई, वह था शिकारपुर स्थित रज्जू भैया सैनिक विद्या मंदिर में हुआ सम्मान समारोह।

यहां मुख्यमंत्री ने वरिष्ठ स्वयंसेवक राजपाल सिंह को अंगवस्त्र ओढ़ाकर और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। ये सम्मान उस जमीन के बदले हुआ, जो राजपाल सिंह ने बिना किसी शर्त के सैनिक स्कूल को दान कर दी थी।
कौन हैं राजपाल सिंह
राजपाल सिंह बुलंदशहर के शिकारपुर क्षेत्र के रहने वाले हैं और लंबे समय से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े हुए हैं। उनकी अपनी कोई संतान नहीं है, लेकिन उन्होंने यह मान लिया कि, आने वाली पीढ़ियां ही उनका असली परिवार हैं। यही सोच उन्हें एक बड़े फैसले तक ले गई। उन्होंने अपनी निजी भूमि रज्जू भैया सैनिक विद्या मंदिर के नाम दान कर दी, ताकि वहां पढ़ने वाले बच्चों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजा कार्यक्रम स्थल
स्थानीय लोगों की मानें, तो राजपाल सिंह का यह फैसला किसी दिखावे के लिए नहीं, बल्कि शिक्षा और राष्ट्र-निर्माण के प्रति उनके सच्चे लगाव से निकला था। उन्होंने न कभी इसका प्रचार किया, न ही किसी सम्मान की उम्मीद रखी, लेकिन जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को उनके इस त्याग के बारे में पता चला, तो उन्होंने खुद मंच से उनकी सराहना करने का फैसला किया।

मंच से बोलते हुए सीएम योगी ने कहा कि, ऐसे प्रेरणादायी कार्य पूरे समाज के लिए मिसाल बनते हैं और आने वाली पीढ़ियों को समाजहित में काम करने की सीख देते हैं। इसके बाद बाद जैसे ही राजपाल सिंह का नाम पुकारा गया और वे मंच पर पहुंचे, तो पूरा कार्यक्रम स्थल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। मौजूद लोगों के लिए यह पल किसी भी विकास परियोजना के उद्घाटन से कम भावुक करने वाला नहीं था।
विद्यालय पहुंचकर लिया जायजा
मुख्यमंत्री के दिन की शुरुआत शिकारपुर तहसील के खंडवाया गांव स्थित रज्जू भैया सैनिक विद्या मंदिर से हुई। यहां पहुंचकर उन्होंने पहले विद्यालय परिसर का बारीकी से मुआयना किया। बच्चों से बातचीत की और शिक्षकों से स्कूल में चल रही गतिविधियों की जानकारी ली। सीएम ने विद्यालय में शिक्षा के स्तर और वहां हो रहे विकास कार्यों की खुलकर तारीफ की। इस दौरान उन्होंने कहा कि, इस तरह के संस्थान ग्रामीण इलाकों के बच्चों के लिए बड़ा सहारा बनते हैं।
जिले को दी 574 करोड़ की सौगात
स्कूल कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री का अगला पड़ाव था, विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास। बुलंदशहर और सिकंदराबाद विधानसभा क्षेत्रों के लिए कुल 58 परियोजनाओं की सौगात दी गई, जिनकी कुल लागत करीब 574 करोड़ रुपये आंकी गई है। इनमें से 31 परियोजनाओं का लोकार्पण किया गया, जबकि 27 नई परियोजनाओं की नींव रखी गई।

इससूची में सड़क निर्माण कार्य, पेयजल योजनाएं, एक मेडिकल कॉलेज, नर्सिंग कॉलेज, पुलिस बैरक, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, आईटीआई भवन, खेल स्टेडियम और कामकाजी महिलाओं के लिए हॉस्टल जैसी योजनाएं शामिल हैं। स्थानीय प्रशासन का दावा है कि, इन परियोजनाओं के पूरा होने से जिले में शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, बुनियादी ढांचे और रोजगार के अवसरों को नई रफ्तार मिलेगी।
जनता से जुड़े मुद्दों पर की बात
दिन का तीसरा और सबसे बड़ा कार्यक्रम था बुलंदशहर के नुमाइश मैदान में आयोजित जनसभा, जिसमें सीएम को सुनने के लिए हजारों की संख्या में लोग आये हुए थे। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने जनता को प्रदेश सरकार की विकास योजनाओं का ब्योरा दिया। साथ ही कानून-व्यवस्था, महिला सुरक्षा और किसानों के कल्याण से जुड़े मुद्दों पर भी विस्तार से बात रखी।
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में जोर देकर कहा कि, राज्य सरकार बिना किसी भेदभाव के प्रदेश के हर हिस्से में विकास कार्य करा रही है। खासतौर पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश को विकास की प्राथमिकता सूची में ऊपर रखा गया है। उन्होंने दावा किया कि, पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश की कानून-व्यवस्था में बड़ा मोर्चे पर बदलाव हुए हैं और आम जनता का भरोसा सरकार पर बढ़ा है।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
मुख्यमंत्री के दौरे को देखते हुए बुलंदशहर में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। कार्यक्रम स्थल से लेकर जनसभा स्थल तक भारी पुलिस बल तैनात रहा। जनसभा में स्थानीय जनप्रतिनिधियों के अलावा प्रशासनिक अधिकारी और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

बुलंदशहर का यह दौरा सिर्फ विकास परियोजनाओं के उद्घाटन तक सीमित नहीं रहा। इसने एक ऐसी कहानी को भी सामने ला दिया, जो शायद वर्षों तक गुमनाम रहती। एक ऐसे व्यक्ति की कहानी, जिसने बिना किसी लालच के अपनी जमीन बच्चों के भविष्य के नाम कर दी। राजपाल सिंह की यह मिसाल अब सिर्फ शिकारपुर या बुलंदशहर तक सीमित नहीं रही, बल्कि पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गई है।
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