
रामनगर। देवभूमि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हनुमान जयंती के पावन अवसर पर रामनगर प्रवास के दौरान न केवल अध्यात्म की शक्ति से प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की, बल्कि राज्य के पर्यटन और बुनियादी ढांचे के भविष्य को लेकर भी महत्वपूर्ण रोडमैप साझा किया।
हनुमान धाम में बजरंगबली की शरण में शीश नवाने पहुंचे मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड की ‘विंटर टूरिज्म’ (शीतकालीन यात्रा) की सफलता के आंकड़े साझा करते हुए बताया कि राज्य अब ‘ऑल वेदर टूरिज्म’ की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार की प्राथमिकता राज्य के धार्मिक स्थलों का कायाकल्प करना है ताकि वैश्विक स्तर पर उत्तराखंड की पहचान एक सुदृढ़ आध्यात्मिक केंद्र के रूप में स्थापित हो सके।
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रामनगर पहुंचने पर मुख्यमंत्री का स्वागत जिस उत्साह के साथ हुआ, वह न केवल राजनीतिक था बल्कि एक जन-जुड़ाव का प्रतीक भी था। ढोल-नगाड़ों और जय श्रीराम के उद्घोष के बीच मुख्यमंत्री ने जनता का अभिवादन स्वीकार किया और स्पष्ट संदेश दिया कि सरकार की योजनाओं का केंद्र बिंदु सेवा और सुशासन है।
बालाजी और हनुमान धाम में पूजा-अर्चना
हनुमान जयंती के पावन पर्व पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सबसे पहले रामनगर स्थित प्राचीन बालाजी मंदिर पहुंचे। वहां उन्होंने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा-अर्चना की और प्रदेशवासियों के कल्याण के लिए प्रार्थना की। इसके पश्चात मुख्यमंत्री हनुमान धाम छोई पहुंचे,जहां हनुमान जी की भव्य प्रतिमा के दर्शन कर उन्होंने आशीर्वाद लिया।

मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि हनुमान जी सेवा और समर्पण के प्रतीक हैं। राज्य सरकार भी इसी सेवा भाव के साथ उत्तराखंड के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक विकास पहुंचाने के लिए संकल्पित है। उन्होंने कहा कि देवभूमि के मंदिरों का कायाकल्प केवल निर्माण कार्य नहीं है, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और आने वाली पीढ़ियों को गौरवान्वित करने का एक पवित्र प्रयास है।
1.60 लाख श्रद्धालुओं ने रचा इतिहास
मुख्यमंत्री ने रामनगर में मीडिया और जनसमूह से बात करते हुए उत्तराखंड की बढ़ती धार्मिक साख पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने एक बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि इस वर्ष शीतकालीन यात्रा ने नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार, अब तक करीब एक लाख साठ हजार श्रद्धालु शीतकालीन यात्रा के दौरान उत्तराखंड के विभिन्न धार्मिक स्थलों और मंदिरों के दर्शन कर चुके हैं।
आमतौर पर उत्तराखंड में यात्रा सीजन कपाट खुलने के साथ ही चरम पर होता है, लेकिन धामी सरकार के शीतकालीन पर्यटन को बढ़ावा देने के प्रयासों ने इस धारणा को बदल दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि, शीतकाल में भी इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का आना इस बात का प्रमाण है कि, राज्य में धार्मिक पर्यटन के प्रति आकर्षण सालभर बना रहता है।

उन्होंने बताया कि, यह यात्रा आगामी 19 तारीख तक, यानी चारधाम के कपाट खुलने तक निरंतर जारी रहेगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार का लक्ष्य धार्मिक पर्यटन को इतना मजबूत करना है कि स्थानीय लोगों को उनके घर के पास ही रोजगार मिल सके और पलायन जैसी समस्याओं पर लगाम लगे।
कुंभ 2027 की तैयारी तेज
वर्ष 2027 में होने वाला कुंभ मेला उत्तराखंड के लिए केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर अपनी प्रबंधकीय क्षमता दिखाने का एक बड़ा अवसर है। मुख्यमंत्री धामी ने रामनगर में घोषणा की कि 2027 के कुंभ मेले की तैयारियां अभी से युद्ध स्तर पर शुरू कर दी गई हैं। उन्होंने कहा कि कुंभ केवल उत्तराखंड का नहीं, बल्कि संपूर्ण विश्व की आस्था का केंद्र है। करोड़ों की संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और स्वच्छता के लिए बुनियादी ढांचे का विकास किया जा रहा है।
सरकार का प्रयास है कि, 2027 का कुंभ अब तक का सबसे भव्य और दिव्य आयोजन हो। इसके लिए सड़कों के चौड़ीकरण, घाटों के सौंदर्यीकरण और डिजिटल सुविधाओं के विस्तार पर काम शुरू हो चुका है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि, कुंभ की तैयारियों में गुणवत्ता और समयबद्धता का विशेष ध्यान रखा जाए।
धार्मिक अनुष्ठानों के बाद मुख्यमंत्री रामनगर की अग्रवाल सभा में आयोजित ‘पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण कार्यक्रम’ में शामिल हुए। भाजपा कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने संगठन की मजबूती और जनसेवा के बीच के सेतु पर चर्चा की। मुख्यमंत्री ने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे सरकार और जनता के बीच की कड़ी बनें।
हर जरूरतमन्द तक पहुंचे योजना का लाभ
उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ हर जरूरतमंद तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने सेवा, सुशासन और अंत्योदय के मंत्र को दोहराते हुए कहा कि कार्यकर्ताओं को सक्रिय भूमिका निभानी होगी ताकि विकसित उत्तराखंड का लक्ष्य प्राप्त किया जा सके। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से केदारखंड और मानसखंड मंदिर माला मिशन का उल्लेख करते हुए बताया कि कैसे सरकार कुमाऊं और गढ़वाल के मंदिरों को एक सर्किट से जोड़कर विकास की नई धारा बहा रही है।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में केदारखंड और मानसखंड के विकास पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में केदारनाथ धाम और बदरीनाथ धाम का भव्य पुनर्निर्माण हो रहा है, वहीं दूसरी ओर कुमाऊं मंडल के पौराणिक मंदिरों को मानसखंड मंदिर माला मिशन के तहत विकसित किया जा रहा है।
रामनगर और उसके आसपास के क्षेत्रों में पर्यटन की अपार संभावनाओं को देखते हुए उन्होंने कहा कि राज्य के प्रमुख धार्मिक स्थलों के सौंदर्यीकरण और वहां तक पहुंचने वाली सड़कों के विकास के लिए सरकार बड़े निवेश कर रही है। इन प्रयासों का ही परिणाम है कि उत्तराखंड में हर वर्ष पर्यटकों और तीर्थयात्रियों की संख्या पिछले रिकॉर्ड तोड़ रही है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की पहचान अब केवल एक पहाड़ी राज्य के रूप में नहीं, बल्कि दुनिया के सबसे पसंदीदा आध्यात्मिक गंतव्य के रूप में सशक्त हो रही है।
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