
देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य के सुदूरवर्ती और औद्योगिक क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने तथा ग्रामीण अंचलों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री ने रविवार यानी 17 मई को उधमसिंह नगर जिले के सितारगंज विधानसभा क्षेत्र को एक बहुत बड़ी विकास की सौगात देते हुए क्षेत्रवासियों की वर्षों पुरानी मांग को पूरा कर दिया है।
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सीसी पुल के निर्माण की नींव रखी
उन्होंने शक्तिफार्म क्षेत्र को सिडकुल औद्योगिक क्षेत्र से सीधे जोड़ने के लिए सिसौना नदी पर करोड़ों रुपए की भारी-भरकम लागत से बनने वाले 150 मीटर स्पान के भव्य सीसी पुल के निर्माण कार्य का विधिवत भूमि पूजन और शुभारंभ किया। इस ऐतिहासिक पुल के शिलान्यास के बाद आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री धामी ने साफ तौर पर कहा कि उनकी सरकार केवल घोषणाएं करने में विश्वास नहीं रखती, बल्कि धरातल पर काम करके दिखाती है।
उन्होंने गर्व से कहा कि, केंद्र और राज्य की यह डबल इंजन सरकार जिस भी जन-कल्याणकारी कार्य का शिलान्यास करती है, पूरी ताकत लगाकर उसे तय समय सीमा के भीतर पूरा भी कराती है और फिर पूरी ईमानदारी के साथ उसका लोकार्पण कर जनता को समर्पित करती है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन में राजनीतिक शुचिता और विकासवादी राजनीति पर जोर देते हुए कहा कि वर्तमान सरकार जब भी जनता के बीच वोट मांगने या संवाद करने जाती है, तो वह किसी खोखले वादे के सहारे नहीं बल्कि पूरी ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ अपना रिपोर्ट कार्ड सामने रखती है।
उन्होंने कहा कि आज जनता भी यह देख रही है कि राज्य में किस तेजी के साथ विकास की बयार बह रही है। सितारगंज विधानसभा क्षेत्र के तहत शुरू हुए इस नए प्रोजेक्ट की तकनीकी और व्यावहारिक खूबियों को रेखांकित करते हुए सीएम धामी ने बताया कि करीब साढ़े 11 करोड़ रुपए की भारी लागत से शक्तिफार्म क्षेत्र को सिडकुल से जोड़ने वाले इस महासेतु का निर्माण किया जा रहा है।
कम हो जाएगी 9 किमी की दूरी
इस बहुप्रतीक्षित सेतु के बन जाने से सिडकुल सितारगंज में स्थित तमाम बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठानों, कारखानों और विकास खंड कार्यालय सिसौना तक पहुंचने के लिए स्थानीय निवासियों, श्रमिकों और व्यापारियों को अब लंबा चक्कर नहीं काटना पड़ेगा। इस पुल के चालू होते ही दोनों महत्वपूर्ण क्षेत्रों के बीच की दूरी में लगभग नौ किलोमीटर की भारी कमी आ जाएगी।
मुख्यमंत्री ने इस बुनियादी ढांचे के दूरगामी फायदों को समझाते हुए कहा कि, नौ किलोमीटर की दूरी कम होने से न केवल इस पूरे इलाके के लोगों के कीमती समय और महंगे ईंधन की रोजाना बड़ी बचत होगी, बल्कि रोजमर्रा का आवागमन भी पहले की तुलना में अत्यधिक सुगम, सुरक्षित, आरामदायक और किफायती हो जाएगा।
सिडकुल में काम करने वाले हजारों श्रमिकों और वहां माल पहुंचाने वाले भारी वाहनों को अब तक उबड़-खाबड़ और लंबे रास्तों से होकर गुजरना पड़ता था, जिससे उनका काफी समय बर्बाद होता था और गाड़ियों के रख-रखाव का खर्च भी बढ़ता था। अब इस आधुनिक सीसी पुल के बन जाने से इस पूरी बेल्ट का आर्थिक परिदृश्य बदल जाएगा।
फैसलों का किया जिक्र
उन्होंने दृढ़ता के साथ कहा कि, उत्तराखंड सरकार की यह सोची-समझी कोशिश है कि राज्य के बड़े और प्रमुख शहरों से लेकर सुदूर सीमांत गांवों तक हर स्तर पर इंफ्रास्ट्रक्चर यानी बुनियादी ढांचे को इतना मजबूत कर दिया जाए कि पलायन जैसी समस्याओं पर हमेशा के लिए लगाम लगाई जा सके। अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री धामी ने केवल सितारगंज ही नहीं, बल्कि पूरे तराई और कुमाऊं क्षेत्र के लिए किए गए अपनी सरकार के बड़े और ऐतिहासिक फैसलों का भी खुलकर जिक्र किया।
उन्होंने तराई क्षेत्र की लाइफलाइन माने जाने वाले प्रोजेक्ट की चर्चा करते हुए कहा कि वर्तमान सरकार ने दशकों से लटकी पड़ी जमरानी बांध बहुउद्देशीय परियोजना के निर्माण कार्य को अत्यधिक इच्छाशक्ति दिखाकर पुनः प्रारंभ करवाया है। इस महापरियोजना के दोबारा शुरू होने से पूरे तराई और भाबर क्षेत्र के लाखों परिवारों की पीने के शुद्ध पानी और खेतों की सिंचाई की विकराल समस्या का हमेशा-हमेशा के लिए स्थायी समाधान होने जा रहा है। जमरानी बांध के पूरा होने से न केवल कृषि क्षेत्र को नया जीवन मिलेगा, बल्कि भूजल स्तर में भी सुधार होगा और पेयजल की किल्लत पूरी तरह से समाप्त हो जाएगी।
गन्ना किसानों को मिले लाभ
कृषि और किसान कल्याण के प्रति अपनी सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने एक और बड़े नीतिगत फैसले की जानकारी मंच से साझा की। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की भाजपा सरकार ने राज्य के मेहनती गन्ना किसानों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने और उनकी आय में रिकॉर्ड बढ़ोतरी करने के उद्देश्य से गन्ने के सरकारी समर्थन मूल्य में सीधे 30 रुपये प्रति क्विंटल की एकमुश्त ऐतिहासिक वृद्धि की है। इस फैसले से चीनी का कटोरा कहे जाने वाले उधमसिंह नगर और हरिद्वार जैसे जिलों के लाखों गन्ना उत्पादक किसानों को सीधा आर्थिक लाभ मिल रहा है और उनके चेहरों पर खुशी वापस आई है।
मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में विरोधियों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि विकास के ये अभूतपूर्व कार्य केवल किसी एक विशेष जनपद या विधानसभा तक ही सीमित नहीं रखे गए हैं, बल्कि आज कोई भी व्यक्ति राज्य के जिस भी सुदूर या पहाड़ी क्षेत्र में जाएगा, उसे सभी जगह इसी प्रकार व्यापक और बड़े स्तर पर इंफ्रास्ट्रक्चर और जनकल्याण के काम होते हुए दिखाई देंगे। सरकार बिना किसी भेदभाव के ‘सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास’ के मूलमंत्र पर चलते हुए उत्तराखंड को देश का नंबर एक अग्रणी राज्य बनाने के लिए दिन-रात संकल्पबद्ध होकर काम कर रही है।
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