
देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड की पावन धरा पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक ऐसे आयोजन की अध्यक्षता की, जो न केवल सैन्य शौर्य के प्रति सम्मान का प्रतीक था, बल्कि एक पुत्र द्वारा अपने पिता के सिद्धांतों को जनसेवा के माध्यम से जीवित रखने का जीवंत उदाहरण भी बना।
खटीमा के खेतलसंडा में आयोजित इस गौरव सैनिक सम्मान समारोह का दृश्य अत्यंत भावुक और प्रेरणादायक रहा, जहां मुख्यमंत्री ने अपने पूज्य पिता स्व. सूबेदार शेर सिंह धामी की छठी पुण्यतिथि के अवसर पर प्रदेश के पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को करोड़ों रुपये की सौगातें सौंपी।
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सैनिक मिलन केंद्र का किया लोकार्पण
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर 715.51 लाख रुपये की लागत से नवनिर्मित सीएसडी कैंटीन और 162.26 लाख रुपये से बने सैनिक मिलन केंद्र का लोकार्पण किया। यह दोनों परियोजनाएं खटीमा और आसपास के क्षेत्रों के हजारों पूर्व सैनिकों के लिए एक बड़ी राहत बनकर आई हैं, जिन्हें अब अपनी बुनियादी जरूरतों और सामाजिक मेल-मिलाप के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा। कार्यक्रम में एनसीसी कैडेट्स द्वारा बैंड की धुनों के साथ मुख्यमंत्री का गर्मजोशी से स्वागत किया गया, जिससे पूरा वातावरण राष्ट्रभक्ति के रंग में सराबोर नजर आया।

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम की शुरुआत अपने पिता के चित्र पर श्रद्धा सुमन अर्पित कर की और इसके बाद नैनीताल, उधम सिंह नगर तथा चम्पावत जिलों के बलिदानियों को नमन करते हुए उनके परिजनों का सम्मान किया। इस ऐतिहासिक समारोह में मुख्यमंत्री ने अपनी संवेदनशीलता का परिचय देते हुए 60 वीरनारियों और 80 वीर योद्धाओं को शॉल ओढ़ाकर और उपहार देकर सम्मानित किया। संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री की आवाज़ में अपने पिता के प्रति गहरा सम्मान और एक सैनिक पुत्र होने का गर्व साफ झलक रहा था।
उन्होंने उन स्मृतियों को ताजा किया जब छह वर्ष पूर्व उन्होंने अपने पिता को खोया था। मुख्यमंत्री ने बताया कि उनके पिता उनके लिए अनुशासन, ईमानदारी और जिम्मेदारी के सबसे बड़े प्रतीक थे। उन्होंने साझा किया कि, बचपन में वे अपने पिता की वर्दी को बड़े सलीके से रखा हुआ देखते थे, जिससे उनके मन में जिज्ञासा और गर्व का भाव पैदा होता था। उनके पिता का मानना था कि वर्दी केवल एक फौजी की पहचान नहीं, बल्कि देश की रक्षा की एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी है।
सैन्य ऑपरेशनों पर गर्व
मुख्यमंत्री ने राजनीति में आने से पहले अपने पिता द्वारा दी गई उस सीख को भी याद किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि, राजनीति पद प्राप्त करने का साधन नहीं बल्कि जनसेवा का माध्यम होनी चाहिए। सैनिक पुत्र होने के नाते मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के रक्षा क्षेत्र में हो रहे ऐतिहासिक बदलावों पर भी विस्तार से चर्चा की।

उन्होंने कहा कि, आज भारत रक्षा सामग्री के निर्यात में दुनिया के शीर्ष देशों की सूची में शामिल हो चुका है, जो ‘मेक इन इंडिया’ से ‘मेक फॉर द वर्ल्ड’ की सफल यात्रा का प्रमाण है। रक्षा उत्पादन में हुई तीन गुना से अधिक की वृद्धि और निर्यात के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि भारत अब दुनिया के 80 से अधिक देशों को हथियार और उपकरण उपलब्ध करा रहा है।
आतंकवाद के खिलाफ भारत की जीरो टॉलरेंस नीति और सैन्य ऑपरेशनों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने गर्व जताया कि, आज की सेना दुश्मन को उसके घर में घुसकर जवाब देना जानती है। राज्य सरकार की उपलब्धियों को गिनाते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि उत्तराखंड सरकार ने वीरता पुरस्कारों की राशि में अभूतपूर्व बढ़ोतरी की है। परमवीर चक्र विजेताओं की राशि को 50 लाख से बढ़ाकर डेढ़ करोड़ रुपये करना इसका सबसे बड़ा प्रमाण है, जो पूरे देश में सबसे अधिक है।
स्टाम्प ड्यूटी में 25 प्रतिशत की छूट
मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड को केवल देवभूमि ही नहीं बल्कि वीरभूमि बताते हुए कहा कि, बलिदानियों की स्मृति को अमर रखने के लिए देहरादून में भव्य सैन्य धाम का निर्माण कराया जा रहा है। सरकार ने शहीद परिवारों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की अवधि को दो वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष कर दिया है। इसके अलावा, वीरता पुरस्कार प्राप्त सैनिकों के लिए बसों में मुफ्त यात्रा और संपत्ति खरीद पर स्टाम्प ड्यूटी में 25 प्रतिशत की छूट जैसे निर्णय लिए गए हैं।

सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने भी धामी सरकार द्वारा सैनिकों के कल्याण के लिए उठाए गए कदमों की सराहना की और बताया कि किस प्रकार 28 पवित्र नदियों के जल और सैनिकों के आंगन की मिट्टी से सैन्य धाम का निर्माण किया गया है। समारोह में उपस्थित अन्य वक्ताओं और वरिष्ठ अधिकारियों ने भी स्वर्गीय सूबेदार शेर सिंह धामी को श्रद्धांजलि दी और मुख्यमंत्री द्वारा सैन्य परिवारों के लिए किए जा रहे कार्यों की सराहना की। यह समारोह एक बार फिर यह साबित कर गया कि, धामी सरकार सैनिकों को राष्ट्र का सर्वोच्च नायक मानती है और उनके कल्याण के लिए विकल्प रहित संकल्प के साथ निरंतर आगे बढ़ रही है।
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