सीएम धामी ने केंद्र से मांगी ‘नमो भारत’, मंजूर हुआ प्रस्ताव तो बदल जाएगी प्रदेश की तस्वीर

नई दिल्ली। उत्तराखंड सरकार ने राज्य की कनेक्टिविटी और पर्यटन ढांचे को नई रफ्तार देने के उद्देश्य से एक बड़ा प्रस्ताव केंद्र सरकार के सामने रखा है। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने मेरठ से हरिद्वार और ऋषिकेश तक नमो भारत RRTS कॉरिडोर के विस्तार की मांग की है। इसके साथ ही देहरादून-हरिद्वार-ऋषिकेश मेट्रो कॉरिडोर का प्रस्ताव भी रखा गया है। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर के साथ बैठक में इस परियोजना को प्राथमिकता देने का आग्रह किया है। माना जा रहा है कि अगर प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो दिल्ली से ऋषिकेश तक का सफर महज ढाई से तीन घंटे में पूरा होगा।

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पीक सीजन में चुनौती बन जाती है यात्रा

सीएम धामी का कहना है कि, उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से पर्यटन और तीर्थाटन पर टिकी है। यहां हर साल करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु चारधाम यात्रा और हरिद्वार-ऋषिकेश के दर्शन के लिए आते हैं। वर्तमान में नेशनल हाईवे पर ट्रैफिक का इतना अधिक दबाव है कि, पीक सीजन में यात्रा करना एक बड़ी चुनौती बन जाता है। हाइवे पर लोगों को घंटों जाम का सामना करना पड़ता है। ऐसे में नमो भारत जैसी हाई-स्पीड रेल सेवा इस दबाव को कम करने का सबसे प्रभावी समाधान साबित हो सकती है।

Namo Bharat

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने देहरादून-हरिद्वार-ऋषिकेश मेट्रो कॉरिडोर का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया और आग्रह किया कि, इन तीनों महत्वपूर्ण शहरों को एक एकीकृत मास रैपिड ट्रांजिट सिस्टम से जोड़ा जाए। इस प्रस्ताव का उद्देश्य न केवल पर्यटकों को सुविधा देना है बल्कि स्थानीय कामकाजी लोगों और छात्रों के लिए भी दैनिक आवागमन को सुगम बनाना है।

नमो भारत ट्रेन के विस्तार का यह नया गलियारा मेरठ के मोदीपुरम जंक्शन से शुरू होकर उत्तर दिशा की ओर बढ़ेगा और मुजफ्फरनगर के रास्ते रुड़की होते हुए हरिद्वार और अंत में ऋषिकेश तक पहुंचेगा। तकनीकी रूप से यह विस्तार न केवल उत्तराखंड के लिए बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए भी वरदान साबित होगा, क्योंकि मोदीपुरम एक मुख्य इंटरचेंज पॉइंट बन जाएगा जहां से दिल्ली और उत्तराखंड के बीच कनेक्टिविटी का एक बड़ा जाल विकसित होगा।

वीकेंड पर्यटन में आएगा उछाल

रुड़की जैसे शैक्षणिक और शोध संस्थानों वाले शहर के लिए यह कॉरिडोर छात्रों और शोधकर्ताओं को दिल्ली-एनसीआर के साथ सीधा और तेज लिंक प्रदान करेगा, जिससे क्षेत्र में बौद्धिक और आर्थिक गतिविधियों को नई ऊर्जा मिलेगी। राज्य सरकार की इस योजना के पीछे केवल परिवहन की सुविधा का उद्देश्य नहीं है बल्कि इसके व्यापक आर्थिक प्रभाव भी देखे जा रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि, जब किसी क्षेत्र में हाई-स्पीड रेल नेटवर्क पहुंचता है, तो वहां का रियल एस्टेट सेक्टर और लॉजिस्टिक्स बिजनेस तेजी से फलने-फूलने लगता है। नमो भारत कॉरिडोर के आने से हरिद्वार और ऋषिकेश के आसपास होटल इंडस्ट्री, होमस्टे और वेलनेस रिसॉर्ट्स में भारी निवेश आने की उम्मीद है। जब दिल्ली जैसे महानगरों से ऋषिकेश पहुंचना मेट्रो में सफर करने जैसा आसान हो जाएगा तो वीकेंड पर्यटन में अभूतपूर्व उछाल आएगा, जिससे स्थानीय छोटे दुकानदारों, गाइडों और टैक्सी संचालकों की आय में भी वृद्धि होगी। यह कॉरिडोर उत्तराखंड की जीडीपी को बढ़ाने में एक उत्प्रेरक की भूमिका निभा सकता है।

 कठिन है भौगोलिक स्थिति

हालांकि, इतनी बड़ी और जटिल परियोजना के मार्ग में चुनौतियों की भी कमी नहीं है। सबसे बड़ी चुनौती पर्यावरणीय मंजूरी को लेकर है क्योंकि प्रस्तावित रूट का एक हिस्सा राजाजी नेशनल पार्क और संवेदनशील वन क्षेत्रों के करीब से गुजर सकता है। वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और उनके आवागमन के रास्तों को बिना नुकसान पहुंचाए ट्रैक बिछाना एक बड़ी इंजीनियरिंग चुनौती होगी।

इसके अलावा एनएच-58 के किनारे की घनी आबादी वाले क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण करना और पहाड़ी इलाकों की कठिन भौगोलिक स्थिति के बीच एलिवेटेड ट्रैक या सुरंगों का निर्माण करना परियोजना की लागत को काफी बढ़ा सकता है। मुख्यमंत्री ने इन चुनौतियों को स्वीकार करते हुए केंद्र सरकार से तकनीकी विशेषज्ञता और वित्तीय सहायता की मांग की है ताकि पर्यावरण और विकास के बीच संतुलन बनाकर इस काम को समय पर पूरा किया जा सके।

परियोजना के सफल होने पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों को भी बड़ा लाभ मिलेगा, क्योंकि लॉजिस्टिक्स और माल ढुलाई के लिए एक नया विकल्प तैयार हो जाएगा। रुड़की और हरिद्वार के सिडकुल जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले पेशेवरों के लिए अब देहरादून या दिल्ली से आना-जाना आसान हो जाएगा, जिससे पलायन रोकने में भी मदद मिलेगी।

 बदलेगी उत्तराखंड के भविष्य की रूपरेखा

मुख्यमंत्री धामी ने केंद्रीय मंत्री को भरोसा दिलाया कि, राज्य सरकार भूमि अधिग्रहण और अन्य प्रशासनिक सहयोग के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने इस बात पर विशेष ध्यान दिलाया कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विजन उत्तराखंड को देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करना है और यह हाई-स्पीड ट्रेन उस विजन को साकार करने की दिशा में सबसे बड़ा कदम होगा।

निष्कर्ष के तौर पर यह कहा जा सकता है कि, नमो भारत कॉरिडोर का विस्तार उत्तराखंड के भविष्य की रूपरेखा बदल सकता है। यह केवल पटरियों पर दौड़ती एक ट्रेन नहीं होगी बल्कि यह राज्य के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर, किसानों के लिए बाजार तक तेज पहुंच और पर्यटकों के लिए एक सुगम अनुभव का सेतु बनेगी।

विकास की मुख्यधारा से जुड़ेगा राज्य

अब सबकी निगाहें केंद्र सरकार के आगामी बजटीय आवंटन और इस प्रस्ताव पर मिलने वाली तकनीकी मंजूरी पर टिकी हैं। यदि यह सपना हकीकत बनता है, तो देवभूमि की यात्रा न केवल आध्यात्मिक रूप से शांतिपूर्ण होगी बल्कि समय की बचत और आधुनिकता के मामले में भी विश्वस्तरीय होगी। यह कॉरिडोर न केवल दिल्ली और ऋषिकेश के बीच की दूरी कम करेगा बल्कि यह उत्तराखंड को आधुनिक भारत के विकास के मुख्यधारा से मजबूती से जोड़ देगा।

 

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