बुनकरों के लिए विकसित होगा क्लस्टर मॉडल, खत्म होगा बिचौलियों का राज

लखनऊ। प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत और अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में अहम योगदान देने वाले बुनकर समुदाय के जीवन को और अधिक बेहतर बनाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बेहतरीन रोडमैप तैयार किया है। गुरुवार को राजधानी लखनऊ में हथकरघा विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान सीएम ने स्पष्ट किया कि, बुनकर केवल परंपरा के संवाहक मात्र नहीं हैं, वे प्रदेश की अर्थव्यवस्था के असली शिल्पकार हैं।

इसे भी पढ़ें- योगी के यूपी में ‘श्वेत क्रांति’, महिलाएं संभाल रहीं 5000 करोड़ की डेयरी कमान

दुनिया के मंच पर लाए जाएंगे बुनकर

बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि, बुनकरों की आय बढ़ाने, उनके सम्मान की रक्षा और आजीविका में स्थिरता लाने के लिए अब केवल कागजी योजनाओं से काम नहीं चलेगा, बल्कि एक सुदृढ़ और परिणामोन्मुख क्लस्टर-आधारित तंत्र विकसित करना होगा। मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि, आधुनिक तकनीक, वैश्विक बाजार और नई डिजाइनों के अभाव को दूर कर उत्तर प्रदेश के बुनकरों को दुनिया के मंच पर प्रतिस्पर्धी बनाया जाएगा।

UP Bunkar Seva

बैठक में खादी एवं वस्त्रोद्योग मंत्री राकेश सचान सहित शासन के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। इस दौरान बुनकरों को बिजली बिल से राहत दिलाने और सौर ऊर्जा से जोड़ने जैसे क्रांतिकारी फैसलों पर भी चर्चा हुई।

सीएम योगी ने स्वीकार किया कि, मौजूदा समय में बुनकरों के सामने कई गंभीर चुनौतियां हैं, जैसे कि कच्चे माल की कीमत, आधुनिक डिजाइनों की कमी और बिचौलिए, जिनकी वजह से सीधे बाजार तक बुनकरों की पहुंच न हो पाना आदि, जिन्हें दूर करना अति आवश्यक है। अब मुख्यमंत्री ने इन समस्याओं के निदान के लिए ‘क्लस्टर-आधारित विकास’ तंत्र बनाने का निर्देश दिया है।

छठवें स्थान पर है हथकरघा उद्योग

उन्होंने कहा कि, बुनकर बहुल क्षेत्रों की पहचान कर वहां ऐसे क्लस्टर विकसित किए जाएं जो केवल उत्पादन केंद्र न हों, बल्कि पूरी वैल्यू चेन के रूप में कार्य करें। इन क्लस्टरों में डिजाइनिंग, ब्रांडिंग, पैकेजिंग और सीधे बाजार तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए एक ही छत के नीचे सारा ढांचा उपलब्ध कराया जाएगा। मुख्यमंत्री का विजन है कि, बुनकर समूहों को पंजीकृत इकाइयों के रूप में संगठित किया जाए ताकि सामूहिक उत्पादन और विपणन के जरिए उनकी सौदेबाजी की शक्ति बढ़े।

बैठक के दौरान प्रस्तुत किए गए आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश हथकरघा और वस्त्र उद्योग के क्षेत्र में देश में छठवें स्थान पर है। वर्तमान में प्रदेश में लगभग 1.99 लाख बुनकर सीधे तौर पर कार्यरत हैं। उत्तर प्रदेश कालीन, दरी और मैट के उत्पादन में देश का नेतृत्व कर रहा है, जबकि बेडशीट, फर्निशिंग और ब्लैंकेट जैसे उत्पादों में भी राज्य की पकड़ बहुत मजबूत है।

वर्ष 2024-25 के निर्यात आंकड़ों ने भी प्रदेश की क्षमता को दर्शाया है। देश के कुल ₹1178.93 करोड़ के हथकरघा निर्यात में उत्तर प्रदेश का योगदान ₹109.40 करोड़ (लगभग 9.27 प्रतिशत) रहा है। मुख्यमंत्री ने इस हिस्सेदारी को दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने कहा कि, जब क्लस्टर मॉडल पूरी तरह सक्रिय होगा, तो उत्तर प्रदेश का निर्यात न केवल मात्रा में बढ़ेगा, बल्कि गुणवत्ता में भी विश्व स्तरीय होगा।

सीधे बुनकरों की जेब में जाए मुनाफ़ा

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट संदेश दिया कि, कोई भी उत्पाद तभी सफल होता है जब वह बाजार की तात्कालिक मांग के अनुरूप हो। उन्होंने निर्देश दिए कि पारंपरिक कला को आधुनिक स्वाद के साथ जोड़ा जाए। इसके लिए उन्होंने डिजाइनर-कम-मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव और डिजाइन हाउस/सोर्सिंग-बाइंग एजेंसी जैसे संस्थागत तंत्र को लागू करने को कहा।

यह एजेंसियां बुनकरों और बड़े अंतरराष्ट्रीय एक्सपोर्ट हाउसों के बीच सेतु का काम करेंगी। इससे बुनकरों को यह पता चलेगा कि, दुनिया के बाजारों में किस तरह के रंग, पैटर्न और कपड़ों की मांग है। मुख्यमंत्री ने ई-कॉमर्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के विस्तार पर भी विशेष ध्यान देने को कहा, ताकि बुनकर अपने उत्पादों को अमेज़न, फ्लिपकार्ट और अन्य ग्लोबल पोर्टल्स पर सीधे बेच सकें और बिचौलियों का मुनाफा सीधे बुनकरों की जेब में जाए।

पावरलूम बुनकरों के लिए बिजली का बिल हमेशा से एक बड़ी चिंता का विषय रहा है। इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री ने हथकरघा विभाग और पावर कॉर्पोरेशन को मिलकर एक संयुक्त कार्ययोजना बनाने का निर्देश दिया है। योगी आदित्यनाथ ने विशेष रूप से सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने पर बल दिया।

सोलर पैनल लगाने की योजना

उन्होंने कहा कि यदि बुनकरों की इकाइयों को सौर ऊर्जा से जोड़ दिया जाए, तो उनकी बिजली लागत में भारी कमी आएगी। यह न केवल उनके उत्पादन खर्च को कम करेगा बल्कि उन्हें दीर्घकालिक आर्थिक राहत भी प्रदान करेगा। सरकार सौर पैनलों की स्थापना के लिए विशेष सब्सिडी और प्रोत्साहन योजनाएं लाने पर विचार कर रही है, जिससे पारंपरिक बुनकरी उद्योग ग्रीन और सस्टेनेबल बन सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि, प्रत्येक क्लस्टर में बुनकरों का पंजीकरण अनिवार्य किया जाए, ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे असली लाभार्थी तक पहुंचे। उन्होंने बेसलाइन सर्वे, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने और परियोजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सतत अनुश्रवण की व्यवस्था करने को कहा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि, नीति ऐसी संतुलित और व्यावहारिक होनी चाहिए जिससे बुनकरों को वास्तविक राहत मिले और उत्तर प्रदेश की पारंपरिक बुनकरी को एक सशक्त वैश्विक आधार प्राप्त हो सके।

ओडीओपी योजना को मिलेगी गति

योगी सरकार की यह पहल उत्तर प्रदेश के बुनकर समुदाय के लिए एक स्वर्णिम युग की शुरुआत मानी जा रही है। क्लस्टर विकास, आधुनिक तकनीक, सौर ऊर्जा और अंतरराष्ट्रीय मार्केटिंग का यह संगम न केवल बुनकरों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाएगा, बल्कि ‘ओडीओपी’ जैसी योजनाओं को भी नई गति प्रदान करेगा। मुख्यमंत्री का यह विजन वोकल फॉर लोकल को वैश्विक स्तर पर ले जाने का एक ठोस कदम है।

 

इसे भी पढ़ें- 70 साल से विस्थापित हिंदुओं का वनवास खत्म, मात्र 1 रुपये की लीज पर जमीन देगी योगी सरकार

Related Articles

Back to top button