
जैसे-जैसे सूरज की तपिश बढ़ रही है और पारा आसमान छू रहा है, वैसे-वैसे शरीर को भीतर से ठंडा और हाइड्रेटेड रखने की चुनौती भी बढ़ती जा रही है। इस चिलचिलाती धूप और उमस भरे मौसम में प्रकृति का सबसे अनमोल उपहार नारियल पानी है जो अक्सर लोगों को नजर आता है। इससे न सिर्फ प्यास बुझती है, बल्कि भरपूर मात्रा में इलेक्ट्रोलाइट्स से होने से शरीर को तुरंत नई ऊर्जा भी मिलती है, लेकिन कई बार हम बाजार में नारियल खरीदते समय एक बड़ी दुविधा में फंस जाते हैं की इसमें पानी होगा या नहीं।
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दुकानदार से साझा किए राज
कई बार ऐसा होगा है कि, जब हम 60 से 80 रुपये खर्च करके नारियल घर लाते हैं और उसे काटते, हैं तो पता चलता है कि, उसमें नाममात्र का पानी था या वह अंदर से खराब निकला। आपकी इसी परेशानी को हल करने के लिए हमने आज एक अनुभवी नारियल विक्रेता से खास बातचीत की, जिन्होंने सदियों पुराने और आजमाए हुए ऐसे राज साझा किए हैं, जिन्हें जानकर आप भी नारियल चुनने के ‘मास्टर’ बन जाएंगे।

गर्मियों के इस सीजन में सही नारियल का चुनाव करना भी अपने आप में एक कला है, जिसमें आकार से लेकर उसकी आवाज तक सब कुछ मायने रखता है। अक्सर उपभोक्ताओं के मन में यह धारणा रहती है कि, जो नारियल आकार में सबसे बड़ा दिखेगा, उसमें ढेर सारा पानी होगा, लेकिन नारियल बेचने वाले अनुभवी जानकारों का कहना है कि, यह सबसे बड़ी गलतफहमी है।
बड़े आकार के नारियल अक्सर परिपक्वता के उस चरण में पहुंच चुके होते हैं, जहां पानी सूखकर मलाई का रूप लेने लगता है। विक्रेता की सलाह के अनुसार, हमेशा मध्यम आकार का नारियल ही खरीदना चाहिए। ये नारियल न तो बहुत कच्चे होते हैं और न ही बहुत ज्यादा पके हुए, जिसके कारण इनमें पानी का संतुलन सबसे सटीक रहता है। मध्यम आकार के नारियल में पानी की मात्रा और उसका स्वाद दोनों ही उत्तम पाए जाते हैं।
कान के पास ले जाकर हिलाए
नारियल की गुणवत्ता जांचने का सबसे लोकप्रिय और वैज्ञानिक तरीका है इसे कान के पास ले जाकर हिलाना और उसे परखना कि इसमें कितना पानी होगा, लेकिन अक्सर लोग यहां भी धोखा खा जाते हैं। आमतौर पर लोग सोचते हैं कि, अगर नारियल के अंदर पानी छलकने की तेज आवाज आ रही है, तो वह पानी से भरा हुआ होगा, जबकि असलियत इसके ठीक उलट है।
नारियल विक्रेता का कहना है कि, अगर हिलाने पर पानी के छलकने की तेज आवाज आए, तो इसका सीधा मतलब है कि, नारियल में पानी कम हवा ज्यादा है। दरअसल, जिस नारियल में पानी ज्यादा होता है, उसमें हिलने के लिए जगह ही नहीं बचती, इसलिए उसे हिलाने पर या तो बिल्कुल आवाज नहीं आती या बहुत ही धीमी आवाज सुनाई देती है, इसलिए अगली बार जब आप नारियल खरीदने जाएं तो वहीं वाला खरीदे जो कम आवाज करता हो, क्योंकि वही आपको भरपूर पानी की गारंटी देगा।
बाहरी बनावट से जानें
नारियल की बाहरी बनावट और उसकी भौतिक संरचना भी उसके अंदर मौजूद पानी की मात्रा के बारे में बताती है। दुकानदार के अनुसार, नारियल खरीदते समय उसके शेप पर ध्यान देना बहुत जरूरी होता है। अक्सर बाजार में ऐसे नारियल मिलते हैं, जो ऊपर से थोड़े तिकोने या तीन कोनों वाले दिखाई देते हैं। ऐसे नारियल अक्सर अंदर से संकुचित होते हैं और उनमें पानी का भंडारण कम होता है। इसके विपरीत, जो नारियल पूरी तरह से गोल या अंडाकार नजर आते हैं, उनकी पानी रखने की क्षमता कहीं अधिक होती है। गोल नारियल की आंतरिक बनावट ऐसी होती है जो अधिकतम तरल पदार्थ को सुरक्षित रख सके, इसलिए, तिकोने नारियल के बजाय गोल और सुडौल नारियल खरीदना बेहतर और समझदारी भरा फैसला होता है।
रंग से पहचाने
नारियल की सुंदरता और उसके हरे रंग को लेकर भी लोगों के बीच एक भ्रम की स्थिति रहती है। हम अक्सर एकदम चमकदार और गहरे हरे रंग का नारियल देखकर उसकी ओर आकर्षित होते हैं, लेकिन असल राज नारियल के सूखेपन में छिपा होता है। विक्रेता ने एक चौंकाने वाला सच बताते हुए कहा कि, जिस नारियल का बाहरी छिलका थोड़ा सूखा, हल्का भूरा या रफ नजर आता है, वह अक्सर पानी से लबालब भरा होता है। सूखे छिलके वाले नारियल इस बात का संकेत देते हैं कि नारियल ने अपना पोषण पूरी तरह से प्राप्त कर लिया है और वह अंदरूनी तौर पर पूरी तरह से तैयार है। कई बार ऐसे सूखे दिखने वाले नारियल से तीन गिलास तक पानी निकल आता है, जो किसी भी चमकदार हरे नारियल की तुलना में कहीं अधिक होता है।
वजन नापें
इसके अलावा, नारियल का वजन उसकी शुद्धता और मात्रा का सबसे बड़ा पैमाना है। जब आप अपनी हथेलियों में दो एक जैसे दिखने वाले नारियल लेते हैं, तो उनमें से जो ज्यादा भारी महसूस हो, उसे ही चुनें। भारीपन इस बात का प्रमाण है कि, उसके भीतर पानी का घनत्व अधिक है। हल्का नारियल इस बात की ओर इशारा करता है कि या तो उसका पानी समय के साथ सूख गया है या उसमें कोई रिसाव था जिससे पानी कम हो गया है। वजन की यह मामूली सी परख आपको पैसे की बर्बादी से बचा सकती है।
डंठल से भी होती है पहचान
नारियल की पहचान उसके ऊपरी हिस्से यानी डंठल से की जानी चाहिए। यदि नारियल का डंठल वाला हिस्सा अंदर की ओर थोड़ा धंसा हुआ है और उसके आसपास का हिस्सा ताजा नजर आता है, तो वह नारियल ताजा है। यदि उस हिस्से पर किसी भी प्रकार का कालापन, छेद या फंगस जैसी परत दिखाई दे, तो उसे तुरंत छोड़ देना चाहिए, क्योंकि ऐसी स्थिति में नारियल अंदर से सड़ा हुआ या बदबूदार निकल सकता है। इन तमाम बारीकियों को ध्यान में रखकर यदि आप नारियल की खरीदारी करते हैं, तो न केवल आप भीषण गर्मी में अपनी प्यास को तृप्त कर पाएंगे, बल्कि हर बार आपको एक बेहतरीन, मीठा और ढेर सारा पानी देने वाला नारियल ही मिलेगा।
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