
योगी सरकार में 1098 चाइल्ड हेल्पलाइन से 2.31 लाख से अधिक बच्चों को मिली सहायता
रेलवे स्टेशनों व बस अड्डों पर भी संकटग्रस्त बच्चों की मदद को मिल रही मदद
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बच्चों की सुरक्षा और देखभाल हेतु योगी सरकार की व्यवस्था बेहद मजबूत हो चुकी है। महिला कल्याण विभाग द्वारा संचालित 1098 चाइल्ड हेल्पलाइन के जरिए संकटग्रस्त बच्चों को चौबीसों घंटे तत्काल मदद पहुंचाई जा रही है। प्रदेश सरकार के इस प्रयास से अब तक राज्य में 2.31 लाख से ज्यादा बच्चों को लाभान्वित किया गया है। इनमें बेसहारा, गुमशुदा, बाल श्रमिक और शोषण का सामना कर रहे बच्चे सम्मिलित हैं। ये आंकड़े प्रमाणित करते हैं कि प्रदेश में बाल संरक्षण का एक सशक्त और संवेदनशील ढांचा तैयार हुआ है, जो पीड़ितों तक निर्धारित समय में सहायता सुनिश्चित कर रहा है।
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संकटग्रस्त बच्चों को त्वरित सहायता
महिला कल्याण विभाग की निदेशक डॉ. वंदना वर्मा ने बताया कि यह सेवा अब जमीनी स्तर पर प्रभावी नेटवर्क के रूप में कार्य कर रही है, जहां हर जिले में हेल्पलाइन यूनिट सक्रिय रूप से संचालित है और संकट में फंसे बच्चों तक तुरंत पहुंच सुनिश्चित की जा रही है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में ही 77 हजार से अधिक बच्चों को हेल्पलाइन के माध्यम से मदद मिली है, जो इसकी बढ़ती पहुंच और प्रभावशीलता को दर्शाता है।
1098 चाइल्ड हेल्पलाइन के तहत त्वरित बचाव व्यवस्था सुनिश्चित की गई है, जिसमें कॉल प्राप्त होते ही टीम 60 मिनट के भीतर आपात स्थिति में फंसे बच्चों तक पहुंचकर उन्हें सुरक्षित निकालती है। यह सेवा 24 घंटे पुलिस सहायता, चिकित्सा सुविधा, आश्रय और कानूनी परामर्श उपलब्ध कराती है, जिससे बच्चों को हर स्तर पर संरक्षण मिलता है। साथ ही, मुसीबत में फंसे बच्चों का बाल कल्याण समिति के माध्यम से पुनर्वास कर उन्हें उनके परिवार से मिलाने की व्यवस्था भी की गई है।
भटके बच्चों को मिल रही सहायता
1098 चाइल्ड हेल्पलाइन सेवा को रेलवे स्टेशनों और बस अड्डों तक विस्तारित किया गया है, जिससे ऐसे स्थानों पर भटकने वाले या जोखिम में पड़े बच्चों तक तत्काल पहुंच बनाई जा सके। इसके अंतर्गत राज्य स्तर पर कंट्रोल रूम, समस्त जनपदों में चाइल्ड हेल्पलाइन यूनिट, 28 रेलवे स्टेशन यूनिट व 11 बस स्टैंड यूनिट की स्थापना की गई है। यह व्यवस्था बाल तस्करी और बाल शोषण जैसे अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में भी सहायक बन रही है। योगी सरकार का यह मॉडल बाल सुरक्षा के क्षेत्र में एक सशक्त, जवाबदेह और सक्रिय व्यवस्था के रूप में उभरकर सामने आया है।
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