
देहरादून। उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा पर आने वाले देश-विदेश के लाखों श्रद्धालुओं के लिए इस वर्ष एक बड़ी राहत भरी खबर आई है। हिमालय की दुर्गम वादियों में स्थित पावन धामों की यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा को मजबूत बनाने के उद्देश्य से मानव उत्थान सेवा समिति ने 10 करोड़ रुपये का सामूहिक दुर्घटना बीमा कराया है।
इसे भी पढ़ें- चारधाम यात्रा पर ऊर्जा संकट? सीएम धामी ने केंद्र से मांगी 100% सप्लाई
मंत्री सतपाल महाराज धामी को सौंपा चेक
प्रदेश के पर्यटन, धर्मस्व एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने निर्धारित 3 लाख 67 हजार 995 रुपये की प्रीमियम राशि का चेक मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को सौंपकर इस योजना को औपचारिक रूप से शुरू कर दिया। चारधाम यात्रा बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री उत्तराखंड की सांस्कृतिक एवं धार्मिक पहचान है।
करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र होने के बावजूद यह यात्रा अत्यंत दुर्गम और चुनौतीपूर्ण होती है। हिमालय की ऊंची चोटियों, अप्रत्याशित मौसम परिवर्तन, भूस्खलन, बादल फटने और ऊंचाई से संबंधित स्वास्थ्य जोखिमों के कारण हर वर्ष कई श्रद्धालु प्रभावित होते हैं। इन्हीं कठिनाइयों को देखते हुए मानव उत्थान सेवा समिति लगातार कई वर्षों से तीर्थयात्रियों को मुफ्त बीमा सुरक्षा उपलब्ध करा रही है।

इस वर्ष भी यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी के माध्यम से और बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के सहयोग से यह 10 करोड़ रुपये का कवरेज तैयार किया गया है। योजना के अनुसार चारों धामों के लिए अलग-अलग ढाई-ढाई करोड़ रुपये का वित्तीय कवर आरक्षित है। यात्रा मार्ग या मंदिर परिसर में किसी अप्रत्याशित घटना जैसे भगदड़, प्राकृतिक आपदा (बाढ़, बादल फटना, भूस्खलन), या अन्य दुखद घटना होने पर प्रभावित श्रद्धालु या उनके परिवार को तत्काल एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी।
यह व्यवस्था इसलिए की गई है ताकि पीड़ित परिवारों को सरकारी सहायता की लंबी प्रक्रिया का इंतजार न करना पड़े। पिछले वर्षों के अनुभव से पता चला है कि, यह बीमा न केवल वित्तीय मदद देता है बल्कि परिवारों को मानसिक ढांढस भी प्रदान करता है।
केदारनाथ यात्रा की चुनौतियां
चारधाम में सबसे अधिक कठिन केदारनाथ धाम की यात्रा मानी जाती है। समुद्र तल से लगभग 11,755 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह धाम सोनप्रयाग और गौरीकुंड से लंबी खड़ी चढ़ाई के बाद पहुंचता है। उच्च ऊंचाई पर ऑक्सीजन की कमी, तेजी से बदलता मौसम, अचानक बर्फबारी और तीव्र ठंड स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा करती है। हर वर्ष यात्रा सीजन में सैकड़ों श्रद्धालु उच्च रक्तचाप, सांस की तकलीफ, साइलेंट हार्ट अटैक, ऑक्सीजन स्तर में गिरावट और मल्टीपल ऑर्गन फेलियर जैसी समस्याओं का शिकार होते हैं।खासकर बुजुर्ग, महिलाएं और पहले से बीमार व्यक्ति अधिक जोखिम में रहते हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि, यात्रा पर जाने से पहले गहन मेडिकल चेकअप जरूरी है। हृदय रोग, अस्थमा, उच्च रक्तचाप या डायबिटीज वाले यात्रियों को डॉक्टर की सलाह के बिना यात्रा नहीं करनी चाहिए। उत्तराखंड सरकार भी इस बार स्वास्थ्य सुरक्षा पर विशेष ध्यान दे रही है। यात्रियों के ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के समय स्वास्थ्य स्व-घोषणा पत्र अनिवार्य किया गया है। चारों धामों और यात्रा मार्ग पर अत्याधुनिक स्वास्थ्य केंद्र, डॉक्टरों की टीमें, एंबुलेंस और हेलीकॉप्टर सेवाएं 24 घंटे तैयार रखी गई हैं।
मंत्री सतपाल महाराज की अपील
मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित कार्यक्रम में पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि, चारधाम यात्रा राज्य के धार्मिक पर्यटन की रीढ़ है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा सरकार और सामाजिक संस्थाओं की संयुक्त जिम्मेदारी है। उन्होंने सभी यात्रियों से अपील की कि यात्रा से पहले अपने स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखें। नियमित दवाएं, प्राथमिक चिकित्सा किट और जरूरी दस्तावेज साथ रखें। हिमालयी क्षेत्र में मौसम अचानक बदल सकता है, इसलिए प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।

यह बीमा केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि दूर-दराज से आने वाले गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए मानसिक सुरक्षा का माध्यम भी है। अप्रत्याशित घटना होने पर त्वरित एयरलिफ्ट और मदद संभव हो पाती है। इस अवसर पर बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी, भाजपा युवा नेता सुयश रावत और शासन के कई अधिकारी मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि, देवभूमि में आने वाले हर श्रद्धालु की सुरक्षा और सुविधा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। सामाजिक संस्थाओं का सहयोग यात्रा प्रबंधन को और अधिक मजबूत बनाता है।
यात्रा को सरल और सुगम बनाने का प्रयास
मानव उत्थान सेवा समिति द्वारा किया गया यह सामूहिक दुर्घटना बीमा चारधाम यात्रा को सुरक्षित बनाने की दिशा में एक सराहनीय कदम है। भौगोलिक चुनौतियों से भरी इस यात्रा में स्वास्थ्य सावधानियां, सरकारी तैयारियां और सामाजिक पहल मिलकर श्रद्धालुओं को नई उम्मीद और सुरक्षा का भरोसा दे रही हैं। लाखों भक्तों की आस्था और सुरक्षा दोनों को संतुलित रखते हुए उत्तराखंड सरकार और संबंधित संस्थाएं इस वर्ष चारधाम यात्रा को सुगम और सुरक्षित बनाने का पूरा प्रयास कर रही हैं।
इसे भी पढ़ें-चारधाम यात्रा शुरू, सीएम धामी ने जत्थे को दिखाई हरी झंडी



