पश्चिम एशिया संकट पर केंद्र हुआ अलर्ट, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने आईजीओएम की पहली बैठक की अध्यक्षता की

यह बैठक नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन-2 में आयोजित हुई, जिसमें कई प्रमुख मंत्रालयों के वरिष्ठ मंत्रियों ने भाग लिया।

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में उभरते भू-राजनीतिक संकट के मद्देनजर केंद्र सरकार ने सतर्क रुख अपनाते हुए उच्चस्तरीय निगरानी और समन्वय की प्रक्रिया तेज कर दी है। इसी क्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक अनौपचारिक मंत्रिस्तरीय समूह (आईजीओएम) की पहली बैठक की अध्यक्षता की। यह बैठक नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन-2 में आयोजित हुई, जिसमें कई प्रमुख मंत्रालयों के वरिष्ठ मंत्रियों ने भाग लिया।

बैठक में वित्त एवं कॉरपोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमन, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप पुरी, विद्युत मंत्री मनोहर लाल, रसायन एवं उर्वरक मंत्री जे पी नड्डा, उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री पहलाद जोशी, नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जीतेन्द्र प्रताप सिंह मौजूद रहे।

बैठक के दौरान पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति और उसके भारत पर संभावित प्रभावों का व्यापक आकलन किया गया। आईजीओएम के तहत विभिन्न क्षेत्रों ऊर्जा, व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला, नागरिक उड्डयन और आंतरिक सुरक्षा पर पड़ने वाले असर की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और किसी भी आपात परिस्थिति से निपटने के लिए तैयार है।

रक्षा मंत्री राजनाथ ने बैठक में सक्रिय, समन्वित और दूरदर्शी रणनीति अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बदलते वैश्विक परिदृश्य को देखते हुए सभी मंत्रालयों को सतर्क रहना होगा और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता बनाए रखनी होगी। उन्होंने सचिवों के सात अधिकार प्राप्त समूहों (ईजीओएस) द्वारा दी गई प्रस्तुतियों की समीक्षा भी की, जिनमें पहले से लागू नीतिगत उपायों और संभावित चुनौतियों का विस्तृत खाका प्रस्तुत किया गया।

रक्षा मंत्री ने ईजीओएस को निर्देश दिया कि वे स्थिति की लगातार निगरानी करते रहें और मध्यम से दीर्घकालिक रणनीति तैयार करें। उन्होंने उच्च-स्तरीय समन्वय बनाए रखने और सभी नीतिगत प्रयासों को समयबद्ध तरीके से लागू करने पर भी बल दिया। इसके साथ ही उन्होंने संबंधित मंत्रियों से रचनात्मक सुझाव देने का आह्वान किया, ताकि देश को हर स्थिति के लिए तैयार रखा जा सके।

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित किया जाएगा। राज्यों और जिला प्रशासन को भी स्थिति से अवगत कराने और आवश्यक दिशा-निर्देश देने पर जोर दिया गया, ताकि किसी भी प्रकार की आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया दी जा सके।

इसके अलावा, आम नागरिकों तक सही और समय पर जानकारी पहुंचाने के लिए सूचना प्रसारण तंत्र को मजबूत करने की बात कही गई। मंत्रालयों और विभागों को निर्देश दिया गया कि वे एमआईबी के व्हाट्सएप चैनल के माध्यम से नियमित रूप से अपडेट, सलाह और आवश्यक जानकारी साझा करें। इसका उद्देश्य अफवाहों, गलत सूचनाओं और फर्जी खबरों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है।

बैठक के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपने संदेश में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार किसी भी वैश्विक संकट के प्रभाव से भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार हर स्थिति पर नजर रखे हुए है और आवश्यक कदम उठाने में कोई कमी नहीं छोड़ी जाएगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया की स्थिति का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार, व्यापारिक गतिविधियों और आपूर्ति श्रृंखलाओं पर पड़ सकता है। ऐसे में भारत द्वारा समय रहते की गई यह तैयारी देश की आर्थिक और रणनीतिक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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