
लखनऊ। योगी आदित्यनाथ सरकार राज्य के ग्रामीण इलाकों में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने और कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए लगातार बड़े और नीतिगत कदम उठा रही है। इसी कड़ी में अब प्रदेश के सुदूर, पिछड़े और छोटे गांवों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित और सुलभ यातायात सुविधा मुहैया कराने के लिए मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना पर काम बेहद तेज कर दिया गया है।
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UPSRTC ने झोंकी ताकत
इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य के उन सुदूर इलाकों और छोटे से छोटे गांवों तक सरकारी व अनुबंधित बसों की पहुंच को बढ़ाना है, जो आजादी के दशकों बाद भी मुख्यधारा की परिवहन व्यवस्था से पूरी तरह नहीं जुड़ पाए थे। उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) ने सरकार की इस योजना को धरातल पर उतारने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।

योजना के शुरुआती चरण के तहत लगभग 80 बसों का सफल संचालन भी शुरू किया जा चुका है, जिससे ग्रामीणों को अब जिला मुख्यालयों और नजदीकी कस्बों तक आने-जाने में बड़ी सहूलियत मिलने लगी है। इस योजना के फलक, इसकी व्यापकता और इसके दूरगामी सामाजिक-आर्थिक असर को इस बात से समझा जा सकता है कि सरकार इसके माध्यम से उत्तर प्रदेश की 59 हजार से अधिक ग्राम सभाओं को सीधे तौर पर बस सेवा से जोड़ने का एक विशाल और ऐतिहासिक लक्ष्य लेकर चल रही है।
योजना का खाका तैयार
उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, इस पूरी योजना का खाका इस तरह तैयार किया गया है कि ग्रामीणों को अपने घर के पास से ही ब्लॉक, ग्राम पंचायत, तहसील और सीधे जिला मुख्यालय तक आने-जाने के लिए बिना किसी परेशानी के सीधी बस कनेक्टिविटी मिल सके। इससे न केवल ग्रामीण क्षेत्र के लोगों के समय की बड़ी बचत होगी, बल्कि उन्हें बेहद कम और किफायती दरों पर सुरक्षित सफर की गारंटी भी मिलेगी।
यूपीएसआरटीसी के सहायक प्रबंधक उमेश आर्य ने इस संबंध में विस्तृत जानकारी साझा करते हुए बताया कि, अब तक प्रदेश के 70 जिलों से इस योजना के लिए कुल 858 निजी बस ऑपरेटरों के आवेदनों को पूरी जांच-पड़ताल और मानकों के मिलान के बाद अंतिम रूप से चयनित कर लिया गया है। विभिन्न अधिकृत एजेंसियों के माध्यम से ग्रामीण इलाकों में मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना के तहत बसों का पहिया घूमना शुरू हो गया है और आने वाले दिनों में इनकी संख्या में भारी इजाफा होने जा रहा है।
28 सीटों वाली मिनी बस
पहाड़ी, संकरे, पथरीले और दुर्गम ग्रामीण रास्तों को ध्यान में रखते हुए इस योजना के तहत बसों के आकार, उनकी इंजन क्षमता और यात्रियों की बैठने की क्षमता को लेकर विशेष एवं कड़े मानक तय किए गए हैं। सहायक प्रबंधक उमेश आर्य ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों की चौड़ाई और वहां के तीखे घुमावों को देखते हुए योजना के अंतर्गत अधिकतम 28 सीटों वाली विशेष मिनी बसें ही चलाई जा रही हैं।
इन मिनी बसों की कुल लंबाई भी 7 मीटर तक ही निश्चित की गई है, ताकि ये आसानी से छोटे गांवों के पतले रास्तों के भीतर तक प्रवेश कर सकें और संकरे रास्तों व मोड़ों पर भी बिना किसी बाधा के सुरक्षित तरीके से चल सकें, जिन निजी ऑपरेटरों के आवेदनों को परिवहन निगम की ओर से हरी झंडी दिखाई गई है, उन्होंने सरकार द्वारा तय किए गए इन कड़े मानकों और सुरक्षा मानदंडों के आधार पर देश की बड़ी वाहन निर्माता कंपनियों को नई बसों के निर्माण के ऑर्डर भी दे दिए हैं।
जल्द सार्वजनिक होगा शेड्यूल
जैसे-जैसे कंपनियों से इन नई मिनी बसों की डिलीवरी मिलती जा रही है, वैसे-वैसे नए निर्धारित मार्गों पर बसों का संचालन लगातार शुरू किया जा रहा है। बसों के रूट तय करने की जिम्मेदारी पूरी तरह से पारदर्शी रखते हुए जिला स्तरीय कमेटियों को सौंपी गई है, जो स्थानीय विधायकों, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों की वास्तविक मांग के आधार पर सबसे जरूरी मार्गों का चयन कर रही हैं। इन सभी रूटों की सूची और बसों की समय-सारणी जल्द ही सार्वजनिक रूप से साझा की जाएगी।
परिवहन के मोर्चे पर इस बड़ी क्रांति को लाने के साथ-साथ यह योजना उत्तर प्रदेश के ग्रामीण युवाओं के लिए तरक्की के नए रास्ते खोलने का एक बड़ा माध्यम भी बनने जा रही है। चूंकि इस पूरी योजना का संचालन पूरी तरह से निजी बस संचालकों के माध्यम से किया जा रहा है, इसलिए रूट के नजदीकी गांवों में रहने वाले बेरोजगार युवाओं और स्थानीय ट्रांसपोर्टर्स के लिए बड़े पैमाने पर सीधे और अप्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।
युवाओं को मिलेगा रोजगार
इन बसों के सुचारू, सुरक्षित और समयबद्ध संचालन के लिए भारी संख्या में स्थानीय बस ड्राइवरों, कंडक्टरों, मैकेनिक्स, क्लीनर्स और हेल्पर्स के साथ-साथ प्रबंधन स्तर पर काम देखने वाले लोकल स्टाफ की आवश्यकता पड़ रही है। सरकार की इस रोजगारपरक नीति से स्थानीय स्तर पर युवाओं को उनके घर के पास ही सम्मानजनक आजीविका मिल रही है, जिससे रोजगार की तलाश में बड़े शहरों की ओर होने वाले पलायन पर भी काफी हद तक लगाम लगने की उम्मीद है।
इसके साथ ही, ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन व्यवस्था सुधरने से स्थानीय बाजारों को मजबूती मिलेगी, किसान अपनी फसलों और सब्जियों को समय पर नजदीकी मंडियों तक पहुंचा सकेंगे और ग्रामीण छात्र-छात्राओं, विशेषकर बेटियों को उच्च शिक्षा के लिए शहरों के कॉलेजों तक जाने में सुरक्षा और सुविधा दोनों मिलेगी।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मास्टर स्ट्रोक
राजनीतिक और प्रशासनिक विशेषज्ञ योगी सरकार के इस कदम को ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने वाला एक बड़ा मास्टरस्ट्रोक मान रहे हैं, जो आने वाले समय में उत्तर प्रदेश के गांवों की आर्थिक और सामाजिक तस्वीर को पूरी तरह बदल कर रख देगा। सरकार अब जनभागीदारी और इस मजबूत ट्रांसपोर्ट मॉडल के जरिए हर हाथ को काम और हर गांव को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की अपनी प्रतिबद्धता को तेजी से पूरा कर रही है।
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