
लखनऊ। अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी को लेकर उठे विवाद पर बीजेपी के वरिष्ठ नेता बृजभूषण शरण सिंह एक बार फिर मुखर होकर सामने आए हैं। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में गड़बड़ी का मुद्दा पहले भी उठा चुके सिंह ने शनिवार को दोबारा दोहराया कि राम मंदिर में यह खेल पहले दिन से ही चल रहा था। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि, इसी वजह से वे आज तक कभी राम मंदिर में दर्शन करने के लिए नहीं गए, जो अपने आप में एक बेहद चौंकाने वाला और गंभीर बयान माना जा रहा है।
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चार साल पहले ही जता दी थी आशंका
गोंडा जिले के कैसरगंज लोकसभा सीट से पूर्व सांसद रहे बृजभूषण शरण सिंह ने अपनी बात रखते हुए कहा कि, जो कुछ भी उन्हें कहना था, वह वे पहले ही कह चुके हैं।

उन्होंने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि जब इस मुद्दे पर पूरी दुनिया में कोई बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था, तब उन्होंने चार साल पहले ही इस बारे में खुलकर बात कर दी थी। उन्होंने कहा कि, यही वजह है कि वे आज तक राम जन्मभूमि के दर्शन करने के लिए नहीं गए, क्योंकि उनके मुताबिक वहां शुरुआती दिन से ही कुछ न कुछ गड़बड़ चल रहा था।
पहले भी व्यवस्था पर उठा चुके हैं सवाल
गौरतलब है कि बृजभूषण शरण सिंह ने आज से करीब चार साल पहले भी अयोध्या के राम मंदिर की व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए थे। उस वक्त उन्होंने आरोप लगाया था कि, गोंडा और आसपास के इलाकों के स्थानीय लोगों को जान-बूझकर अयोध्या की व्यवस्था और गतिविधियों से दूर रखा गया है। उनका यह बयान उस समय भी काफी चर्चा में रहा था, लेकिन अब जब दान राशि की चोरी का मामला फिर से सुर्खियों में है, तो उनका यह पुराना बयान भी नए सिरे से प्रासंगिक हो गया है।
निष्पक्ष जांच की मांग
जब समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सबसे पहले राम मंदिर में दान राशि से जुड़े कथित घोटाले का मुद्दा उठाया था, तब भाजपा के तमाम नेताओं में से बृजभूषण शरण सिंह ही ऐसे पहले नेता थे, जिन्होंने इस विषय पर खुलकर प्रतिक्रिया दी थी। उस वक्त उन्होंने यह भी कहा था कि, अगर वे इस मामले में पूरी सच्चाई बोल देंगे, तो इसका खामियाजा उन्हें खुद भुगतना पड़ सकता है, क्योंकि इस पूरे प्रकरण में कई बड़े और प्रभावशाली लोग शामिल हैं।
इसके बावजूद उन्होंने इस बात पर जोर दिया था कि, इस पूरे मामले की एक निष्पक्ष और गहन जांच जरूर होनी चाहिए, ताकि सच्चाई देश के सामने आ सके। कुछ दिन पहले भी उन्होंने इसी विषय पर एक और अहम बयान देते हुए कहा था कि कोई भी मुद्दा यूं ही अचानक और बिना किसी ठोस वजह के सामने नहीं आता। उन्होंने एक कहावत का हवाला देते हुए कहा था कि जिस तरह बिना आग के धुआं नहीं उठता, ठीक उसी तरह इतने बड़े मुद्दे के पीछे भी जरूर कोई सच्चाई छिपी है।
समारोहों में नहीं किया गया आमंत्रित
यह बात भी गौर करने लायक है कि बृजभूषण शरण सिंह का श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन से काफी पुराना और गहरा नाता रहा है। वे उन शुरुआती नेताओं में शामिल थे, जिन्होंने राम मंदिर आंदोलन के दौरान सक्रिय भूमिका निभाई थी। इसके बावजूद यह एक दिलचस्प और चर्चा का विषय रहा है कि जब राम मंदिर के भूमि पूजन और उसके बाद भव्य उद्घाटन जैसे बड़े और ऐतिहासिक कार्यक्रम आयोजित किए गए, तब बृजभूषण शरण सिंह को इन समारोहों में आमंत्रित नहीं किया गया था।

आंदोलन से जुड़े रहने के बावजूद इन बड़े आयोजनों से उन्हें दूर रखा जाना, कई राजनीतिक विश्लेषकों की नजर में एक अहम संकेत माना जाता रहा है। अब जब उन्होंने दान चोरी के मामले पर दोबारा तीखा बयान दिया है, तो इसे उनके पुराने अनुभवों और आशंकाओं की पुष्टि के रूप में भी देखा जा रहा है।
मामूली प्रकरण समझने की भूल न हो
बृजभूषण शरण सिंह ने अपने पिछले बयानों में यह भी स्पष्ट किया था कि इस पूरे प्रकरण को एक सामान्य या मामूली मामला समझने की भूल नहीं करनी चाहिए। उनके अनुसार, इस मुद्दे की आंच अब केवल राम मंदिर ट्रस्ट तक ही सीमित नहीं रह गई है, बल्कि इसका असर सीधे केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश की राज्य सरकार तक भी पहुंचने लगा है। यह बयान इस बात का संकेत देता है कि आने वाले समय में यह मुद्दा राजनीतिक रूप से और भी गरमा सकता है।
बृजभूषण शरण सिंह का ये बयान ऐसे समय में आया है, जब राम मंदिर में चढ़ावे और दान राशि को लेकर पहले से ही कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। एक ऐसे नेता का, जो खुद राम जन्मभूमि आंदोलन का हिस्सा रहा हो, यह कहना कि वे आज तक मंदिर में दर्शन के लिए नहीं गए, निश्चित रूप से इस पूरे विवाद को एक नया और गंभीर मोड़ देने वाला बयान माना जा रहा है। अब देखने वाली बात यह होगी कि इस मामले में आगे प्रशासन और मंदिर ट्रस्ट की तरफ से क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।
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