एक तरफ राष्ट्रपति का आगमन, दूसरी तरफ शीतला मंदिर में बिछीं लाशें, नालंदा में मची भगदड़ ने छीनी 8 जिंदगी

 नालंदा। बिहार के ऐतिहासिक जिले नालंदा में एक ऐसी दर्दनाक घटना घटी है, जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। यहां एक तरफ तो पूरा जिला प्रशासन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के स्वागत की भव्य तैयारियों में जुटा हुआ है। वहीं दूसरी ओर दीपनगर थाना क्षेत्र के मघड़ा स्थित प्रसिद्ध शीतला मंदिर में भगदड़ मच गई और इस घटना के आठ श्रद्धालुओं की मौत हो गई।

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खुली व्यवस्थाओं की पोल

मंगलवार की सुबह हुई इस हृदय विदारक घटना ने न सिर्फ श्रद्दालुओं के परिवारों को उम्र भर का गम दे दिया, बल्कि प्रशासन की व्यवस्थाओं की पोल भी खोल दी। खबर है कि, मंदिर परिसर में मची इस भगदड़ में अब तक आठ महिला श्रद्धालुओं जान जा चुकी है, जबकि दर्जनों लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

Sheetla Temple Stampede

मृतकों में अधिकांश महिलाएं राजधानी पटना और आसपास के ग्रामीण इलाकों की रहने वाली थीं, जो चैत्र मास के पवित्र मंगलवार को माता शीतला के दर्शन और जलाभिषेक के लिए यहां आई थीं। इस भीषण हादसे ने एक बार फिर बड़े मेलों और मंदिरों में भीड़ प्रबंधन के दावों पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।

बता दें कि, नालंदा का मघड़ा स्थित शीतला मंदिर पूरे बिहार में अपनी विशेष धार्मिक महत्ता और अटूट आस्था के लिए जाना जाता है। मान्यता है कि, यहां मंगलवार को सच्चे मन से पूजा-अर्चना करने वाले श्रद्धालुओं की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं, इसी विश्वास के साथ 31 मार्च की सुबह भी हजारों की संख्या में श्रद्धालु कतारबद्ध होकर माता के दर्शन के लिए अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे।

एक दूसरे को रौंदते हुए भागे लोग 

प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि, भोर के समय जैसे ही मंदिर के मुख्य कपाट खोले गए, दर्शनार्थियों का एक विशाल रेला अचानक अंदर की तरफ तेजी से बढ़ा। इसी आपाधापीमें में किसी अज्ञात अफवाह या पीछे से लगे जबरदस्त धक्के की वजह से भीड़ का संतुलन बिगड़ गया और देखते ही देखते भगदड़ मच गई और मंदिर परिसर में चीख-पुकार मच गई। लोग अपनी जान बचाने के लिए एक-दूसरे को रौंदते हुए भागने लगे।

चूंकि शीतला मंदिर की ओर जाने वाली गलियां और प्रवेश द्वार काफी संकीर्ण हैं, इसलिए महिलाओं और बुजुर्गों को संभलने का बिल्कुल भी मौका नहीं मिला और वे भीड़ के नीचे दबती चली गईं। स्थानीय लोगों का आक्रोश इस बात पर है कि, हर मंगलवार को यहां हजारों की संख्या में भीड़ जुटती है। इसके बावजूद मौके पर पुलिस बल की तैनाती न के बराबर रहती है।

इस दुखद हादसे का सबसे विडंबनापूर्ण पहलू यह है कि, आज ही के दिन नालंदा विश्वविद्यालय का ऐतिहासिक दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया है। इस भव्य कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी समेत देश-प्रदेश के कई दिग्गज पहुंचने वाले हैं। इस हाई-प्रोफाइल वीआईपी मूवमेंट के कारण जिले का लगभग समस्त वरिष्ठ प्रशासनिक अमला और अधिकांश पुलिस बल सुरक्षा और प्रोटोकॉल ड्यूटी में तैनात है।

सूचना के बाद भी देर से मिली मदद

स्थानीय ग्रामीणों और मृतकों के परिजनों का सीधा आरोप है कि, प्रशासन को इस मंदिर की भीड़ का अंदाजा पहले से था, लेकिन वीआईपी ड्यूटी की प्राथमिकता के चलते आम श्रद्धालुओं की सुरक्षा को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया। अब सवाल ये है कि, क्या राष्ट्रपति के कार्यक्रम की चकाचौंध को सुरक्षित बनाने के चक्कर में साधारण नागरिकों की जान को जोखिम में डाल दिया गया। क्या दीपनगर थाना और जिला प्रशासन ने अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करने में अक्षमता दिखाई, जिसका खामियाजा इन मासूम श्रद्धालुओं को अपनी जान देकर चुकाना पड़ा।

हादसे की सूचना मिलते ही सबसे पहले स्थानीय ग्रामीणों ने अपने स्तर पर राहत और बचाव कार्य शुरू किया और दबे हुए लोगों को बाहर निकाला। प्रशासनिक सुस्ती का आलम यह था कि, सूचना मिलने के काफी देर बाद एम्बुलेंस और अतिरिक्त पुलिस बल मौके पर पहुंचा। अब तक आठ महिलाओं के शव बरामद किए जा चुके हैं, जिन्हें पोस्टमार्टम के लिए बिहार शरीफ सदर अस्पताल भेजा गया है।

घायलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। वर्तमान में 12 से अधिक श्रद्धालु उपचाराधीन हैं, जिनमें से चार की स्थिति अत्यंत चिंताजनक बनी हुई है। मौके पर पहुंचे उपमंडल मजिस्ट्रेट ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मंदिर परिसर को पूरी तरह खाली करा दिया है और फिलहाल दर्शन-पूजन पर रोक लगा दी गई है।

इलाके में शोक और तनाव

हालांकि, जिला प्रशासन अभी भी मौतों के आधिकारिक आंकड़ों को लेकर बेहद सतर्कता बरत रहा है और पूरी जांच के बाद ही विस्तृत बयान जारी करने की बात कह रहा है। घटना के बाद से पूरे इलाके में तनाव और शोक का माहौल व्याप्त है और भारी पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है।

Sheetla Temple Stampede

सदर अस्पताल के बाहर का नजारा अत्यंत कारुणिक है, जहां अपनों को खोने वाले परिजनों की चीखें वहां मौजूद लोगों का कलेजा छलनी कर रही हैं। पटना से आए एक परिवार ने बताया कि, वे पूरी श्रद्धा के साथ माता के दरबार में माथा टेकने आए थे, लेकिन उन्हें क्या पता था कि, ये सब हो जाएगा।

मंदिर प्रबंधन समिति भी अब जांच के घेरे में है, क्योंकि मंदिर में प्रवेश और निकास के लिए अलग-अलग गलियारों की व्यवस्था नहीं थी और बैरिकेडिंग के नाम पर खानापूर्ति की गई थी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना प्रकट की है और घायलों के समुचित इलाज के निर्देश दिए हैं, लेकिन स्थानीय जनता का गुस्सा शांत नहीं हो रहा है।

 

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